फरीदाबाद में बोरवेल हादसाः 10 घंटे चले रेस्क्यू के बाद 200 फीट गहरे गड्ढे से निकाली गई नेहाराशिफल 28 सितंबर 2026: जानिए मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिनपूर्णिया में मटन देहाती का अनोखा जादू, दुबे दरबार ढाबा में उमड़ रही है खाने वालों की भारी भीड़सिंह राशिफल 28 सितंबर 2026: केतु के प्रभाव से अहंकार और जिद को छोड़ें, तभी मिलेगी सफलतामिर्जापुर 4 पर गोलू गुप्ता यानी श्वेता त्रिपाठी ने दिया बड़ा अपडेट, फिल्म के सीक्वल को लेकर भी कही ये बातवृश्चिक राशिफल 28 सितंबर 2026: सूर्य नेटवर्किंग से लाभ दिलाएंगे, शनि निर्णयों में लाएंगे गंभीरताउत्तराखंड में विदाई लेते मानसून का कहर जारी, देहरादून से उत्तरकाशी तक नदियां उफान पर और कई रास्ते बंदधार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण: मंदिर से घर आने के बाद तुरंत पैर क्यों नहीं धोने चाहिएदिलीप कुमार की एक बात से बदल गया था लता मंगेशकर का जीवन, उर्दू सीखने के लिए रख दी थी यह शर्ततुला राशिफल 28 सितंबर 2026: चंद्रमा की स्थिति से रिश्तों और कामकाज में दिखेंगे खास बदलाव
दिलीप कुमार की एक बात से बदल गया था लता मंगेशकर का जीवन, उर्दू सीखने के लिए रख दी थी यह शर्तमनोरंजन
28 सित॰ 2026, 5:44 am (31 मिनट पहले)· 0

दिलीप कुमार की एक बात से बदल गया था लता मंगेशकर का जीवन, उर्दू सीखने के लिए रख दी थी यह शर्त

दिलीप कुमार द्वारा उर्दू उच्चारण पर की गई एक टिप्पणी के बाद लता मंगेशकर ने इस भाषा को सीखने का फैसला किया था। उन्होंने मौलाना से तालीम लेकर अपनी गायकी को और अधिक निखारा था।

हिंदी सिनेमा जगत की जानी-मानी आवाज लता मंगेशकर की गायकी के दीवाने पूरी दुनिया में मौजूद हैं। उन्होंने अपनी सुरीली आवाज के जरिए हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली और कई अन्य भाषाओं में भी यादगार गीत गाए। उनकी कला की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उनके गानों में न केवल आवाज का जादू झलकता था, बल्कि शब्दों का सटीक उच्चारण और भावनाओं की गहराई भी बखूबी सुनाई देती थी। हालांकि बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि गानों में उर्दू शब्दों के एकदम सही उच्चारण के लिए उन्होंने इस भाषा की विशेष शिक्षा ली थी और इसके पीछे बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग था।

संगीत से जुड़ा शुरुआती सफर और परिवार

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर शहर में हुआ था। संगीत उन्हें विरासत में मिला था क्योंकि उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर खुद एक जाने-माने संगीतकार और गायक थे। बचपन से ही लता का झुकाव संगीत की तरफ हो गया था और उनके पिता ने ही उन्हें संगीत के शुरुआती गुर सिखाए थे। इसके बाद उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसे छूना हर नए कलाकार का सपना होता है।

ये भी पढ़ें

दिलीप कुमार से हुई वह ऐतिहासिक मुलाकात

यह वाकया साल 1947 का है जब मशहूर संगीतकार अनिल विश्वास ने लता मंगेशकर की मुलाकात दिलीप कुमार से करवाई थी। उस दौर में लता अपने सिंगिंग करियर के शुरुआती पायदान पर थीं, जबकि दिलीप कुमार फिल्म इंडस्ट्री में एक स्थापित और मशहूर अभिनेता बन चुके थे। यह मुलाकात दोनों कलाकारों के जीवन और करियर के लिहाज से काफी अहम साबित हुई, जिसने आगे चलकर एक नए बदलाव की नींव रखी।

जब उच्चारण को लेकर हुई थी एक टिप्पणी

आपसी बातचीत के दौरान जब दिलीप कुमार को यह जानकारी मिली कि लता मूल रूप से महाराष्ट्र से हैं, तो उन्होंने उनके उर्दू उच्चारण को लेकर एक बड़ी बात कही। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि जिन गायकों की पृष्ठभूमि उर्दू भाषा वाली नहीं होती, उन्हें गानों के दौरान उर्दू शब्दों को सही ढंग से अदा करने में कठिनाई आ सकती है। अभिनेता की यह बात उस समय लता मंगेशकर को थोड़ी नागवार गुजरी और उन्हें चुभ गई।

कमियों को सुधारने का दृढ़ संकल्प

दिलीप कुमार की उस टिप्पणी से निराश होने के बजाय लता मंगेशकर ने इसे सकारात्मक रूप से लिया और अपनी इस कमजोरी को दूर करने का पक्का इरादा कर लिया। घर वापस लौटने के बाद उन्होंने किसी मौलाना से उर्दू सीखने की ठान ली और बाकायदा इसकी तालीम शुरू कर दी। उन्होंने न केवल उर्दू के अल्फाजों को बोलना सीखा, बल्कि भाषा की बारीकियों और उसके लहजे पर भी पूरी मेहनत के साथ काम किया।

आत्मकथा में किया गया था इस किस्से का जिक्र

लता मंगेशकर के लिए यह केवल एक नई भाषा सीखने भर का मामला नहीं था, बल्कि वे चाहती थीं कि जब भी वे अपनी आवाज में उर्दू के शब्दों को पिरोएं, तो उनका उच्चारण इतना स्पष्ट हो कि सुनने वाले को कोई गलती न मिले। उन्होंने अपनी आत्मकथा द सब्सटेंस एंड द शैडो: एन ऑटोबायोग्राफी में इस पूरे वाकये का विस्तार से जिक्र किया है, जहां उन्होंने दिलीप कुमार के साथ हुई उस पहली मुलाकात और अपने सीखने के सफर को याद किया है।

आलोचना को बना लिया अपनी ताकत

लता मंगेशकर ने खुद स्वीकार किया था कि उस वक्त दिलीप कुमार की बात उन्हें बुरी जरूर लगी थी, लेकिन उसी एक टिप्पणी ने उन्हें अपनी छिपी हुई कमी को पहचानने और उसे ठीक करने की बड़ी प्रेरणा दी। उन्होंने इस पूरी घटना को अपने लिए एक अनजाने तोहफे की तरह माना, जिसने उनकी गायकी को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया। यही मुख्य वजह थी कि उनके गाए गानों में उर्दू के शब्द बेहद साफ और असरदार सुनाई देते थे, क्योंकि उन्होंने आलोचना से हार मानने के बजाय खुद को और बेहतर बना लिया था।

सवाल-जवाब

लता मंगेशकर का जन्म कब और कहां हुआ था?
लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ था।
लता मंगेशकर ने उर्दू सीखने का फैसला क्यों किया था?
दिलीप कुमार द्वारा उनके उर्दू उच्चारण को लेकर की गई टिप्पणी के बाद उन्होंने यह भाषा सीखने का निर्णय लिया।
दिलीप कुमार और लता मंगेशकर की मुलाकात कब हुई थी?
संगीतकार अनिल विश्वास ने साल 1947 में लता मंगेशकर की मुलाकात दिलीप कुमार से कराई थी।
लता मंगेशकर ने अपनी किस आत्मकथा में इस किस्से का जिक्र किया है?
उन्होंने अपनी आत्मकथा 'द सब्सटेंस एंड द शैडो: एन ऑटोबायोग्राफी' में इस किस्से का जिक्र किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Aisha Khan@aisha-khan·3 मिनट पहले

दिलीप साहब की एक सीधी सी बात को लता जी ने इतने पॉज़िटिव तरीके से लिया और उर्दू सीखने बैठ गईं, यही बात असली कलाकारों को महान बनाती है।

Tanvi Desai@tanvi-desai·2 मिनट पहले

@Aisha Khan, बात तो सही है आपकी, पर सच कहूँ तो पहली बार में किसी का ऐसा टोक देना दिल पर लग ही जाता है। लता जी ने बाद में जो किया वो महानता है, पर शुरुआत में बुरा लगना भी तो स्वाभाविक ही था ना?

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp