दर्शकों से मिल रहे शानदार रिस्पॉन्स के बावजूद फिल्म ‘पायर’ के शो अचानक कम किए जाने पर डायरेक्टर विनोद कापड़ी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका आरोप है कि ‘रामायण’ के दबदबे और उसकी रिलीज के बाद एग्जीबिटर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने उनकी फिल्म के शोज पर कैंची चला दी है। फिल्ममेकर ने एक इमोशनल अपील करते हुए कहा कि थिएटर मालिकों को ऊपर से यह निर्देश मिले हैं कि वे किसी अन्य फिल्म को बिल्कुल भी जगह न दें, भले ही वे हॉल खाली क्यों न चल रहे हों। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ तौर पर ‘रामायण’ के मेकर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स की ओर था।
सीमित रिलीज से बढ़कर 400 हुए थे शो
विनोद कापड़ी ने फिल्म से जुड़े लोगों की ईमानदारी पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ऐसे समय में जब सच्चाई और अच्छाई की बात की जाती है, ऐसा बर्ताव दुखद है। उन्होंने कुछ स्क्रीनशॉट भी साझा किए हैं जिनमें देश के कई शहरों में उनकी फिल्म के शोज में भारी कटौती साफ देखी जा सकती है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर बात रखते हुए कहा कि जब यह फिल्म सिनेमाघरों में आई थी, तो इसे बहुत ही सीमित स्तर पर केवल 80 शोज के साथ उतारा गया था। दर्शकों की भारी डिमांड और सकारात्मक प्रतिक्रिया के चलते महज दो से चार दिनों के भीतर ही इसके शोज की संख्या बढ़कर 400 के पार पहुंच गई थी।
75 प्रतिशत से ज्यादा शोज हटाए जाने का आरोप
निर्देशक ने आगे दावा किया कि पिछले कुछ दिनों से उनकी फिल्म के 75 प्रतिशत से अधिक शोज को सिनेमाघरों से हटा दिया गया है। स्थिति यह है कि अब शोज घटकर 100 से भी कम रह गए हैं। थिएटर मालिकों और डिस्ट्रीब्यूटर्स का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें ऊपर से सख्त आदेश मिले हैं कि किसी और फिल्म को स्क्रीन नहीं दी जाएगी। विनोद कापड़ी ने इस बात पर हैरानी जताई कि बड़ी फिल्मों के लिए रास्ता साफ करने के वास्ते छोटी और स्वतंत्र फिल्मों का गला घोंटने की आखिर क्या आवश्यकता है।
2.5 करोड़ रुपये के बजट में बनी है फिल्म
विनोद कापड़ी ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि उन्हें यह बात समझ नहीं आती कि अपनी फिल्म को चलाने के लिए किसी दूसरी फिल्म को बंद करवाने की क्या मजबूरी है। क्या यही सच्चाई की झूठ पर और अच्छाई की बुराई पर जीत है? उन्होंने बताया कि उनकी यह छोटी सी फिल्म महज 2.5 करोड़ रुपये के बेहद मामूली बजट में तैयार की गई है, जिसमें गैर-व्यासायिक कलाकारों ने काम किया है। इस फिल्म को देखने के बाद सिनेमाघरों में दर्शक फूट-फूटकर रोने लगते हैं। उन्होंने कहा कि यदि बड़े बजट की फिल्मों के निर्माताओं ने पैसा लगाया है, तो उन्होंने भी अपनी इस फिल्म में अपना पूरा दिल और खून-पसीना लगाया है और वे भी एक अदद मौके के पूरे हकदार हैं।



















