मानसून के आगमन और इसके बाद के महीनों में जगह जगह जलभराव व गंदगी के चलते डेंगू का प्रकोप तेजी से बढ़ने लगता है। डेंगू एक संक्रामक और गंभीर बीमारी है, जो एडीज मच्छर के काटने से फैलती है। इसे आम भाषा में 'हड्डी तोड़ बुखार' भी कहा जाता है, क्योंकि संक्रमण होने पर मरीज को भीषण बुखार के साथ मांसपेशियों और जोड़ों में असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है। जब घर के किसी एक सदस्य को यह बुखार होता है, तो पूरा परिवार चिंतित हो जाता है। ऐसे माहौल में केवल मरीज का इलाज कराना ही काफी नहीं होता, बल्कि परिवार के अन्य लोगों को इस बीमारी की चपेट में आने से बचाना भी उतना ही जरूरी होता है। इस विषय पर डॉ. हतिंदर जीत सिंह सेठी, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस हॉस्पिटल, मानेसर ने घर के अन्य सदस्यों को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण दिशा निर्देश साझा किए हैं।
घर में संक्रमण चक्र को तोड़ना और मरीज की सुरक्षा
डेंगू के प्रसार को लेकर एक बात स्पष्ट समझनी चाहिए कि यह बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान में सीधे संपर्क के जरिए नहीं फैलती है। हालांकि, बीमारी के शुरुआती दिनों में मरीज के रक्त में डेंगू का वायरस भारी मात्रा में मौजूद रहता है। यदि इस दौरान कोई एडीज मच्छर मरीज को काट लेता है, तो वह मच्छर संक्रमित हो जाता है। इसके बाद वही मच्छर जब घर के किसी स्वस्थ सदस्य को काटता है, तो वायरस उनके शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसी वजह से मरीज और परिवार दोनों का बचाव करना अनिवार्य है।
डॉ. हतिंदर जीत सिंह सेठी के अनुसार, सबसे पहला कदम मरीज को मच्छरों की पहुंच से दूर रखना है। दिन के समय भी मरीज को मच्छरदानी के अंदर ही आराम करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही कमरे में मच्छर भगाने वाले सुरक्षित रिपेलेंट या अन्य साधनों का इस्तेमाल करना चाहिए। घर के खिड़की और दरवाजों पर महीन जाली लगाना संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम करता है। परिवार के सदस्यों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय, खासकर सुबह और शाम के वक्त काटता है। इसलिए दिन में भी सतर्क रहें, शरीर को ढकने वाले पूरी बांह के कपड़े पहनें और त्वचा पर असरदार मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम लगाएं।
डेंगू के प्रमुख लक्षण और प्लेटलेट्स पर प्रभाव
डेंगू का आक्रमण होते ही शरीर में कई तरह की परेशानियां एक साथ उभरती हैं। मरीज को अचानक तेज बुखार आता है, जिसके साथ सिर में भयंकर दर्द और आंखों के पिछले हिस्से में खिंचाव व दर्द महसूस होता है। इसके अलावा उल्टी होना, त्वचा पर लाल चकत्ते (रैशेज) निकल आना और अत्यधिक शारीरिक थकान होना इसके प्राथमिक संकेत हैं। डेंगू वायरस के कारण रक्त में मौजूद प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से गिरने लगती है। प्लेटलेट्स कम होने से मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर हो जाती है और शरीर में अंदरूनी ब्लीडिंग का खतरा उत्पन्न हो जाता है।
मच्छर पनपने के ठिकाने और डब्ल्यूएचओ की चेतावनी
घर और आसपास पानी का जमाव मच्छरों के पनपने की सबसे बड़ी वजह बनता है। घर में रखे कूलर, गमलों के नीचे की ट्रे, बाल्टियां, पुराने टायर, खुली बोतलें और पानी के बड़े कंटेनर एडीज मच्छरों के पसंदीदा प्रजनन स्थल होते हैं। यदि इन बर्तनों में साफ पानी भी जमा रहे, तो मच्छर उसमें अपने अंडे दे देते हैं। पानी के सभी बर्तनों को हमेशा ढंककर रखना चाहिए और उन्हें नियमित अंतराल पर साफ करना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशानिर्देशों के अनुसार, घरेलू उपयोग वाले पानी के सभी बर्तनों और कंटेनरों को कम से कम सप्ताह में एक बार पूरी तरह खाली करके साफ और सुखा लेना चाहिए। इस अभ्यास से मच्छरों के लारवा नष्ट हो जाते हैं और उनकी आबादी पर लगाम लगती है।
सही देखभाल, दवाओं का परहेज और गंभीर लक्षण
डेंगू से पीड़ित मरीज की देखभाल के दौरान खानपान और आराम का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। मरीज को पर्याप्त मात्रा में आराम करने दें और शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए ओआरएस, नारियल पानी, सूप और सादा पानी जैसे तरल पदार्थ प्रचुर मात्रा में देते रहें। किसी भी दवा का सेवन केवल पंजीकृत चिकित्सक की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।
डेंगू के इलाज के दौरान एक बेहद गंभीर सावधानी यह बरतनी होती है कि मरीज को एस्पिरिन (Aspirin) या आइबूप्रोफेन (Ibuprofen) जैसी दर्द निवारक दवाएं भूलकर भी न दी जाएं। चूंकि डेंगू में प्लेटलेट्स पहले से कम होते हैं, ये दवाएं खून को और पतला कर देती हैं जिससे शरीर में अंदरूनी ब्लीडिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बुखार नियंत्रित करने के लिए केवल डॉक्टर द्वारा सुझाई गई सुरक्षित दवा का ही उपयोग करें।
यदि मरीज में कुछ खतरे के संकेत दिखाई दें, तो बिना समय गंवाए उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए। इन गंभीर लक्षणों में शामिल हैं: पेट में लगातार और तेज दर्द होना, बार-बार उल्टी आना, मसूड़ों या नाक से खून बहना, बहुत अधिक शारीरिक कमजोरी व सुस्ती महसूस होना, सांस बहुत तेज चलना, या फिर उल्टी और मल में खून के अंश दिखाई देना। ऐसे संकेत मिलने पर तुरंत डॉक्टरी सहायता लेना मरीज की जान बचाने के लिए जरूरी होता है।


















