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एक ही तरह के निगेटिव रोल मिलने से परेशान हैं बॉबी देओल, एक्टर ने बयां किया अपना दर्दमनोरंजन
23 अग॰ 2026, 5:20 pm (20 दिन पहले)· 2

एक ही तरह के निगेटिव रोल मिलने से परेशान हैं बॉबी देओल, एक्टर ने बयां किया अपना दर्द

बॉबी देओल ने करियर में शानदार वापसी के बाद खलनायक की छवि मिलने पर खुलकर बात की है। उनका कहना है कि उन्हें विलेन बनने से ऐतराज नहीं है, लेकिन बार-बार एक जैसे किरदार मिलने से उनका अभिनय दायरा सीमित हो रहा है।

बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल ने हाल के वर्षों में अपने अभिनय सफर में एक जबरदस्त बदलाव देखा है। एक समय ऐसा था जब उनके करियर में ठहराव आ गया था, लेकिन फिर उन्होंने अपनी बेहतरीन अदाकारी के दम पर धमाकेदार वापसी की। ओटीटी और बड़े पर्दे पर उनके द्वारा निभाए गए नकारात्मक किरदारों ने उनके डूबते करियर को एक नई संजीवनी दी है। हालांकि अब इस सफलता के साथ उनके सामने एक नया संकट भी खड़ा हो गया है, क्योंकि उन्हें लगातार एक ही सांचे में ढले हुए रोल्स ऑफर किए जा रहे हैं।

करियर को कैसे मिली नई उड़ान

बॉबी देओल के करियर की गाड़ी जब ढलान पर थी, तब उन्हें निर्देशक प्रकाश झा की चर्चित वेब सीरीज ‘आश्रम’ में काम करने का मौका मिला। इस सीरीज में उन्होंने बाबा निराला की भूमिका निभाकर हर तरफ तहलका मचा दिया था। एक ढोंगी बाबा के रूप में उनका यह रूप इतना लोकप्रिय हुआ कि दर्शकों ने उनके पुराने रोमांटिक हीरो वाले अवतार को पूरी तरह भुला दिया। इसके बाद साल 2023 में रिलीज हुई निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘एनिमल’ ने उनके करियर को आसमान पर पहुंचा दिया। फिल्म में उनका स्क्रीन टाइम भले ही सीमित था, लेकिन अबरार हक के रूप में उन्होंने खूंखार विलेन बनकर ऐसा जादू चलाया कि लोग उनके मु मुरीद हो गए।

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एक ही छवि में बंधने का डर

‘एनिमल’ की अपार सफलता के बाद से फिल्म इंडस्ट्री में यह धारणा बन गई कि बॉबी देओल इस तरह के कुटिल और खतरनाक किरदारों के लिए ही बने हैं। यही वजह है कि अब उन्हें लगातार इसी शैली की फिल्मों के ऑफर मिल रहे हैं। अभिनेता का मानना है कि खलनायक की भूमिका निभाने से उन्हें कोई व्यक्तिगत परेशानी नहीं है, बल्कि उन्हें इस बात की चिंता सता रही है कि इंडस्ट्री उन्हें केवल एक ही खांचे में फिट कर रही है। उनका साफ कहना है कि किसी भी कलाकार के लिए अभिनय में विविधता होना सबसे ज्यादा जरूरी है और एक जैसे किरदार लगातार करते रहने से उनकी अभिनय क्षमता का दायरा सिमट जाता है।

नई फिल्मों और किरदारों की तलाश

दिल्ली में आयोजित जागरण फिल्म फेस्टिवल के दौरान अपने दिल का हाल बयां करते हुए बॉबी देओल ने बताया कि जब किसी अभिनेता को किसी विशेष प्रकार के रोल में भारी सफलता मिल जाती है, तो निर्माता उसे दूसरे जॉनर में आजमाना बंद कर देते हैं। उनके साथ भी फिलहाल यही हो रहा है। वह इस तयशुदा इमेज से बाहर निकलने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। ‘कंगुवा’, ‘डाकू महाराज’, ‘हरि हर वीरा मल्लू’, ‘अल्फा’ और ‘जन नायकन’ जैसी बड़ी फिल्मों में वे अलग-अलग तरह के विलेन के रूप में नजर आए हैं, लेकिन अब वे रूढ़िबद्धता को तोड़ना चाहते हैं। उन्होंने अपनी आने वाली फिल्म ‘बंदर’ का उदाहरण देते हुए यह समझाया कि वह लीक से हटकर नए और अलग प्रयोग करना चाहते हैं, ताकि दर्शक उन्हें हर रूप में देख सकें।

शुरुआती सफर से लेकर अब तक का सफर

अपने फिल्मी सफर की शुरुआत बॉबी ने साल 1995 में आई फिल्म ‘बरसात’ से की थी। इसके बाद उन्होंने अपने शुरुआती दौर में ‘गुप्त’, ‘सोल्जर’, ‘बादल’, ‘बिच्छू’, ‘अजनबी’ और ‘हमराज’ जैसी कई यादगार फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं और दर्शकों के दिलों पर राज किया। समय के साथ उनके करियर में उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज जब वे एक बार फिर शिखर पर हैं, तो उनकी यह कसक लाजिमी है कि उन्हें केवल एक विलेन के तौर पर सीमित न किया जाए, बल्कि एक बहुमुखी अभिनेता के रूप में पहचाना जाए।

सवाल-जवाब

बॉबी देओल को किन फिल्मों से अपने करियर में नई संजीवनी मिली?
बॉबी देओल के करियर को प्रकाश झा की वेब सीरीज ‘आश्रम’ और संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘एनिमल’ से एक बड़ी और दमदार वापसी मिली।
बॉबी देओल को किस बात से परेशानी है?
बॉबी देओल को विलेन का किरदार निभाने से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उन्हें इस बात से परेशानी है कि उन्हें लगातार एक जैसे ही नकारात्मक रोल ऑफर हो रहे हैं।
बॉबी देओल ने अपने करियर की शुरुआत कब की थी?
बॉबी देओल ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 1995 में आई फिल्म ‘बरसात’ से की थी।
बॉबी देओल ने किस फिल्म फेस्टिवल के दौरान अपने इस दर्द को बयां किया?
बॉबी देओल ने दिल्ली में आयोजित जागरण फिल्म फेस्टिवल के दौरान अपने अभिनय से जुड़े इन अनुभवों का खुलासा किया।
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