एशियाई खेलों 2026 में भारतीय दल के लिए सोमवार का दिन पदकों की नई चमक और मैदान पर कड़े संघर्ष की अनूठी दास्तान लेकर आया। भारतीय एथलीटों ने पूरे दिन चले रोमांचक मुकाबलों में असाधारण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए कुल आठ नए पदक देश की झोली में डाले। इन पदकों में चार रजत और चार कांस्य पदक शामिल रहे। इस जोरदार बढ़ोत्तरी के बाद प्रतियोगिता में भारत के पदकों की कुल संख्या बढ़कर 45 पर पहुंच गई है, जिसमें 4 स्वर्ण, 20 रजत और 21 कांस्य पदक दर्ज हैं। नए पदकों के जुड़ने से कुल तालिका में तेजी तो आई, लेकिन स्वर्ण पदकों की संख्या में बदलाव न होने से भारत पदक तालिका में 12वें पायदान पर बना हुआ है। कई स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों को बेहद मामूली अंतर से पोडियम से बाहर भी रहना पड़ा, जिससे उत्साह के बीच कुछ मायूसी भी देखने को मिली।
भाला फेंक में यशवीर सिंह और रोहित यादव ने बिखेरी चमक
ट्रैक एंड फील्ड प्रतियोगिताओं में जब पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा शुरू हुई, तब गत चैंपियन नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी को लेकर प्रशंसकों में थोड़ी चिंता थी। हालांकि मैदान पर उतरे युवा खिलाड़ियों यशवीर सिंह और रोहित यादव ने उस कमी को जरा भी महसूस नहीं होने दिया। यशवीर सिंह ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत प्रदर्शन दर्ज करते हुए 85.72 मीटर दूर भाला फेंका और शानदार रजत पदक अपने नाम कर लिया। वहीं रोहित यादव ने भी बेहतरीन निरंतरता दिखाते हुए 84.35 मीटर का थ्रो दर्ज किया और कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। मुकाबले के शुरुआती दौर में यशवीर 83.56 मीटर के प्रयास के साथ शीर्ष पर काबिज थे, लेकिन श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 88.55 मीटर की दूरी नापकर स्वर्ण पदक जीत लिया। इस तरह दोनों युवा भारतीय थ्रोअर्स ने देश के लिए दोहरी पोडियम फिनिश सुनिश्चित की।
चोट से जूझते हुए मुरली श्रीशंकर ने लंबी कूद में जीता रजत
लंबी कूद के मैदान पर भारत के मुरली श्रीशंकर ने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश की। श्रीशंकर ने स्पर्धा की शुरुआत में ही 8.07 मीटर की जबरदस्त छलांग लगाकर रजत पदक की अपनी दावेदारी लगभग तय कर ली थी। दुर्भाग्य से अपने चौथे प्रयास के दौरान वे चोटिल हो गए। गंभीर दर्द के चलते वे अपने अंतिम दो प्रयासों में भाग नहीं ले सके और बाहर बैठकर ही अन्य एथलीटों के प्रदर्शन को देखने को मजबूर हुए। राहत की बात यह रही कि कोई भी प्रतिद्वंद्वी उनके 8.07 मीटर के आंकड़े को पार नहीं कर सका। इस स्पर्धा में चीन के युहाओ शी ने 8.17 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि उज्बेकिस्तान के अनवरोव 8.06 मीटर के साथ कांस्य पदक जीतने में सफल रहे।
विथ्या रामराज का ऐतिहासिक राष्ट्रीय रिकॉर्ड, गुलवीर और पारुल को दोहरा पदक
दौड़ की स्पर्धाओं में सोमवार का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। भारत की विथ्या रामराज ने महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ में 54.75 सेकंड का समय निकालते हुए कांस्य पदक हासिल किया। इसी दौड़ के साथ उन्होंने महान धाविका पीटी उषा का चार दशक से भी ज्यादा समय से अटूट रहा राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया। मध्यम और लंबी दूरी की दौड़ में भारतीय धावकों की शानदार लय जारी रही। गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 1500 मीटर फाइनल दौड़ में 3:36.72 का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय निकालते हुए रजत पदक पर कब्जा किया। 10,000 मीटर के बाद इन खेलों में यह उनका दूसरा रजत पदक रहा। महिलाओं की 5000 मीटर स्पर्धा में पारुल चौधरी ने 15:14.61 का समय दर्ज करते हुए कांस्य पदक हासिल किया, जो स्टीपलचेज के बाद इन खेलों में उनका भी दूसरा पदक बना।
शूटिंग रेंज में ईशा सिंह का रजत, कुराश में पिंकी बल्हारा का कांस्य
निशानेबाजी रेंज में ईशा सिंह ने भारी दबाव के बीच अपने मानसिक संतुलन और एकाग्रता का शानदार मुजाहिरा किया। महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में उन्होंने कई करीबी शूट-ऑफ जीतकर फाइनल तक का सफर तय किया। फाइनल मुकाबले में ईशा सिंह और चीन की जिआरुइक्सुआन जिओ दोनों का स्कोर 38 पर टाई हो गया। इसके बाद अंतिम शूट-ऑफ में कड़े मुकाबले के बाद ईशा को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। दूसरी ओर कुराश की मैट पर पिंकी बल्हारा ने अपने लंबे अनुभव का लाभ उठाते हुए महिलाओं के -78 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक जीता। जकार्ता 2018 एशियाई खेलों के बाद आठ वर्षों के लंबे इंतजार के बाद यह पिंकी का दूसरा एशियाई खेलों का पदक है।
मुक्केबाजी में तीन पदक पक्के, सेमीफाइनल में तय होगा रंग
मुक्केबाजी रिंग से भी भारतीय दल के लिए उत्साहवर्धक नतीजे सामने आए। तीन प्रमुख मुक्केबाजों ने अपने-अपने क्वार्टर फाइनल मुकाबले जीतकर देश के लिए कम से कम तीन और पदक पक्के कर लिए हैं। महिलाओं के 75 किग्रा वर्ग में लवलीना बोरगोहेन, 60 किग्रा वर्ग में प्रिया और पुरुषों के 90 किग्रा वर्ग में कपिल पोखरिया ने अपने विरोधियों को मात देकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। मुक्केबाजी के नियमों के मुताबिक सेमीफाइनल में पहुंचते ही कांस्य पदक सुरक्षित हो जाता है, और अब इन तीनों के पदकों का अंतिम रंग सेमीफाइनल मुकाबलों के परिणाम से तय होगा।
हॉकी में बांग्लादेश को 10-0 से रौंदा, क्रिकेट टीम भी सेमीफाइनल में
मैदानी खेलों में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने अपनी बादशाहत कायम रखी। गत चैंपियन भारत ने पूल ए के अपने अंतिम लीग मुकाबले में बांग्लादेश को एकतरफा अंदाज में 10-0 से हरा दिया। कप्तान हरमनप्रीत सिंह और फारवर्ड अभिषेक ने शानदार हैट्रिक जमाई। इसके अलावा टीम के लिए जुगराज, सुखजीत, शिलानंद, संजय और मनदीप सिंह ने भी एक-एक गोल दागा। इस धमाकेदार जीत के साथ भारत ने पांच मैचों में पांच जीत और +45 के बेजोड़ गोल अंतर के साथ 1 अक्टूबर को पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले सेमीफाइनल मुकाबले में जगह बना ली। वहीं दूसरी ओर क्रिकेट में अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाला मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया, जिसके बाद भारतीय टीम ने अपनी बेहतर सीडिंग के आधार पर सीधे सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया।
अविनाश साबले और सीमा कालीरमाना मामूली अंतर से पदक से चूके
सफलता के इस दौर के बीच कुछ स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों को दिल तोड़ने वाली नजदीकी हार का भी सामना करना पड़ा। पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा के गत चैंपियन अविनाश साबले 8:21.67 का अपना इस सत्र का सर्वश्रेष्ठ समय निकालने के बावजूद पोडियम पर जगह बनाने से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। महिला डिस्कस थ्रो में अनुभवी सीमा कालीरमाना ने भी 59.88 मीटर का बेहतरीन थ्रो फेंका, लेकिन वे भी बहुत छोटे अंतर से चौथे स्थान पर रहीं। इसके अलावा महिलाओं की 4×100 मीटर रिले टीम भी चौथे स्थान पर रहकर पदक से वंचित रह गई। हालांकि ट्रैक स्पर्धाओं से आगे के लिए उम्मीदें बरकरार हैं क्योंकि भारत ने पुरुषों की 4×400 मीटर और मिक्स्ड 4×100 मीटर रिले स्पर्धाओं के फाइनल में प्रवेश पा लिया है।



















