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ओडिशा के केंद्रपाड़ा में बाढ़ का तांडव, रेजिडेंशियल स्कूल में फंसे 300 से ज्यादा बच्चेभारत
17 अग॰ 2026, 9:12 pm (1 घंटे पहले)· 1

ओडिशा के केंद्रपाड़ा में बाढ़ का तांडव, रेजिडेंशियल स्कूल में फंसे 300 से ज्यादा बच्चे

ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में ब्राह्मणी नदी का जलस्तर बढ़ने से एक आवासीय स्कूल पानी में घिर गया है, जिसमें 300 से अधिक बच्चे फंस गए हैं।

ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में बाढ़ के पानी ने ऐसा विकराल रूप धारण किया है कि एक पूरा रेजिडेंशियल स्कूल जलमग्न हो गया है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि पट्टामुंडई ब्लॉक के कुलासाही सेवाश्रम स्कूल में 300 से ज्यादा छोटे बच्चे और छात्र पानी के बीच पूरी तरह फंस गए हैं। बाढ़ के इस पानी ने केवल स्कूल के परिसरों और कमरों को ही अपनी चपेट में नहीं लिया है, बल्कि हॉस्टल, क्लासरूम, किचन, टॉयलेट और वहां तक पहुंचने वाली मुख्य सड़क को भी पूरी तरह डुबो दिया है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए बच्चों को तत्काल वहां से सुरक्षित बाहर निकालना बेहद चुनौती भरा साबित हो रहा है। रेंगाली बांध के गेट खोले जाने और लगातार हो रही बारिश के कारण ब्राह्मणी नदी का जलस्तर बहुत तेजी से ऊपर उठा है, जिससे नदी खतरे के निशान को पार कर बह रही है और पानी सीधे स्कूल के अंदर आ गया है, जिससे इस शिक्षण संस्थान का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग कट चुका है।

क्लासरूम और हॉस्टल बने जलमग्न

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, रविवार की सुबह तक स्कूल कैंपस के भीतर पानी केवल टखने की ऊंचाई तक ही सीमित था, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर जलस्तर ने इतनी तेजी से छलांग लगाई कि पानी 8 से 10 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया। स्थानीय युवक रश्मिरंजन मोहंती ने जानकारी दी कि ब्राह्मणी नदी का बाढ़ का पानी बेहद तेज बहाव के साथ सीधे स्कूल की तरफ उमड़ पड़ा। सेवाश्रम के हॉस्टल में इस समय 300 से अधिक छोटे बच्चे फंसे हुए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय ग्रामीण और स्कूल का प्रशासन लगातार अधिकारियों से आग्रह कर रहे हैं कि बिना किसी देरी के व्यापक स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जाए ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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सड़कें डूबीं और बुनियादी सुविधाएं ठप

बाढ़ के पानी के स्कूल के कमरों में घुसने के साथ ही वहां की जरूरी सुविधाएं भी पूरी तरह चरमरा गई हैं। स्कूल की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर भारी पानी भरा होने के कारण किसी भी प्रकार के सामान्य वाहनों की आवाजाही पूरी तरह असंभव हो गई है। स्कूल परिसर में बने ट्यूबवेल, रसोईघर और शौचालय भी पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं। स्थानीय निवासी प्रताप पाढ़ी ने बताया कि किचन में रखा हुआ राशन और भोजन खराब होने के कगार पर है, जबकि बच्चों के लिए साफ पीने के पानी का संकट सबसे बड़ी समस्या बन गया है। बिजली की सप्लाई पूरी तरह ठप होने के कारण बच्चों को अंधेरे में वक्त गुजारना पड़ रहा है। इसके अलावा, बाढ़ के पानी के साथ जहरीले सांप और अन्य खतरनाक जलीय जीव स्कूल परिसर में आने लगे हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।

प्रशासन की योजना और मौके पर राहत टीमें

बच्चों को सुरक्षित निकालने की मांग के बीच पट्टामुंडई के BDO शीतल अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि लगभग 300 बच्चों को एक साथ हॉस्टल से निकालकर दूसरी सुरक्षित जगह ले जाना इस समय भारी जोखिम भरा और कठिन कार्य है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल बच्चों को हॉस्टल के भीतर ही पूरी तरह सुरक्षित रखने के पुख्ता इंतजाम करने की है। बच्चों के पास पानी की बोतलें पहुंचाई जा रही हैं और उनके लिए भोजन की समुचित व्यवस्था भी की जा रही है। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, स्थिति से निपटने के लिए स्कूल के समीप ODRAF की एक टीम को भी तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

अभिभावकों की बढ़ी धड़कनें और मदद की गुहार

पानी के तेज बहाव और लगातार विकराल होते हालात को देखकर बच्चों के माता-पिता का बुरा हाल है और वे बेहद डरे हुए हैं। आम नागरिकों के लिए भी अब स्कूल के आसपास के इलाके तक पहुंचना किसी बड़े खतरे से खाली नहीं है। एक छात्र के पिता मृत्युंजय साहू ने कहा कि नदी के पानी की भारी रफ्तार के कारण कोई भी व्यक्ति स्कूल के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है, जिससे अभिभावकों के दिलों में अपने जिगर के टुकड़ों की सलामती को लेकर डर बैठ गया है। स्कूल के हेडमास्टर और विद्यालय प्रबंधन समिति ने भी प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि तुरंत पावरबोट के साथ ODRAF या NDRF की विशेष टीमों को मैदान में उतारा जाए ताकि सभी बच्चों को जल्द से जल्द सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया जा सके।

बचाव कार्य में देरी से बढ़ सकता है संकट

इलाके के लोगों को इस बात का गहरा डर सता रहा है कि यदि पट्टामुंडई ब्लॉक प्रशासन और जिला आपातकालीन विभाग ने राहत एवं बचाव के कार्यों में तेजी नहीं दिखाई, तो आने वाले समय में स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है। इस समय सबसे बड़ी और मुख्य चुनौती 300 से अधिक बच्चों की हिफाजत करना, उन्हें पीने का शुद्ध पानी और भोजन मुहैया कराना तथा बाढ़ के पानी के बीचों-बीच राहत सामग्री को स्कूल तक पहुंचाना है। स्कूल के चारों तरफ पानी के भयंकर बहाव को देखते हुए बचाव अभियान चलाना आसान नहीं होगा। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासनिक स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों और चलाए जाने वाले राहत अभियानों पर टिकी हुई हैं।

सवाल-जवाब

ओडिशा के किस जिले में रेजिडेंशियल स्कूल बाढ़ से घिरा है?
ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले के पट्टामुंडई ब्लॉक में रेजिडेंशियल स्कूल बाढ़ से घिरा है।
स्कूल में कितने बच्चे फंसे हुए हैं?
कुलासाही सेवाश्रम स्कूल में 300 से ज्यादा छोटे बच्चे फंसे हुए हैं।
किस नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ आई है?
ब्राह्मणी नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बढ़ने के कारण बाढ़ आई है।
बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए क्या प्रशासनिक कदम उठाए जा रहे हैं?
प्रशासन द्वारा बच्चों को हॉस्टल में ही सुरक्षित रखने के इंतजाम किए जा रहे हैं, उन्हें पानी की बोतलें और भोजन पहुंचाया जा रहा है तथा मौके पर ODRAF की टीम तैनात है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·57 मिनट पहले

इस आपदा ने संस्थागत सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 8 से 10 फीट तक जलस्तर बढ़ना और बिजली-पेयजल ठप होने के साथ जहरीले जीवों का खतरा यह बताता है कि आपातकालीन निकासी की कोई पुख्ता अग्रिम योजना नहीं थी। यदि तुरंत भारी रेस्क्यूबोट्स और एनडीआरएफ की तैनाती नहीं की गई, तो स्थिति बच्चों के लिए और अधिक घातक हो सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·56 मिनट पहले

यह आपदा केवल एक स्थानीय जलभराव नहीं, बल्कि ढांचागत और प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है। जब मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में आवासीय परिसरों के लिए आपदा न्यूनीकरण योजनाएं सक्रिय नहीं की जातीं, तो बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी जाती है। इस संकट से सीख लेते हुए संवेदनशील क्षेत्रों के सभी शैक्षणिक संस्थानों में त्वरित निकासी प्रोटोकॉल और बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र को अनिवार्य किया जाना चाहिए, अन्यथा मानवीय और आर्थिक क्षति का जोखिम लगातार बना रहेगा।

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