विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में एक विशेष सत्र के दौरान 2002 और 2003 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारियों से संवाद किया। यह बैठक अधिकारियों के लिए आयोजित मध्य-कैरियर प्रशिक्षण कार्यक्रम का हिस्सा थी, जहां राजनयिकों ने अपने पेशेवर अनुभवों को साझा किया और वैश्विक कूटनीति के बदलते स्वरूप पर चर्चा की।
विदेश नीति के पिछले एक दशक के बदलावों पर मंथन
इस उच्च स्तरीय संवाद के दौरान, एस. जयशंकर ने पिछले दस वर्षों में देश की विदेश नीति में आए ऐतिहासिक बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किस प्रकार देश ने अपनी कूटनीति की शुरुआत हमेशा अपने पड़ोसी देशों से की है और धीरे-धीरे वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत किया है। चर्चा का मुख्य केंद्र यह समझना था कि कैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के हितों को सुरक्षित रखते हुए कूटनीतिक रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण संस्थान और भविष्य की रणनीतियां
सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठ राजनयिकों को आधुनिक वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करना है। अधिकारियों ने प्रशिक्षण के तहत कूटनीति के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। इस प्रकार के सत्र अनुभवी अधिकारियों को वैश्विक स्तर पर उत्पन्न होने वाली नई परिस्थितियों और भू-राजनीतिक बदलावों के बीच बेहतर निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करते हैं।
जनता की प्रतिक्रिया
इस संवाद के सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लोगों ने देश की मजबूत होती विदेश नीति और मंत्री के नेतृत्व की जमकर सराहना की। कई नागरिकों ने वैश्विक मंच पर देश के बढ़ते रसूख और कूटनीतिक उपलब्धियों पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।



























