स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने उत्तर अफ्रीकी तट पर स्थित स्पैनिश क्षेत्र सेउटा में हाल ही में हुए 72,000 प्रवासियों के अप्रत्याशित आगमन पर अपनी सरकार का बचाव किया है। संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सीमा संकट के संबंध में सरकार को पहले से कोई चेतावनी या खुफिया जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि प्रशासन को स्थिति की जानकारी थी और उसने कोई कदम नहीं उठाया। पेड्रो सांचेज़ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में विपक्षी दलों के समर्थन से हज़ारों लोग सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।
संसद में प्रधानमंत्री का बचाव और विपक्ष का विरोध
संसद में अपने संबोधन के दौरान स्पेनिश प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह सोचना पूरी तरह से बेबुनियाद है कि सरकार को इतने बड़े पैमाने पर होने वाले सीमा पारगमन की पूर्व जानकारी थी। उन्होंने कहा कि 30 और 31 जुलाई को घटी घटनाएं बेहद जटिल थीं और उसमें कई तरह के कारक शामिल थे। विपक्षी पार्टियों के विरोध और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए त्वरित कार्रवाई की है।
सेउटा में मानवीय स्थिति और प्रवासियों की वापसी
सेउटा की भौगोलिक स्थिति यूरोपीय संघ के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह और मेलिला उत्तरी अफ्रीका में यूरोपीय संघ की एकमात्र जमीनी सीमाएं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रवासियों के प्रवेश के बाद दोनों देशों के बीच बने समन्वय के तहत 72 घंटों के भीतर 90 प्रतिशत से अधिक लोगों को मोरक्को वापस भेज दिया गया। हालांकि, इस त्वरित कार्रवाई के बावजूद वर्तमान में लगभग 5,000 प्रवासी सेउटा की सड़कों और तटीय इलाकों में शरण लिए हुए हैं। इनमें लगभग 1,400 बच्चे भी शामिल हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन के सामने एक बड़ा मानवीय और प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है।
अदालत के फैसले और पुलिस रिपोर्ट से जुड़े सवाल
सीमा पर अचानक बढ़े दबाव को लेकर स्पेनिश पुलिस की एक रिपोर्ट भी सामने आई है। इस रिपोर्ट में मोरक्को के सुरक्षा बलों की ढिलाई का जिक्र किया गया है। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह रिपोर्ट आधिकारिक रूप से मोरक्को सरकार पर सीधे आरोप नहीं लगाती है। इसके अलावा, यह बात भी सामने आई है कि स्पेनिश अदालत के एक हालिया फैसले के बाद समुद्र के रास्ते आने वाले प्रवासियों की संख्या में बढ़ोतरी की चेतावनियां मिली थीं। कई प्रवासियों ने अदालत के आदेश का गलत मतलब निकाला और यह मान लिया कि तैरकर सीमा पार करने पर उन्हें तुरंत वापस नहीं भेजा जाएगा।
मोरक्को और यूरोपीय देशों के साथ कूटनीतिक तनाव
प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने मोरक्को के साथ निकट समन्वय की बात स्वीकार की, लेकिन उन्होंने मोरक्को के दो मंत्रियों द्वारा सेउटा और मेलिला को लेकर दिए गए बयानों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने इन बयानों को अस्वीकार्य करार दिया। इस बीच, स्पेन के इस संकट का असर यूरोपीय पड़ोसियों पर भी पड़ा है। इटली ने स्थिति को देखते हुए स्पेन से आने वाले लोगों की सीमा जांच और आवाजाही पर नए प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। इस पर सांचेज़ ने जोर देकर कहा कि सेउटा केवल स्पेन की सीमा नहीं है, बल्कि यह यूरोप की सीमा पर स्थित स्पेन है।
सोशल मीडिया और मानव तस्करी गिरोहों पर आरोप
प्रधानमंत्री ने संकट के कारणों पर चर्चा करते हुए मानव तस्करी करने वाले गिरोहों और सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने संसद में कहा कि विभिन्न सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए भ्रामक जानकारी फैलाई गई, जिससे लोग बड़ी संख्या में सीमा की ओर बढ़े। उन्होंने रूस, इज़राइल और अंतरराष्ट्रीय सुदूर-दक्षिणपंथी समूहों से जुड़े सोशल मीडिया खातों की गतिविधियों का उल्लेख किया, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना में किसी विदेशी सरकार की प्रत्यक्ष संलिप्तता का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इसके साथ ही उन्होंने सेउटा में तैनात पुलिस बल की सराहना की, जिन्होंने सीमा रक्षा के साथ-साथ मानवीय जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।



















