सिनेमा जगत में इन दिनों एक खास शॉर्ट फिल्म चर्चा का विषय बनी हुई है, जो देश की सीमाओं को लांघकर अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी छाप छोड़ रही है। इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसमें अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की अनूठी आवाज, प्रसिद्ध शायर फैज अहमद फैज की बेमिसाल शायरी और निर्देशक शादाब सिद्दीकी की बारीक सिनेमाई सोच का सुंदर संगम देखने को मिलता है। जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत वादियों से शुरू हुआ इस सिनेमाई सफर का कारवां अब सुदूर लेबनान और यूक्रेन तक पहुंच चुका है, जहां इसे खूब सराहा जा रहा है। इस कृति में मोहब्बत, जुदाई, सन्नाटे और पुरानी यादों के फलसफे को शायरी के खूबसूरत धागों में पिरोकर पर्दे पर उतारा गया है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही सराहना
शादाब सिद्दीकी के निर्देशन में बनी इस शॉर्ट फिल्म को शुरुआत में ही इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर 2026 के लिए आधिकारिक रूप से चुना गया था, जहां इसकी पहली स्क्रीनिंग कश्मीर में संपन्न हुई। इस कलाकृति को उसकी संवेदनशील कथा और फैज साहब की नज्मों को परदे पर जीवंत करने के अनूठे अंदाज के कारण विशेष पहचान मिली। इसके बाद इस कृति ने वैश्विक मंचों की ओर रुख किया और लेबनान इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 2026 में अपनी जगह बनाई। बेरूत शहर में इस समारोह का आयोजन 11 से 13 अक्टूबर के बीच किया गया था, जहां इस भारतीय प्रस्तुति ने सबका ध्यान खींचा। फिल्म से जुड़े तमाम दस्तावेजों और आधिकारिक तस्वीरों को देश के दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी भी चल रही है, ताकि इस उपलब्धि का विस्तार हो सके। इसके साथ ही यूक्रेन के मॉर्फ फिल्म फेस्टिवल में भी इस प्रस्तुति ने अपनी कला यात्रा को आगे बढ़ाया है। निर्देशक शादाब सिद्दीकी साल 2006 से भारतीय मनोरंजन उद्योग में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
अभिनय और शायरी का अनूठा संगम
इस पूरी रचना की सबसे बड़ी ताकत अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी का कविता-पाठ है, जो अपनी खास आवाज के जरिए इसके भावनात्मक दायरे को एक नई ऊंचाई पर ले जाते हैं। यहां कविता महज संवाद या पृष्ठभूमि का संगीत नहीं है, बल्कि कहानी को भीतर तक महसूस कराने का प्राथमिक माध्यम बनती है। परदे पर प्रेम और अलगाव की टीस को जीवंत करने की जिम्मेदारी प्रीति सूद और नसीम मुगल ने निभाई है, जो अपनी दमदार अदाकारी से दृश्यों में जान फूंक देते हैं। फैज अहमद फैज की प्रसिद्ध शायरी इस पूरी कहानी की असली रूह है, जो अभिनय, निर्देशन और संगीत को एक सूत्र में बांधती है। मेकर्स का मानना है कि यह वैश्विक यात्रा भारतीय साहित्य और संस्कृति को अलग-अलग संस्कृतियों के दर्शकों तक पहुंचाने का एक बेहतरीन माध्यम बन रही है।


















