हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने एक लोकप्रिय टेलीविजन क्विज शो के दौरान अपने परिवार के उपनाम से जुड़ा एक दिलचस्प और ऐतिहासिक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि किस वजह से उनके पिता और प्रसिद्ध कवि ने अपनी जाति पहचान को पीछे छोड़ते हुए परिवार का सरनेम बदल दिया था।
कौशल और बचपन की यादों का मंच
हाल ही में शो के दौरान जब एक प्रतिभागी ने अपनी स्कूली शिक्षा और प्रयागराज से जुड़े होने का जिक्र किया, तो महानायक अपनी पुरानी यादों में खो गए। उन्होंने खुलासा किया कि सेंट मैरी कॉन्वेंट वही शिक्षण संस्थान था जहाँ उन्होंने भी अपनी शुरुआती पढ़ाई की थी। इसी बातचीत के सिलसिले में उन्होंने उस पुरानी घटना का भी जिक्र किया जब उनके दाखिले के समय कागजी कार्रवाई में जाति का कॉलम सामने आया था।
हरिवंश राय बच्चन का क्रांतिकारी फैसला
अमिताभ ने विस्तार से बताया कि जब उनके माता-पिता उन्हें स्कूल में नामांकित कराने पहुंचे, तो फॉर्म में जाति लिखने का प्रावधान था। उनके पिता और महान साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन समाज में फैली जाति व्यवस्था के घोर विरोधी थे। उन्हें इंसान की पहचान उसकी जाति से तय किया जाना कतई मंजूर नहीं था। इस वैचारिक असहमति के चलते उन्होंने फॉर्म के उस कॉलम में अपनी किसी पारंपरिक जाति का उल्लेख करने के बजाय ‘बच्चन’ शब्द लिख दिया। यही तात्कालिक निर्णय बाद में पूरे परिवार का आधिकारिक उपनाम बन गया और अमिताभ बच्चन की वैश्विक पहचान का मुख्य हिस्सा बन गया।
साहित्यिक विरासत और शुरुआती जीवन
वास्तव में जब उनका जन्म 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद में हुआ था, तब उनका नाम अमिताभ श्रीवास्तव रखा गया था। उनके पिता हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के शिखर पुरुषों में गिने जाते हैं। उनकी अमर कृति ‘मधुशाला’ ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बनाया। इसके अतिरिक्त ‘मधुकलश’, ‘निशा निमंत्रण’ और ‘सतरंगिनी’ जैसी कृतियों ने साहित्य जगत में उनके कद को और ऊंचा किया। उनकी ओजस्वी कविता ‘ग्निपथ’ आज भी लोगों के जेहन में जीवंत है। साहित्य जगत में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1976 में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से अलंकृत किया गया था।
संघर्ष से महानायक बनने की कहानी
अमिताभ बच्चन का अभिनय की दुनिया तक का सफर आसान नहीं रहा। सिनेमाई करियर की शुरुआत में उन्हें लगातार कई असफलताओं का सामना करना पड़ा और काफी संघर्ष करना पड़ा। हालांकि बाद के दौर में ‘जंजीर’, ‘दीवार’, ‘त्रिशूल’ और ‘काला पत्थर’ जैसी फिल्मों ने उनके फिल्मी करियर की दिशा पूरी तरह बदल दी। इन बेहतरीन फिल्मों ने उन्हें भारतीय सिनेमा का निर्विवादित मेगास्टार बना दिया, जो आज भी दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं।



















