सर्बिया के लंबे समय से सत्ता में रहे दक्षिणपंथी लोकलुभावन नेता अलेक्सांद्र वुचिच ने देश के मध्यावधि संसदीय चुनाव में ऐतिहासिक उलटफेर स्वीकार कर लिया है। राजधानी बेलग्रेड स्थित अपनी पार्टी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी (एसएनएस) के मुख्यालय से देश को संबोधित करते हुए उन्होंने माना कि इस चुनाव में छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध आंदोलन ने बाजी मार ली है। हालांकि देश के चुनाव आयोग की ओर से अभी अंतिम और आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन रुझानों के स्पष्ट संकेत के बाद उन्होंने अपनी पराजय स्वीकार करने में तनिक भी देर नहीं लगाई।
एसएनएस मुख्यालय में रविवार देर रात सार्वजनिक रूप से बोलते हुए अलेक्सांद्र वुचिच ने कहा,
"हमारे पास अभी अंतिम नतीजे नहीं हैं... यह स्पष्ट है कि हम ये चुनाव हार चुके हैं।"उनकी इस अप्रत्याशित स्वीकारोक्ति ने पिछले कई वर्षों से बाल्कन राष्ट्र की राजनीति पर काबिज राजनीतिक वर्चस्व के अंत का संकेत दे दिया है।
सड़कों पर उमड़ा जश्न, छात्रों ने लगाए 'जीत' के नारे
अलेक्सांद्र वुचिच के हार स्वीकार करते ही राजधानी बेलग्रेड की सड़कों पर हजारों युवाओं और नागरिकों का हुजूम उतर आया। सर्बियाई राजधानी की सड़कें अचानक उत्सव के रंग में रंग गईं। रात के सन्नाटे में कारों के लगातार बजते हॉर्न और चारों तरफ गूंजते 'जीत' के नारे इस बदलाव की गवाही दे रहे थे। महीनों तक सत्ता विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाले छात्र समूहों के लिए यह परिणाम उनकी लंबी और कठिन राजनीतिक लड़ाई का सबसे बड़ा मुकाम साबित हुआ है।
भारी मतदान ने पलटा सर्बिया का सियासी पासा
सर्बिया के चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, इन मध्यावधि चुनावों में मतदान का एक नया रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। चुनाव विश्लेषकों और जानकारों ने पहले ही इस बात का आकलन पेश किया था कि यदि मतदान प्रतिशत सामान्य से बहुत अधिक रहता है, तो उसका सीधा लाभ छात्रों के इस व्यापक आंदोलन को मिलेगा। मतदाताओं के भारी उत्साह और कतारों ने यह साबित कर दिया कि सत्ता विरोधी लहर देश के आम लोगों को मतदान केंद्रों तक खींच लाने में पूरी तरह कामयाब रही।
नोवी साद स्टेशन हादसे के बाद भड़का था जनाक्रोश
इस पूरे राजनीतिक संकट और समय पूर्व चुनाव की नींव साल 2024 में उस वक्त पड़ी थी, जब नोवी साद शहर के रेलवे स्टेशन पर एक बड़ा हादसा हुआ था। स्टेशन पर बने कंक्रीट के कैनोपी के अचानक ढह जाने से 16 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इस दिल दहला देने वाली त्रासदी को पूरे सर्बिया में सरकारी लापरवाही, खराब निर्माण गुणवत्ता और गहरे संस्थागत भ्रष्टाचार के प्रतीक के रूप में देखा गया। हादसे के बाद पूरे देश में भारी जनाक्रोश फूट पड़ा था।
दो साल के व्यापक विरोध के बाद हुआ था मध्यावधि चुनाव का फैसला
नोवी साद की इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे सर्बिया में लगातार दो वर्षों तक व्यापक विरोध प्रदर्शनों का दौर चला। छात्रों और युवा संगठनों ने इन प्रदर्शनों की कमान संभाली और देश भर के विश्वविद्यालयों से लेकर मुख्य चौराहों तक सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। लगातार बढ़ते जनदबाव और सड़कों पर जारी प्रदर्शनों के चलते अलेक्सांद्र वुचिच को देश में मध्यावधि संसदीय चुनाव कराने के लिए बाध्य होना पड़ा था। अब इन चुनावों के नतीजों ने सर्बियाई राजनीति को एक नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
























