हास्य कलाकार और यूट्यूबर समय रैना के साथ चार अन्य कॉमेडियनों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने दिव्यांग लोगों के प्रति कथित तौर पर असंवेदनशील टिप्पणियां करने के मामले में दर्ज सभी एफआईआर और आपराधिक कार्यवाहियों को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पुरानी गलतियों को सुधारने के लिए ईमानदारी से प्रयास करता है, तो उसके परिणाम भी सकारात्मक और समाज के लिए लाभकारी निकलकर सामने आते हैं।
अदालत की टिप्पणियां और सुधारात्मक प्रयासों पर विचार
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आरोपी कॉमेडियनों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण और सुधारात्मक रुख अपनाया। सीजेआई सूर्यकांत ने समय रैना और उनके साथियों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे बहुत होनहार युवा हैं और यदि उन्होंने सकारात्मक दिशा में कदम बढ़ाए हैं तो इसका नतीजा भी अच्छा होगा। पीठ ने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी स्वीकार करता है और समाज कल्याण में योगदान देने का संकल्प लेता है, तो अदालत को भी ऐसे सुधारात्मक रवैये को प्रोत्साहन देना चाहिए। आपराधिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय सुधारात्मक उपायों को प्राथमिकता देना न्याय के हित में है।
दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए आयोजित कार्यक्रम और जागरूकता पहल
अदालत ने अपने फैसले में कॉमेडियनों द्वारा दिव्यांगजनों की भलाई के लिए उठाए गए ठोस कदमों को प्रमुख आधार माना। समय रैना और उनके साथियों ने 14 से 16 मार्च 2026 के बीच दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए एक विशेष शतरंज प्रतियोगिता का सफलता पूर्वक आयोजन किया था। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग लोगों की सहायता करने वाले संगठनों और उनके अधिकारों के प्रति आम जनता में जागरूकता बढ़ाना था।
- शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन: 14 से 16 मार्च 2026 तक दिव्यांगजनों के लिए विशेष टूर्नामेंट आयोजित कर समाज में सकारात्मक संदेश दिया गया।
- एसएमए बीमारी पर जागरूकता: स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) से पीड़ित लोगों की मदद के लिए फंड जुटाने और उनके संघर्ष को सामने लाने की योजना बनाई गई।
- क्योर फाउंडेशन से सहयोग: आरोपियों ने क्योर फाउंडेशन के साथ मिलकर एसएमए वॉरियर्स की उपलब्धियों को उजागर करने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की।
सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियनों को सलाह दी है कि वे भविष्य में ऐसे आयोजन करते समय गैर-सरकारी संगठनों (NGO) से उचित मार्गदर्शन लें और किसी भी कार्यक्रम में दिव्यांगजनों की भागीदारी सुनिश्चित करने से पहले उनकी स्पष्ट सहमति जरूर प्राप्त करें।
जुर्माने से लेकर सुधारात्मक कार्यवाहियों का सफर
यह कानूनी राहत अचानक प्राप्त नहीं हुई है, बल्कि इसके पीछे एक लंबी न्यायिक प्रक्रिया रही है। इससे पहले जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य संबंधित कॉमेडियनों पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। उस समय अदालत ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई थी कि पूर्व में दिए गए आदेशों के बावजूद दिव्यांगजनों को अपने शो में शामिल करने और उनके कल्याण के लिए पर्याप्त काम नहीं किया गया था। तब पीठ ने उन्हें जागरूकता अभियान चलाने और फंड जुटाने का कड़ा निर्देश दिया था। अब अदालत ने पाया कि आरोपियों ने उन निर्देशों को गंभीरता से लिया और जमीनी स्तर पर वास्तविक सुधार कार्य किए।
फंड संग्रहण और कानूनी कार्यवाही का अंत
कोर्ट की सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि कॉमेडियन अपने विभिन्न शो और कार्यक्रमों के माध्यम से दिव्यांग कल्याण के लिए अब तक लगभग 12.5 करोड़ रुपये जुटा चुके हैं। इसके अतिरिक्त आने वाले समय में चार और फंड रेजिंग कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है। पीठ ने कहा कि आरोपियों और याचिकाकर्ता संगठन के बीच हुई बातचीत तथा दिव्यांगजनों की गरिमा बनाए रखने के प्रयासों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इन सुधारात्मक कदमों को पर्याप्त मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तंवर के खिलाफ लंबित सभी आपराधिक कार्यवाहियों और एफआईआर को पूरी तरह से रद्द कर दिया। अदालत ने उम्मीद जताई है कि ये युवा आगे भी समाज में दिव्यांगजनों के सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य जारी रखेंगे।



















