कम लागत में बनी आध्यात्मिक सिनेमाई प्रस्तुतियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मजबूत विषयवस्तु दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने के लिए सबसे बड़ा आधार होती है। विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में तैयार फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने टिकट खिड़की पर अपनी असाधारण व्यावसायिक सफलता से सभी को हैरान कर दिया है। बिना किसी भारी-भरकम स्टारकास्ट के, केवल दर्शकों की सकारात्मक चर्चा और वर्ड ऑफ माउथ के सहारे इस फिल्म ने 400 करोड़ रुपये के मील के पत्थर को बहुत पीछे छोड़ दिया है। हिंदी पट्टी में ऐतिहासिक कारोबार दर्ज करने के बाद अब यह फिल्म दक्षिण भारतीय दर्शकों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने जा रही है।
होम्बले फिल्म्स के सहयोग से 9 अक्टूबर को तेलुगू संस्करण की शुरुआत
हिंदी दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा बटोरने के बाद फिल्म के निर्माताओं ने इसे क्षेत्रीय भाषाओं में ले जाने का फैसला किया है। इसी क्रम में 5 अक्टूबर को फिल्म के तेलुगू संस्करण का आधिकारिक ट्रेलर दर्शकों के सामने पेश किया गया। इस वीडियो के सामने आते ही निर्माताओं ने बड़े पर्दे पर फिल्म के तेलुगू प्रदर्शन की तारीख का भी ऐलान कर दिया है। यह फिल्म 9 अक्टूबर को तेलुगू भाषा में सिनेमाघरों के अंदर प्रदर्शित की जाएगी।
दक्षिण भारत में इस रिलीज की कमान विख्यात प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन घराने होम्बले फिल्म्स ने अपने हाथों में ली है। ‘कांतारा’ और ‘केजीएफ’ जैसी पैन-इंडिया सफलताओं के लिए मशहूर यह बैनर इस आध्यात्मिक परियोजना के साथ पहले से भी जुड़ा रहा है, क्योंकि फिल्म के विदेशी वितरण का जिम्मा भी इसी कंपनी के पास रहा है। अब घरेलू स्तर पर दक्षिण के बाजार में इस फिल्म को उतारने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
ट्रेलर में झलकी बाबा नीम करोली के जीवन की प्रमुख घटनाएं
जारी किए गए तेलुगू ट्रेलर में पूज्य आध्यात्मिक विभूति बाबा नीम करोली के संपूर्ण जीवन सफर के प्रेरक प्रसंगों को प्रमुखता से दर्शाया गया है। इसमें उनके संन्यास और साधु जीवन के शुरुआती दौर से लेकर उन घटनाओं को समेटा गया है जिन्होंने उन्हें जनमानस के बीच पूजनीय बनाया।
ट्रेलर के प्रमुख दृश्यों में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान उन्हें चलती ट्रेन से नीचे उतारे जाने का सुप्रसिद्ध प्रसंग भी शामिल किया गया है, जिसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ सकी थी। इसके अलावा लोगों के जीवन को नई आध्यात्मिक दिशा देने और उनके मार्गदर्शन के कई महत्वपूर्ण क्षणों को पर्दे पर उतारा गया है। ट्रेलर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया मंचों पर दक्षिण भारतीय सिनेप्रेमियों के बीच भी इस विषय को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है।
59 दिनों में 423.26 करोड़ का ग्रॉस कलेक्शन
फिल्म के निर्माण पर सिर्फ 2 करोड़ रुपये का मामूली खर्च आया था, लेकिन इसके बदले फिल्म की वैश्विक कमाई ने व्यापार विश्लेषकों को चौंका दिया है। सिनेमाघरों में प्रदर्शन के 59 दिन पूरे कर लेने के बावजूद फिल्म की दैनिक कमाई स्थिर बनी हुई है। प्रदर्शन के 59वें दिन, यानी 4 अक्टूबर (रविवार) को फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 3 करोड़ रुपये की टिकट बिक्री दर्ज की।
अगर कुल वैश्विक व्यापार की बात करें तो लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत वाली इस फिल्म ने दुनिया भर के सिनेमाघरों से अब तक 423.26 करोड़ रुपये का कुल ग्रॉस कलेक्शन जुटा लिया है। निवेश और कमाई के अनुपात के लिहाज से यह आंकड़ा भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक अप्रत्याशित रिकॉर्ड पेश करता है।
कलाकारों का अभिनय और दक्षिण भारतीय बाजार में इम्तिहान
निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने इस पूरी गाथा को बेहद मार्मिक, प्रामाणिक और भावनात्मक दृष्टिकोण के साथ पर्दे पर प्रस्तुत किया है। अभिनय की बात करें तो अभिनेता शोभिनव सत्या ने इस परियोजना में मुख्य किरदार को निभाया है। उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से खूब सराहना मिली है।
शोभिनव सत्या के अलावा फिल्म में चंदन के आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे और भगवानदास पटेल जैसे मंझे हुए कलाकारों ने सहायक भूमिकाएं निभाई हैं। उत्तर भारत और हिंदी भाषी क्षेत्रों में अपार स्नेह पाने के बाद अब इस आध्यात्मिक रचना की असली परीक्षा तेलुगू सिनेमा के दर्शकों के बीच होगी। यह देखना महत्वपूर्ण रहेगा कि उत्तर भारत की तरह ही दक्षिण के दर्शक भी इस कहानी को वैसा ही भावनात्मक जुड़ाव देते हैं या नहीं।


















