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फ्रांस के स्कूलों में भड़की हिंसा पर प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने दी चेतावनी, 164 लोग गिरफ्तारयूरोप
29 सित॰ 2026, 9:49 am (2 मिनट पहले)· 0

फ्रांस के स्कूलों में भड़की हिंसा पर प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने दी चेतावनी, 164 लोग गिरफ्तार

फ्रांस में कक्षाओं में भारी भीड़ और शिक्षकों की कमी को लेकर छात्रों का प्रदर्शन हिंसक हो गया है, जिसके बाद पुलिस ने 164 लोगों को हिरासत में लिया। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने इस टकराव को बढ़ाने को गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है।

फ्रांस भर के माध्यमिक विद्यालयों में संसाधनों की कमी और भारी अव्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब गंभीर टकराव का रूप ले चुका है। राजधानी पेरिस से भड़की यह चिंगारी देश के कई अन्य हिस्सों तक फैल गई है, जहां छात्रों द्वारा स्कूलों की तालाबंदी और पुलिस के साथ हिंसक झड़पें देखने को मिली हैं। सोमवार को बिगड़े हालात के बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए 164 लोगों को गिरफ्तार किया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि इस आंदोलन को और उग्र बनाना पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना कदम होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्कूली समस्याओं पर बात जरूर होनी चाहिए, लेकिन हिंसा को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पेरिस से लेकर अन्य प्रांतों तक फैली आंदोलन की आग

यह छात्र आंदोलन पिछले सप्ताह पेरिस के आसपास स्थित इल-द-फ्रांस क्षेत्र के उच्च माध्यमिक विद्यालयों यानी लीसी से शुरू हुआ था। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शनों ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने कक्षाओं में अत्यधिक भीड़, नए शिक्षकों की भारी कमी और जर्जर स्कूल भवनों को लेकर सड़कों पर उतरना शुरू किया। इसके बाद छात्रों ने परिसरों के मुख्य दरवाजों पर बैरिकेड्स लगाकर स्कूल बंद कराने शुरू कर दिए।

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शुरुआती दिनों में पेरिस तक सीमित रहा यह विरोध अब फ्रांस के कई अन्य प्रमुख क्षेत्रों में पहुंच चुका है। दक्षिणी प्रांतों आल्प्स-मैरीटाइम्स और वार में चार बड़े स्कूलों की घेराबंदी कर पूरी तरह पढ़ाई रोक दी गई। इसके अलावा मार्सिले के तटीय इलाकों, उत्तरी शहर लिले और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र आर्डिनेस के सेडान शहर में भी छात्रों के बड़े प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं, जिसमें पुलिस दलों पर आतिशबाजी और ट्यूब प्रोजेक्टाइल दागे गए।

हिंसा में सुरक्षाकर्मी और छात्र घायल

सोमवार को हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस दिन देश भर के 180 स्कूल सीधे तौर पर प्रभावित हुए। दिन भर चले टकराव के दौरान सुरक्षा बलों के 12 जवान घायल हो गए। इसके साथ ही झड़पों में 12 छात्र और स्कूल प्रशासन के 3 कर्मचारी भी चोटिल हुए हैं। हालांकि, आंतरिक मंत्री ने हिरासत में लिए गए 164 व्यक्तियों की विस्तृत पहचान या कानूनी स्थिति के बारे में विस्तृत विवरण साझा नहीं किया है।

टकराव के दौरान सामने आई कुछ घटनाओं की आधिकारिक जांच भी शुरू कर दी गई है। ऐसी ही एक गंभीर घटना में भीड़ नियंत्रण के लिए तैनात एक पुलिसकर्मी द्वारा ग्रेनेड लॉन्चर से दागे गए राउंड की चपेट में आने से एक स्कूली छात्र घायल हो गया। इस पूरे मामले की औपचारिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं ताकि बल प्रयोग की परिस्थितियों की निष्पक्ष समीक्षा की जा सके।

छात्र संगठनों का आक्रोश और बजट कटौती का आरोप

हाई स्कूल के छात्रों के अधिकारों की वकालत करने वाले प्रमुख छात्र संगठन यूनियन सिंडिकेल लीसीन ने प्रदर्शनों का पुरजोर बचाव किया है। संगठन का कहना है कि छात्रों का यह आक्रोश उनके दैनिक जीवन की वास्तविक समस्याओं की स्वाभाविक और जायज प्रतिक्रिया है। संगठन ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि स्कूलों में शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों की विकट कमी है, इमारतें जर्जर हालत में हैं और समय सारिणी पर भारी दबाव है।

छात्र संगठन ने उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए फ्रांस में इस्तेमाल होने वाले वेब प्लेटफॉर्म पारकूरसप द्वारा पैदा किए जाने वाले भारी मानसिक तनाव का भी मुद्दा उठाया। छात्र प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था की यह बदहाली किसी अनहोनी का नतीजा नहीं, बल्कि पिछले 10 वर्षों के दौरान इमैनुएल मैक्रों की नीतियों और राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली में बजट आवंटन की भारी उपेक्षा का सीधा परिणाम है। यूनियन ने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों की रक्षा करने और बजटीय सख्ती के खिलाफ मंगलवार को भी स्कूलों की घेराबंदी जारी रखें।

कामकाजी तबकों की हड़ताल और राजनीतिक तकरार

छात्रों के असंतोष के साथ ही फ्रांस में सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े अन्य कर्मचारियों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को शिक्षकों, अस्पताल कर्मियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले यूनियनों ने भी काम ठप रखने का फैसला किया। ये सभी संगठन कम वेतन और कार्यस्थलों की बिगड़ती परिस्थितियों के विरोध में एक दिवसीय हड़ताल पर उतरे हैं। इससे शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों पर भारी असर पड़ने की संभावना बन गई है।

दूसरी ओर, यह आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा कि हाई स्कूलों की व्यावहारिक परेशानियों को सुना जाना चाहिए और उनका समाधान भी निकलना चाहिए। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंसा की स्पष्ट रूप से निंदा की जानी चाहिए और उपद्रव करने वालों को अपने किए का जवाब देना होगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने वामपंथी राजनीतिक दल फ्रांस अनबोव्ड (एलएफआई) पर छात्रों को भड़काकर आंदोलन को हिंसक रूप से फैलाने का आरोप लगाया।

इस आरोप के पलटवार में फ्रांस अनबोव्ड के नेता ज्यां-ल्यूक मेलेंशों ने सीधे तौर पर लेकोर्नू प्रशासन को घेरा। मेलेंशों ने आरोप लगाया कि सरकार ने ही प्रदर्शनकारी छात्रों पर इस कठोर कार्रवाई के आदेश दिए हैं, जबकि आंदोलन में भाग लेने वाले स्कूली छात्र पूरी तरह से हानिरहित थे।

प्रशासन का कड़ा रुख

आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज ने इन घटनाओं को एक पारंपरिक लोकतांत्रिक आंदोलन मानने से साफ इनकार किया है। नुनेज ने कहा कि यह कोई सामान्य छात्र आंदोलन नहीं है, बल्कि शहरी हिंसा जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि कई उपद्रवी नकाब पहनकर आए थे, जिनके पास आतिशबाजी वाले ट्यूब और फेंकने वाले हथियार मौजूद थे और वे सीधे तौर पर आंतरिक सुरक्षा बलों से टकराने के इरादे से पहुंचे थे। उनके अनुसार, यह अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखने का प्रयास नहीं था, बल्कि सीधे तौर पर विशुद्ध हिंसा फैलाने की साजिश थी।

सवाल-जवाब

फ्रांस के स्कूलों में छात्र प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
छात्र कक्षाओं में भारी भीड़, शिक्षकों और कर्मचारियों की कमी, स्कूलों की जर्जर हालत और पारकूरसप प्रवेश प्रणाली से उत्पन्न तनाव को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
सोमवार के प्रदर्शनों में कितने लोगों को हिरासत में लिया गया?
सोमवार को हुए हिंसक प्रदर्शनों और स्कूल तालाबंदी के सिलसिले में पुलिस ने कुल 164 लोगों को गिरफ्तार किया है।
इस आंदोलन में कितने स्कूल और लोग प्रभावित हुए हैं?
आंतरिक मंत्री के अनुसार 180 स्कूल प्रभावित हुए, जबकि झड़पों में 12 सुरक्षाकर्मी, 12 छात्र और 3 स्कूल कर्मचारी घायल हुए।
प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्कूलों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, लेकिन हिंसा पूरी तरह अस्वीकार्य है और आंदोलन को बढ़ाना गैर-जिम्मेदाराना होगा।
छात्रों के अलावा कौन से समूह हड़ताल पर जा रहे हैं?
कम वेतन और काम की खराब परिस्थितियों के विरोध में शिक्षकों, अस्पताल कर्मियों और सिविल सेवकों ने भी हड़ताल का आह्वान किया है।
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