फिल्म जगत में पिछले कई दशकों से अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने एक कलाकार के जीवन और उसकी कला के विभिन्न पहलुओं पर खुलकर बात की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने अभिनय सफर के दौरान निभाए गए कुछ यादगार और बेहतरीन किरदारों की तस्वीरें साझा करते हुए एक कलाकार के भीतर की भावनाओं और संघर्षों का बहुत ही बारीकी से जिक्र किया है।
कलाकार की संवेदनशीलता और पर्दे पर जज्बात
अभिनेता का मानना है कि एक कलाकार बहुत ही संवेदनशील दिल का इंसान होता है। वह परदे पर उन सभी छिपी हुई भावनाओं को जीवंत कर देता है, जिन्हें आम इंसान अपनी पूरी जिंदगी दुनिया की नजरों से छिपाकर रखता है। जिंदगी के अलग-अलग पड़ावों पर इंसान को गम, डर, जलन, प्यार, खुशी और असुरक्षा जैसी भावनाओं को अपने भीतर ही तलाशना पड़ता है। एक अभिनेता का दिल बहुत मजबूत और बहादुर होता है, क्योंकि उसे अपनी इन तमाम अंदरूनी भावनाओं को कैमरे के सामने बेहद ईमानदारी के साथ पेश करना होता है।
शोहरत और पैसों से परे अभिनय की असल सच्चाई
अनुपम खेर का कहना है कि बेशक अभिनय के क्षेत्र में आने के बाद नाम, शोहरत, पैसा और तमाम तरह के ऐशो-आराम मिल जाते हैं, लेकिन जब कैमरा अभिनेता के चेहरे के बिल्कुल सामने आता है, तो इनमें से कोई भी सुविधा या आराम काम नहीं आता है। उस वक्त केवल कलाकार का हुनर, उसकी कला और एक खास किस्म का जज्बा ही काम आता है। कई बार तो कैमरे के सामने बेहतरीन परफॉर्मेंस देने के लिए टूटे हुए दिल की भी जरूरत पड़ जाती है, जो किरदार में जान फूंक देता है।
शुरुआती दिनों की भागदौड़ और खुद को साबित करने की जिद
अपने फिल्मी करियर के शुरुआती शुरुआती दौर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उस वक्त उनके मन में खुद को साबित करने की एक अलग ही हड़बड़ी रहती थी। इंडस्ट्री में बिना किसी गॉडफादर के कदम रखने वाले अनुपम खेर के पास उस समय केवल नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की ट्रेनिंग और उनका खुद का आत्मविश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी था। शुरुआती दौर में वह लगातार यही साबित करने की कोशिश में लगे रहते थे कि वह क्या कुछ कर सकते हैं और बाकी लोगों से कितने अलग हैं।
बदलता वक्त और अभिनय के प्रति नया नजरिया
वक्त के साथ आए बदलावों पर बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कुछ वर्षों में वह बतौर अभिनेता काफी शांत और सहज हो गए हैं। अब उन्हें किसी भी इंसान को प्रभावित करने या खुद को बेहतर साबित करने की वैसी कोई आवश्यकता महसूस नहीं होती है। उन्हें अब किरदारों के भीतर छिपी अनिश्चितताओं, उनकी खामोशी, आपसी विरोधाभासों, कमजोरियों और यहां तक कि उनकी मूर्खताओं में भी मजा आने लगा है।
उम्र के साथ घटती घबराहट और बढ़ता आत्मविश्वास
वह अब खुद को बतौर कलाकार और ज्यादा चुनौतियों में डालते हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब उनके मन में पहले जैसी घबराहट बिल्कुल नहीं होती है। उम्र बढ़ने के साथ अभिनय के क्षेत्र में यही सबसे अच्छी बात होती है कि आप लोगों को यह जताना बंद कर देते हैं कि आपको किस चीज की कितनी जानकारी है। उन्होंने अपने इस लंबे सफर के दौरान निभाए गए अलग-अलग चेहरों को याद करते हुए कहा कि हर एक किरदार ने उन्हें अभिनय के बारे में और खुद उनके अपने बारे में कुछ नया ही सिखाया है।



















