वेब सीरीज ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ को लेकर चर्चा के केंद्र में मौजूद परिणीति चोपड़ा ने अपने अभिनय के तौर-तरीकों और निजी जिंदगी के तालमेल पर खुलकर राय रखी है। उनका मानना है कि पर्दे पर निभाए जाने वाले जटिल और भारी-भरकम किरदारों का असर कभी भी उनकी निजी दिनचर्या या मानसिक स्थिति पर हावी नहीं होना चाहिए। शूटिंग के दौरान भले ही वह अपने किरदार में पूरी तरह डूब जाती हैं, लेकिन जैसे ही निर्देशक की तरफ से विराम का संकेत मिलता है, वह तुरंत सामान्य स्थिति में लौट आती हैं।
कैमरा रुकते ही तुरंत स्विच ऑफ हो जाती है अभिनय की दुनिया
परिणीति चोपड़ा के मुताबिक, उनके भीतर का कलाकार बहुत सहजता से ऑन और ऑफ होने की क्षमता रखता है। शूटिंग के दौरान दृश्य खत्म होने का इशारा मिलते ही वह पूरी तरह से सहज हो जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी भावुक लम्हे या किरदार के तनाव को एक सेकंड के लिए भी अपने साथ ढोकर आगे नहीं बढ़ती हैं। सेट पर दृश्य पूरा होते ही वह वास्तविक दुनिया में लौट आती हैं और यह बदलाव इतनी तेजी से होता है कि कई बार उनके साथी कलाकार और क्रू मेंबर्स भी हैरान रह जाते हैं।
सेट पर उड़ता है मजाक, लोग नकल उतारकर पूछते हैं सवाल
इस अचानक आने वाले बदलाव की वजह से अक्सर काम की जगह पर उनका मजाक भी बनाया जाता है। अभिनेत्री ने साझा किया कि कई बार ऐसा हुआ है जब वह कैमरे के सामने फूट-फूटकर रो रही थीं या चीख रही थीं, लेकिन सीन खत्म होते ही तुरंत हंसने लगीं और सामान्य बातचीत करने लगीं। लोग अक्सर उनकी नकल उतारते हैं और हैरत से पूछते हैं कि वह इतनी तेजी से भावनाओं को कैसे बदल लेती हैं। इस पर उनका कहना है कि वह यह सब जानबूझकर या किसी पूर्व योजना के तहत नहीं करतीं, बल्कि यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया की तरह घटित होता है।
आंसू और मेहनत असली, लेकिन किरदार का बोझ ढोने से परहेज
अभिनय के दौरान समर्पण की बात करते हुए उन्होंने बताया कि कैमरे के सामने बहने वाले आंसू असली होते हैं और उनमें शारीरिक व भावनात्मक ऊर्जा भी पूरी तरह खर्च होती है। फिर भी, जैसे ही काम पूरा होता है, वह खुद को उस भूमिका से पूरी तरह अलग कर लेती हैं। अभिनेत्री का मानना है कि ईश्वर का शुक्र है कि उनके पास यह खूबी है, वरना गंभीर और भारी किरदारों का हैंगओवर उन्हें मानसिक व शारीरिक तौर पर बेहद थका देता। एक कलाकार और इंसान के रूप में स्वस्थ बने रहने के लिए वह किसी रोल के दबाव को अपने सिर पर सवार नहीं होने दे सकतीं।
सेट से बाहर की जिंदगी और निजी संतुलन बनाए रखने की अहमियत
परिणीति चोपड़ा ने जोर देकर कहा कि वह किसी भावुक दृश्य के तनाव को पूरे दिन अपने साथ रखकर अपना समय बर्बाद नहीं कर सकती हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि शूटिंग सेट की चारदीवारी से बाहर भी उनकी एक भरपूर जिंदगी है, जिसे पूरी जिंदादिली के साथ जिया जाना जरूरी है। काम के असर को निजी पलों पर न थोपने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि दिन में किसी गंभीर और भावुक दृश्य की शूटिंग करने का यह मतलब कतई नहीं है कि शाम को किसी जन्मदिन की पार्टी में जाते वक्त भी वही तनाव या उदासी चेहरे पर छाई रहे।



















