अटलांटिक महासागर में एक भयानक समुद्री हादसा सामने आया है, जहाँ पश्चिम अफ्रीका से 127 लोगों को लेकर निकली एक लकड़ी की नाव 27 दिनों तक समुद्र में भटकी रही। इस दर्दनाक घटना में एक नवजात शिशु समेत 80 से अधिक लोगों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। स्पैनिश मैरीटाइम रेस्क्यू की टीमों ने बुधवार को ग्रैन कैनरिया द्वीप के तटीय शहर आर्गुइनेगुइन से लगभग 65 समुद्री मील दक्षिण-पश्चिम में इस नाव को खोज निकाला। बचाव दल जब नाव तक पहुँचा, तो वहाँ 44 लोग जीवित मिले, जबकि नाव पर 5 शव भी मौजूद थे। यह घटना पश्चिम अफ्रीका से यूरोप जाने वाले समुद्री मार्ग पर हुई सबसे दर्दनाक त्रासदियों में से एक बन गई है।
ग्रैन कैनरिया के दक्षिण-पश्चिम में चला बचाव अभियान
यह राहत और बचाव अभियान बुधवार को उस समय शुरू हुआ, जब स्पैनिश मैरीटाइम रेस्क्यू की टीमों ने खुले समुद्र में भटक रही इस नाव की स्थिति का पता लगाया। समुद्र की बेहद कठिन और खतरनाक परिस्थितियों के बीच बचाव कर्मियों ने नाव पर सवार 44 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता पाई। बचाए गए सभी 44 पुरुष सब-सहारा अफ्रीका के विभिन्न देशों के रहने वाले हैं। लगभग एक महीने तक खुले महासागर में फंसे रहने के कारण इन लोगों की शारीरिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक पाई गई। जीवित बचे लोगों में से तीन पुरुषों की हालत बेहद नाजुक थी, जिसके कारण उन्हें तुरंत एयरलिफ्ट करके इलाज के लिए अस्पताल पहुँचाया गया।
बाकी बचे यात्रियों को समुद्र के रास्ते ग्रैन कैनरिया ले जाया गया, जहाँ वे गुरुवार की तड़के बंदरगाह पर उतरे। बंदरगाह पर पहले से मौजूद चिकित्साकर्मियों, राहत कार्यकर्ताओं और स्थानीय अधिकारियों ने तुरंत उन्हें आपातकालीन चिकित्सा सहायता, भोजन और पानी उपलब्ध कराया। 27 दिनों तक अटलांटिक महासागर की भीषण धूप, ठंडी हवाओं और बिना पानी के रहने के कारण ज्यादातर लोग गंभीर रूप से डिहाइड्रेशन और शारीरिक कमजोरी से जूझ रहे थे।
अटलांटिक महासागर में 27 दिनों का भयानक सफर
नाव के सफर से जुड़ी जानकारियों के अनुसार, यह नौका अगस्त की शुरुआत में पश्चिम अफ्रीका के देश द गाम्बिया से रवाना हुई थी। रवाना होते समय इस नाव पर कुल 127 लोग सवार थे, जो कैनरी द्वीपसमूह पहुँचने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि, अटलांटिक महासागर में पहुँचने के कुछ ही समय बाद नाव में तकनीकी खराबी आ गई और वह नियंत्रण खो बैठी। इसके बाद नाव 27 दिनों तक समुद्र की तेज लहरों के सहारे अनिश्चित दिशा में भटकती रही।
इतने लंबे समय तक बिना भोजन, पीने के पानी और किसी सहारे के खुले समुद्र में रहने के कारण यात्रियों की हालत बिगड़ती चली गई। स्पैनिश मानवाधिकार संगठन कैमिनांडो फ्रोंटेरास की संस्थापिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता हेलेना मलेनो गार्ज़ोन ने बताया कि इस भयानक यात्रा के दौरान कुल 83 लोगों की जान चली गई। मानवाधिकार संस्था के अनुसार, जान गंवाने वाले लोगों में एक छोटा बच्चा भी शामिल था, जिसने समुद्र में ही दम तोड़ दिया।
खराब मौसम और शवों को न निकाल पाने की मजबूरी
हालांकि बचाव दल 44 जीवित पुरुषों को बचाने में सफल रहा, लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण अभियान में भारी रुकावटें आईं। स्पैनिश मैरीटाइम रेस्क्यू ने अपने बयान में पुष्टि की कि समुद्र में आई भीषण लहरों और तेज हवाओं के कारण नाव पर मौजूद 5 शवों को निकालना संभव नहीं हो सका और उन्हें वहीं छोड़ना पड़ा। घटना के समय इलाके में 20 नॉट की रफ्तार से हवाएं चल रही थीं और समुद्र में 2.5 मीटर ऊँची लहरें उठ रही थीं।
बचाव एजेंसी ने स्पष्ट किया कि इतनी तेज लहरों के बीच शवों को निकालने का प्रयास करने पर राहत कर्मियों और बचाव नौकाओं की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। मैरीटाइम रेस्क्यू ने यह भी कहा कि द गाम्बिया से रवाना होते समय नाव पर सवार लोगों की सटीक कुल संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना उनके अधिकार क्षेत्र और प्रशासनिक दायरे में नहीं आता है।
मानवाधिकार रिपोर्ट और अटलांटिक मार्ग के खतरे
इस हादसे में 80 से अधिक लोगों की मौत ने द गाम्बिया और पश्चिम अफ्रीका से कैनरी द्वीपसमूह की ओर जाने वाले अटलांटिक समुद्री मार्ग के भयानक खतरों को एक बार फिर रेखांकित किया है। कैमिनांडो फ्रोंटेरास जैसे संगठनों का कहना है कि द गाम्बिया से चलने वाली छोटी और पुरानी लकड़ी की नावें जब महासागर के तेज बहाव में फंस जाती हैं, तो वे मुख्य मार्ग से भटककर सैकड़ों मील दूर निर्जन क्षेत्रों में चली जाती हैं।
ग्रैन कैनरिया में जीवित बचे लोगों का इलाज जारी है, जबकि मानवीय संगठन अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निगरानी बढ़ाने, त्वरित बचाव प्रणालियों को मजबूत करने और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं ताकि खुले समुद्र में इस प्रकार की मानवीय त्रासदियों को रोका जा सके।



















