नई दिल्ली। पॉपुलर कॉमेडियन समय रैना एक बार फिर अपने चर्चित रियलिटी शो इंडिया गॉट लेटेंट के दूसरे सीजन को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवादों के घेरे में आ गए हैं। इस शो के पहले सीजन में भी काफी हंगामा देखने को मिला था, जिसके बाद दर्शकों को उम्मीद थी कि इस बार मेकर्स और होस्ट अधिक सतर्कता बरतेंगे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, समय रैना ने इस नए सीजन में अपने चिर-परिचित अनफिल्टर्ड और बेबाक अंदाज में कुछ नियंत्रण रखने की कोशिश की थी। हालांकि, तमाम सावधानियों के बावजूद वह इस बार भी विवादों की आग से खुद को बचाने में नाकामयाब रहे हैं।
लेटेस्ट एपिसोड में की गई टिप्पणियों पर विवाद
विवाद की मुख्य वजह शो के हालिया एपिसोड में कश्मीरी पंडितों और बिहार के निवासियों के संदर्भ में की गई कुछ विशेष टिप्पणियां हैं। जैसे ही यह एपिसोड प्रसारित हुआ, वैसे ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। शो के दौरान कॉमेडियन शेरोन वर्मा के साथ हुई बातचीत और उसके बाद किए गए मजाक को लेकर विभिन्न दलों के राजनेताओं ने कड़ा रुख अपनाया है। कई राजनीतिक चेहरों और संगठनों ने संवेदनशील समुदायों से जुड़े मुद्दों पर इस तरह के हल्के मजाक को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है और इस मामले में गंभीर आपत्ति जताई है।
शिवसेना और आम आदमी पार्टी की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
इस पूरे मामले पर सियासत भी गरमा गई है और विभिन्न दलों के नेताओं ने खुलकर अपनी बात रखी है। शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने इस प्रकरण को लेकर समय रैना की कड़ी आलोचना की है और इस तरह के बयानों को समाज के ताने-बाने के खिलाफ बताया है। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने एक अलग रुख अपनाते हुए लोगों और राजनीतिक दलों से अपील की है कि इस बातचीत को बेवजह तूल न दिया जाए और इसे बड़ा मुद्दा बनाने से बचा जाना चाहिए। इस तरह से इस विवाद पर राजनीतिक वर्ग बंटा हुआ नजर आ रहा है।
कश्मीरी पंडितों और जानकारों का पक्ष
विवाद के बीच जम्मू के एक स्थानीय कश्मीरी पंडित ने समय रैना के पक्ष में भी अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि समय रैना एक पेशेवर कलाकार हैं और कलाकारों की अभिव्यक्ति का तरीका आम जनता से अलग हो सकता है, जिसे अक्सर लोग अलग-अलग संदर्भों में समझ लेते हैं। उन्होंने रैना को एक प्रतिभाशाली कलाकार करार देते हुए यह सलाह भी दी कि उन्हें ऐसे विवादों से बचना चाहिए जो किसी भी तरह के राजनीतिक स्टंट का रूप ले लें। इसके साथ ही, भाजपा के नेताओं ने भी इस मामले को संवेदनशीलता से लेते हुए सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है, जिससे यह मुद्दा और अधिक गरमा गया है।



















