दिवाली के मौके पर सिनेमा जगत में बड़े प्रोजेक्ट्स की चर्चाओं के बीच एक और खास पारिवारिक ड्रामा फिल्म सुर्खियों में आ गई है। जहां एक तरफ रणबीर कपूर की फिल्म रामायण को लेकर काफी बज बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ नेटफ्लिक्स पर एक नई और अनूठी कहानी दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है। अभिनेता मिहिर आहूजा स्टारर इस फिल्म का नाम ‘दिलवाली दिवाली’ है, जिसकी रिलीज डेट का ऐलान निर्माताओं ने सोमवार को किया। फिल्म के मेकर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर इसका एक आकर्षक पोस्टर साझा करते हुए जानकारी दी कि दर्शक अपनी फैमिली के साथ इस दिवाली का जश्न मनाने के लिए तैयार हो जाएं, क्योंकि यह फिल्म 5 नवंबर को केवल नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम की जाएगी।
यह पूरी फिल्म एक पारिवारिक ड्रामे पर आधारित है, जो परिवारों के भीतर पीढ़ियों के फासले, माता-पिता और बच्चों की एक-दूसरे से जुड़ी उम्मीदों और असल मायनों में ‘घर’ शब्द के अर्थ को बहुत ही खूबसूरती से दर्शाती है। इस कहानी को हास्य यानी कॉमेडी और दिल को छू लेने वाले भावुक पलों के साथ पिरोया गया है, ताकि दर्शक इसे अपने घर-परिवार से जुड़ा हुआ महसूस कर सकें।
फिल्म के निर्देशन की कमान रितेश मेनन ने संभाली है, जबकि इसकी पटकथा रितु मागो ने लिखी है। इसके निर्माण में ‘टेरिबली टिनी टेल्स’ यानी टीटीटी ने अपनी अहम भूमिका निभाई है। इस पारिवारिक फिल्म में मिहिर आहूजा के अलावा मनोज पाहवा, नीलू कोहली और और्रा भटनागर जैसे जाने-माने कलाकार मुख्य किरदारों में नजर आएंगे।
फिल्म में युवा अभिनेता मिहिर आहूजा अंश सिक्का का मुख्य किरदार निभा रहे हैं। अपने इस खास किरदार और फिल्म की कहानी को लेकर उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि अंश का यह सफर प्यार की नींव से शुरू होता है और यही बात इस कहानी को आम लोगों के जीवन से बहुत ज्यादा मेल खाती हुई बनाती है। उन्होंने आगे कहा कि हम सब अपने परिवार के लिए हमेशा सबसे बेहतरीन करना चाहते हैं, लेकिन कभी-कभी उनकी खुशियों के लिए दौड़ते-भागते हम यह भूल जाते हैं कि उन्हें असल में किस चीज से खुशी मिलती है। टीटीटी ने इन तमाम छोटी-छोटी बारीकियों को हंसी और दिल के रिश्तों के साथ बेहद शानदार ढंग से पर्दे पर उतारा है।
वहीं, फिल्म में अंश के पिता की भूमिका निभा रहे अनुभवी अभिनेता मनोज पाहवा ने पारिवारिक रिश्तों पर बात करते हुए कहा कि किसी भी माता-पिता के लिए घर कभी भी ईंट-पत्थर की दीवारों, महंगे फर्नीचर या किसी पते का मोहताज नहीं होता है, बल्कि घर तो उन अनमोल यादों से बनता है जो परिवार के लोग मिलकर बनाते हैं। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी का अच्छी जिंदगी को देखने और जीने का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन दोनों पीढ़ियों के उन अलग नजरियों के पीछे प्रेम और अपनापन एक ही होता है।




















