उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में आवारा और खूंखार कुत्तों के बढ़ते खतरे ने आम जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है। चमोली जिले के नारायणबगड़ बाजार और आसपास की बस्तियों में कुत्तों द्वारा लगातार लोगों को शिकार बनाए जाने के बाद प्रशासनिक अमले को सख्त कदम उठाना पड़ा है। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए क्षेत्र के 10 सरकारी और निजी विद्यालयों को 20 से 23 अगस्त तक चार दिनों के लिए भौतिक रूप से बंद करने का फरमान जारी किया गया है। इस शैक्षणिक अवकाश के दौरान छात्रों के अध्ययन में कोई व्यवधान न आए, इसके लिए स्कूलों को ऑनलाइन माध्यम से कक्षाएं संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं।
लगातार दो दिनों में आठ लोगों पर हमला
नारायणबगड़ इलाके में आवारा कुत्तों की आक्रामकता पिछले दो दिनों में अचानक काफी बढ़ गई है। मंगलवार के दिन कुत्तों के झुंड ने राह चलते लोगों पर धावा बोल दिया, जिसमें स्कूल जा रहे बच्चों सहित चार नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना से उपजा भय अभी कम भी नहीं हुआ था कि बुधवार को फिर से कुत्तों ने चार अन्य लोगों को अपना शिकार बना लिया। लगातार दो दिनों के भीतर आठ लोगों के जख्मी होने से पूरे नारायणबगड़ बाजार और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल बन गया है। माता पिता अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने में कतरा रहे हैं।
प्रशासनिक आदेश और ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था
क्षेत्र में लगातार बिगड़ते हालात की सूचना मिलते ही चमोली के जिलाधिकारी ने त्वरित संज्ञान लिया। जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में मुख्य शिक्षा अधिकारी ने नारायणबगड़ बाजार तथा उससे सटे क्षेत्रों के 10 विद्यालयों को चार दिनों के लिए बंद करने के आदेश जारी कर दिए। नारायणबगड़ के खंड शिक्षा अधिकारी अनिल नाथ ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि नन्हे बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए यह एहतियाती निर्णय लिया गया है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि चार दिनों की इस बंदी के दौरान सभी 10 स्कूलों के विद्यार्थी अपने घरों से ही ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जारी रखेंगे।
रेस्क्यू ऑपरेशन और रेबीज टीकाकरण अभियान
आवारा और हिंसक कुत्तों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन ने बहुआयामी कार्रवाई शुरू कर दी है। कुत्तों को पकड़ने के लिए वन विभाग की विशेष क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को मैदान में उतारा गया है। इस टीम ने प्रभावित इलाकों में गश्त बढ़ा दी है और आवारा कुत्तों को ट्रैनक्विलाइज करने या जाल डालकर पकड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही पशुपालन विभाग की टीमों को भी सक्रिय किया गया है, जो इलाके के कुत्तों को रेबीज रोधी टीके लगाने के काम में जुटी हुई हैं।
स्थानीय निवासियों की स्थाई समाधान की मांग
नारायणबगड़ के स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही वे इस समस्या के स्थाई समाधान की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों और व्यापारियों का कहना है कि अचानक कुत्तों के इस कदर आक्रामक होने के कारणों की गहन जांच की जानी चाहिए। स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल चार दिनों के लिए स्कूल बंद करना या कुछ कुत्तों को टीका लगाना नाकाफी है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की है कि जब तक पूरे क्षेत्र को आवारा और हिंसक कुत्तों से पूरी तरह सुरक्षित न बना लिया जाए, तब तक ठोस और निरंतर निरोधात्मक कदम उठाए जाएं।




















