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गोविंदा ने सुनाया मां निर्मला देवी का दर्द भरा किस्सा, परिवार के लिए मुंडवा लिया था सिर और भौहेंमनोरंजन
28 अक्तू॰ 2026, 4:53 pm (2 घंटे पहले)· 3

गोविंदा ने सुनाया मां निर्मला देवी का दर्द भरा किस्सा, परिवार के लिए मुंडवा लिया था सिर और भौहें

बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा ने अपनी मां निर्मला देवी के जीवन से जुड़ा एक बेहद भावुक और संघर्षपूर्ण किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी के दिनों में परिवार को बचाने के लिए उनकी मां ने अपनी खूबसूरती और पहचान को ताक पर रख दिया था।

माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य और लालन-पालन के लिए तमाम तरह की कठिनाइयों का सामना करते हैं। कई बार उन्हें अपने निजी सपनों का गला घोंटना पड़ता है, तो कभी परिवार की खातिर अपनी पहचान तक को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार होना पड़ता है। बॉलीवुड इंडस्ट्री में ‘हीरो नंबर 1’ के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता गोविंदा ने हाल ही में अपनी दिवंगत मां निर्मला देवी के जीवन से जुड़ा एक ऐसा ही मर्मस्पर्शी वाकया साझा किया है, जिसे जानने के बाद किसी की भी आंखें नम हो सकती हैं। एक्टर ने खुलासा किया कि उनके परिवार के अत्यंत बुरे वक्त में उनकी मां ने अपना सिर और भौहें तक मुंडवा ली थीं, जिसके पीछे बच्चों की परवरिश और घर को संभालने का एक बड़ा संकल्प जुड़ा हुआ था।

कठिन दौर और तंगी के दिन

एक मीडिया संस्थान के साथ हुई बातचीत के दौरान गोविंदा ने अपने शुरुआती जीवन के उन संघर्ष भरे दिनों को याद किया जब उनका पूरा परिवार भारी संकट से गुजर रहा था। उन्होंने बताया कि जिंदगी में एक ऐसा वक्त भी आया था जब उनके परिवार ने अपनी लगभग सारी जमा-पूंजी गंवा दी थी। उस विषम परिस्थिति में घर की बागडोर संभालने और बच्चों का पेट भरने के लिए निर्मला देवी ने कई कड़े और असहनीय फैसले लिए। गोविंदा ने बताया कि जब उनका पूरा परिवार गंभीर आर्थिक तंगी के दौर से जूझ रहा था, तब हालात इतने बदतर हो चुके थे कि सब कुछ लगभग समाप्त हो गया था।

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पिता की चेतावनी और बड़ा फैसला

गोविंदा ने उस वाकये को याद किया जब सारी पूंजी डूब जाने के बाद उनकी मां ने घर चलाने के लिए काम की तलाश में घर से बाहर कदम रखने का फैसला किया था। उस वक्त उनके पिता ने निर्मला देवी को आगाह करते हुए कहा था कि वह बहुत खूबसूरत हैं और यदि वह नौकरी या काम की तलाश में बाहर जाएंगी, तो समाज की बुरी नजर उन पर पड़ सकती है और लोग उन्हें गलत इरादों से देखेंगे। पिता की इस बात का निर्मला देवी पर गहरा असर हुआ और उन्होंने परिवार के सम्मान की रक्षा करने के लिए एक ऐसा कदम उठाया जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। उन्होंने अपना सिर और भौहें पूरी तरह मुंडवा लीं और साधु-संतों की तरह सादा जीवन जीने के साथ ही वैसे ही वस्त्र धारण करने लगीं।

प्राथमिकताएं और बच्चों का सम्मान

अभिनेता ने बताया कि उनकी मां की प्राथमिकताएं बिल्कुल स्पष्ट थीं और वह किसी भी कीमत पर यह सुनिश्चित करना चाहती थीं कि उनके सभी बच्चे समाज में सिर उठाकर और पूरे सम्मान के साथ बड़े हों। इसके लिए चाहे उन्हें खुद कितनी भी शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना क्यों न झेलनी पड़े, वह पीछे नहीं हटीं। गोविंदा ने इस बात पर जोर दिया कि निर्मला देवी के इन तमाम संघर्षों और बलिदानों ने उनके अपने निजी जीवन और दुनिया को देखने के नजरिए को बहुत गहराई से प्रभावित किया है। आज के समय में जब लोग सार्वजनिक मंचों पर उनकी आलोचना करते हैं या उनके बारे में तरह-तरह की बातें बनाते हैं, तो वह इन सब चीजों से बिल्कुल विचलित नहीं होते और बेहद सहजता से सब स्वीकार कर लेते हैं।

आलोचनाओं पर बेबाक राय और मां का संगीत सफर

गोविंदा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि ऐसी महान मां की संतान होने के नाते उनके लिए दुनिया की इन छोटी-लोटी बातों का कोई खास मायना नहीं रह जाता है। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसने क्या कहा और किसने क्या दिया, और वह इन सब विवादों से कोसों दूर रहते हैं। उनका मानना है कि वह किसी भी इंसान की पृष्ठभूमि और परिस्थितियों को जाने बिना उसे जज करने में यकीन नहीं रखते हैं। समय, हालात, देश और परिस्थितियां ही यह तय करती हैं कि कोई इंसान किस तरह की प्रतिक्रिया देगा। आज के दौर में देश का हर नागरिक किसी न किसी कशिश या परिस्थिति में उलझा हुआ है। आपको बता दें कि गोविंदा की मां निर्मला देवी अपने समय की बेहद प्रतिष्ठित और जानी-मानी हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका और अभिनेत्री थीं, जिनका 15 जून 1996 को 69 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।

सवाल-जवाब

गोविंदा की मां का क्या नाम था?
गोविंदा की मां का नाम निर्मला देवी था, जो अपने जमाने की जानी-मानी शास्त्रीय गायिका और अभिनेत्री थीं।
निर्मला देवी ने अपना सिर और भौहें क्यों मुंडवा ली थीं?
परिवार के अत्यधिक आर्थिक संकट के समय काम पर निकलने से पहले पति की चेतावनी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ऐसा किया था ताकि लोग उन्हें गलत नजरों से न देखें।
निर्मला देवी का निधन कब हुआ था?
निर्मला देवी का निधन 15 जून 1996 को 69 वर्ष की आयु में हुआ था।
गोविंदा ने अपनी मां के संघर्ष के बारे में कहां बात की?
गोविंदा ने एक मीडिया संस्थान के साथ बातचीत के दौरान अपनी मां के संघर्ष से जुड़े इस किस्से को साझा किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Aisha Khan@aisha-khan·1 घंटे पहले

मां ने परिवार के लिए इतने कड़े हालात झेले और खुद को इस तरह बदला, यह वाकई बहुत दिल दहला देने वाला है। उस दौर में एक महिला के लिए ऐसा कदम उठाना कितना मुश्किल रहा होगा, सोचकर ही रोंगटे खड़े जाते हैं। क्या गोविंदा के पिता ने बाद में इस फैसले में उनका साथ दिया था?

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·1 घंटे पहले

आयशा, बिल्कुल सही कहा आपने। मां का ऐसा बलिदान सुनकर सच में कलेजा कांप जाता है। उनके पिता ने तो बस हालात बताए थे, पर मां ने परिवार के लिए जो किया वो अद्भुत है।

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