यूरोपीय संघ ने वर्ष 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण सैन्य हमले के बाद लक्षित किए गए दो बेहद प्रभावशाली रूसी अरबपतियों पर से प्रतिबंध हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस राजनयिक फैसले की जानकारी सामने आने के तुरंत बाद कीव ने बेहद तल्ख प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे अस्वीकार्य करार दिया है। यूक्रेन के राजनयिकों का मानना है कि ऐसे कदम से मॉस्को को गलत संदेश जाता है और प्रतिबंध व्यवस्था कमजोर पड़ती है।
फ्रांस और लक्ज़मबर्ग की पैरवी पर हुआ फैसला
इस निर्णय के केंद्र में दो जाने-माने उद्योगपति हैं, जिनके नाम हटाने के लिए अलग-अलग यूरोपीय देशों ने पैरवी की थी। फ्रांस ने रूसी-उज्बेक मूल के उद्योगपति अलिशर उस्मानोव को पाबंदियों की सूची से बाहर करने की मांग उठाई थी। फ्रांसीसी पक्ष ने अपने रुख के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कारणों का हवाला दिया था। इसके अलावा राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा रही है कि फ्रांस की यह पहल अजरबैजान के साथ कैदियों की संभावित रिहाई के एक जटिल समझौते से जुड़ी हुई थी। उस्मानोव पर जब वर्ष 2022 में संपत्तियां जब्त करने जैसी सख्त पाबंदियां लगाई गई थीं, तब यूरोपीय संघ ने उन्हें क्रेमलिन समर्थक और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का बेहद करीबी बताया था। हालांकि, उस्मानोव लगातार इन प्रतिबंधों को अनुचित और भेदभावपूर्ण बताते रहे हैं।
दूसरी ओर, लक्ज़मबर्ग ने रूसी-इजरायली कारोबारी मिखाइल फ्रिडमैन को सूची से हटाने का औपचारिक आग्रह किया था। यूक्रेन में जन्मे फ्रिडमैन अल्फा ग्रुप नामक विशाल निवेश समूह के संस्थापक हैं, जिसकी ऊर्जा और बैंकिंग क्षेत्र में व्यापक हिस्सेदारी है। यूरोपीय संघ ने उन्हें लंबे समय तक रूस के शीर्ष वित्तीय सिंडिकेट के सूत्रधार और पुतिन के करीबी घेरे को समर्थन देने वाले व्यक्ति के रूप में सूचीबद्ध किया था। फ्रिडमैन यूक्रेन में चल रहे युद्ध के लिए पुतिन की सार्वजनिक तौर पर सीधी निंदा करने से हमेशा बचते रहे हैं। वह अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों को मुक्त कराने के लिए यूरोपीय अदालत में लक्ज़मबर्ग के खिलाफ कानूनी मुकदमा भी लड़ रहे हैं, जिससे सदस्य देश पर विधिक दबाव बना हुआ था।
लातविया का शुरुआती विरोध और कूटनीतिक समझौता
इस पूरे प्रस्ताव पर यूरोपीय संघ के राजदूतों के बीच शुरुआत में सहमति नहीं बन पाई थी। सोमवार को हुए मतदान में लातविया ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल किया था। लातविया के कड़े रुख का एक बड़ा कारण फ्रिडमैन के कारोबारी सहयोगी प्योत्र एवेन से भी जुड़ा माना जाता है। रूसी-लातवियाई नागरिकता रखने वाले एवेन से वर्ष 2022 में लातविया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान वापस छीन लिया गया था, क्योंकि उन्होंने यूक्रेन पर सैन्य हमले की निंदा करने से साफ इनकार कर दिया था।
लेकिन मंगलवार को कूटनीतिक वार्ताओं के बाद लातविया ने अपना रुख बदला और वीटो की जगह मतदान में अनुपस्थित रहने का विकल्प चुना। इस समझौते के तहत लातविया ने अपनी राष्ट्रीय चिंताओं के समाधान के बदले में बड़े रियायतें हासिल कीं। समझौते के अनुसार, यूरोपीय संघ की प्रतिबंध सूची में शामिल लगभग 3,000 अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं पर पाबंदियों की अवधि को एक झटके में तीन साल के लिए बढ़ा दिया गया। इनमें से करीब 2,600 शेष व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए यह बड़ा बदलाव है, क्योंकि अब तक इन प्रतिबंधों को जारी रखने के लिए सदस्य देशों को हर छह महीने में दोबारा मतदान करना पड़ता था, जिससे बार-बार कूटनीतिक खींचतान की स्थिति पैदा होती थी।
सुरक्षा गारंटी और यूक्रेन की तीखी प्रतिक्रिया
लातविया के प्रधानमंत्री आंद्रिस कुलबर्ग्स ने घोषणा की कि फ्रांस एक फ्रांसीसी परमाणु निरोधक पहल में लातविया को शामिल करने के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करने पर सहमत हो गया है। इसके साथ ही फ्रांस लातविया की सीमाओं पर अपनी सैन्य उपस्थिति को और अधिक मजबूत करने के लिए भी तैयार हुआ है। इस द्विपक्षीय सुरक्षा आश्वासन के बाद ही लातविया ने यूरोपीय संघ के स्तर पर दोनों अरबपतियों के नाम हटाने का रास्ता साफ किया।
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने इस घटनाक्रम पर गहरा आक्रोश जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि मॉस्को इस समय खुशी मना रहा है क्योंकि उसे वह मिल गया जो वह चाहता था, जिसमें सजा से बचने का अहसास, यूरोपीय संघ का अपमान और यूरोपीय देशों के बीच दरार शामिल है। सिबिहा ने यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों से अपील की कि वे सामूहिक स्तर पर नाम हटने के बावजूद अपने-अपने राष्ट्रीय स्तर पर इन दोनों उद्योगपतियों पर अलग से कड़े प्रतिबंध लगाने की घोषणा करें। लातविया ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने देश में इन दोनों व्यक्तियों पर राष्ट्रीय स्तर पर पाबंदियां लागू करेगा।
क्रेमलिन का स्वागत और कानूनी तर्क
रूसी सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने दोनों प्रमुख कारोबारियों को प्रतिबंधों की सूची से बाहर किए जाने की संभावना का स्वागत किया। क्रेमलिन की तरफ से बार-बार यह दोहराया गया कि यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए सभी प्रतिबंध पूरी तरह से गैर-कानूनी और राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। पेसकोव ने यह भी दावा किया कि केवल दो व्यक्तियों को ही नहीं, बल्कि इस अन्यायपूर्ण सूची से सभी रूसी नागरिकों और संस्थाओं के नाम तत्काल हटाए जाने चाहिए। इस घटनाक्रम ने युद्ध के तीसरे साल में यूरोपीय संघ की एकता और प्रतिबंधों की वास्तविक प्रभावशीलता को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।



















