कन्नड़ फिल्म उद्योग से जुड़े हाई-प्रोफाइल रेणुकास्वामी हत्याकांड में कानूनी शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले के रहने वाले रेणुकास्वामी का जून 2024 में अपहरण कर लिया गया था और उनकी दर्दनाक हत्या कर दी गई थी। पुलिस की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित की लाश बेंगलुरु शहर के कामाक्षीपाल्या इलाके में स्थित एक गंदे नाले से बरामद की गई थी। इस सनसनीखेज वारदात की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ी, कन्नड़ सिनेमा के चर्चित अभिनेता दर्शन और उनकी सहयोगी अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा का नाम मुख्य आरोपियों के रूप में सामने आया। वर्तमान समय में दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल की सलाखों के पीछे बंद हैं।
अपहरण और बर्बरता का आरोप
जांच अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत विवरण के अनुसार, रेणुकास्वामी पर अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा को सोशल मीडिया पर कथित तौर पर आपत्तिजनक और अश्लील संदेश भेजने का आरोप लगाया गया था। इस बात से नाराज होकर पीड़ित के खिलाफ एक संगठित साजिश रची गई। पुलिस का दावा है कि अभिनेता दर्शन ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर रेणुकास्वामी के अपहरण और उन्हें गंभीर शारीरिक यातनाएं देने की योजना बनाई। पीड़ित को चित्रदुर्ग से उठाकर एक निजी स्थान पर ले जाया गया, जहां उनके साथ लंबे समय तक मारपीट की गई। इसके पश्चात उनकी हत्या करके शव को नहर में बहा दिया गया। मामले में पकड़े गए कई अन्य आरोपियों के कबूलनामे के आधार पर दर्शन और पवित्रा को गिरफ्तार किया गया था।
अदालत में वकीलों की दलील और पीड़ित परिवार की गुहार
न्यायालय की सुनवाई के दौरान कानूनी दांव-पेच और तीखी बहस देखने को मिली है। अभिनेता दर्शन का बचाव कर रहे कानूनी वकील ने अदालत में तर्क दिया था कि मृतक रेणुकास्वामी महिलाओं का सम्मान नहीं करते थे और वे समाज के नैतिक ताने-बाने के लिए खतरा बन चुके थे। हालांकि, रेणुकास्वामी की पत्नी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने अपने पति का बचाव करते हुए कहा कि 8 जून की दोपहर को उनके पति ने उनसे फोन पर बात की थी। उनका कहना था कि यदि उनके पति ने कोई गलत संदेश भेजा भी था, तो कानूनी चेतावनी दी जानी चाहिए थी, न कि उनकी जान ले ली जाती। उन्होंने मांग की कि चाहे आरोपी कोई बड़ा अभिनेता हो या स्टार, उन्हें हर हाल में न्याय मिलना चाहिए।
3991 पन्नों की चार्जशीट और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मामले की विस्तृत छानबीन के बाद बेंगलुरु पुलिस ने अदालत में 3991 पन्नों की एक विशाल चार्जशीट दाखिल की। इस विस्तृत आरोप पत्र में पवित्रा गौड़ा और अभिनेता दर्शन के साथ-साथ 15 अन्य व्यक्तियों को भी आपराधिक साजिश और हत्या में सह-आरोपी बनाया गया है। पवित्रा गौड़ा को अगस्त 2025 में पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वे लगातार जेल में हैं। वहीं दूसरी तरफ, अभिनेता दर्शन को दिसंबर 2024 में कर्नाटक हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल गई थी। परंतु यह राहत अधिक समय तक नहीं टिक सकी, क्योंकि साल 2025 में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए दर्शन की जमानत रद्द कर दी और उन्हें पुनः हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
जेल में हेडफोन विवाद पर हाईकोर्ट की सख्ती
मामले में नया मोड़ तब आया जब कर्नाटक हाईकोर्ट ने जेल के भीतर नियमों के उल्लंघन को लेकर सख्त रवैया अपनाया। 13 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान पवित्रा गौड़ा अदालत के समक्ष विलंब से पेश हुईं। अदालत ने उनके कान में हेडफोन लगा देखे जाने का संज्ञान लेते हुए कड़ी नाराजगी जताई और उन्हें फटकार लगाई। यद्यपि पवित्रा ने हेडफोन का उपयोग करने के दावे से इनकार किया, किंतु न्यायाधीश ने उनके स्पष्टीकरण को अस्वीकार कर दिया। उच्च न्यायालय ने इस अनुशासनहीनता पर संज्ञान लेते हुए जेल अधिकारियों से लिखित जवाब और सफाई तलब की है।



















