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डब्लिन में अखंड आयरलैंड का राग: क्या अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने खेला यह दांव?यूरोप
13 सित॰ 2026, 3:34 am (46 दिन पहले)· 2

डब्लिन में अखंड आयरलैंड का राग: क्या अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने खेला यह दांव?

डोनाल्ड ट्रंप की आयरलैंड यात्रा के दौरान अखंड आयरलैंड पर दिए गए बयानों ने वैश्विक स्तर पर राजनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है, जिसे अमेरिका के आगामी मध्यावधि चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दो दिवसीय आयरलैंड यात्रा के दौरान एक बार फिर वैश्विक कूटनीति में अप्रत्याशितता का दौर देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में यह एक स्थापित तथ्य माना जाता है कि जब भी कोई वैश्विक नेता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करता है, तो वहां केवल एक ही बात तय होती है और वह है अनिश्चितता। इस बार भी जब ट्रंप आयरलैंड पहुंचे, तो उनकी यात्रा के शुरू होने से पहले ही इस बात को लेकर कयासों का बाजार गर्म था कि उनकी इस यात्रा से क्या परिणाम निकलेंगे। उनके द्वारा दिए गए बयानों ने न केवल आयरलैंड और उत्तरी आयरलैंड के इस द्वीप पर बल्कि पूरे ग्रेट ब्रिटेन में एक बड़ी राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। राजनयिक गलियारों में अब इस बात को लेकर गहन मंथन चल रहा है कि क्या ट्रंप के ये बयान अमेरिकी प्रशासन की किसी नई आधिकारिक विदेश नीति का हिस्सा हैं, या फिर यह उनके हमेशा की तरह अनौपचारिक और तत्काल दिए गए बयानों में से एक है। डोनाल्ड ट्रंप की यह छवि रही है कि वे पत्रकारों के सीधे और तीखे सवालों का सामना करना पसंद करते हैं और उन पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं।

अमेरिकी विदेश नीति और गुड फ्राइडे समझौता

डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद कि वे आयरलैंड को एकजुट देखना पसंद करेंगे, राजनयिक स्तर पर स्पष्टीकरण देने का दौर शुरू हो गया है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में उत्तरी आयरलैंड के लिए अमेरिकी विशेष दूत के रूप में कार्य कर चुके पूर्व रिपब्लिकन सांसद मिक मुलवेनी ने इस मामले पर अपनी राय रखी है। उन्होंने वैश्विक नेताओं और नीति निर्माताओं को चेतावनी दी है कि वे राष्ट्रपति के इन बयानों को बहुत अधिक गंभीरता से न लें और न ही इनका कोई बड़ा राजनीतिक अर्थ निकालें। मिक मुलवेनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बयान अमेरिकी विदेश नीति में किसी भी तरह के बदलाव को नहीं दर्शाता है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अमेरिका आज भी ऐतिहासिक गुड फ्राइडे समझौता को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इस शांति समझौते के प्रावधानों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

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इस विचार का समर्थन विपक्षी दल के नेताओं ने भी किया है। डेमोक्रेटिक सांसद ब्रेंडन बॉयल ने मिक मुलवेनी की बातों से सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि इस समझौते के लिए अमेरिका में द्विदलीय समर्थन मौजूद है, और यह स्थिति भविष्य में भी बदलने वाली नहीं है। हालांकि, दोनों ही नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया कि डोनाल्ड ट्रंप का यह सोचना शायद गलत नहीं है कि अंततः भविष्य में आयरलैंड का एकीकरण हो जाएगा, लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि अमेरिका इस एकीकरण को जल्द से जल्द लागू कराने के लिए कोई राजनयिक दबाव बनाने जा रहा है या इसके लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है।

राजदूत के आवास पर भाषण और 'द वीव' शैली

एक अनौपचारिक और स्वतंत्र रूप से चलने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछे गए सवाल का जवाब देना एक अलग बात होती है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने इसके कुछ ही समय बाद अमेरिकी राजदूत के आधिकारिक आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी इन भावनाओं को फिर से दोहराया। वहां आमंत्रित दर्शकों के सामने भाषण देते हुए उन्होंने इस मुद्दे को लगभग अपनी शुरुआती बातचीत में ही शामिल कर लिया। इस कदम से यह संकेत मिलता है कि शायद उन्हें इस बात का अंदाजा हो गया था कि उनके पहले दिए गए बयान ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है, और वे इसे अपने तरीके से नियंत्रित करना चाहते थे।

इसके बाद का पूरा भाषण बेहद दिलचस्प और सामान्य कूटनीतिक भाषणों से काफी अलग रहा। इस कार्यक्रम को डब्लिन में आयरिश और आयरिश-अमेरिकी व्यापारिक नेताओं के समक्ष दिए जाने वाले 20 मिनट के संक्षिप्त संबोधन के रूप में प्रचारित किया गया था, लेकिन ट्रंप का यह भाषण तय समय से लगभग दोगुना लंबा चला। इस पूरे भाषण के दौरान वे ज्यादातर अमेरिकी घरेलू मुद्दों और अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक उपलब्धियों पर ही बात करते नजर आए। डोनाल्ड ट्रंप की अपनी एक अनूठी भाषण शैली है, जिसे वे खुद 'द वीव' यानी ताना-बाना बुनने की कला कहते हैं। इस शैली के तहत वे भाषण के दौरान बड़ी ही सहजता से एक विषय से दूसरे विषय पर कूद जाते हैं, अपने लिखित आलेख से पूरी तरह भटक जाते हैं और फिर अचानक से मूल विषय पर वापस लौट आते हैं।

अपने इस संबोधन में उन्होंने अपनी सरकार की उन नीतियों और उपलब्धियों की जमकर सराहना की, जिन्हें वे अपनी बड़ी सफलताएं मानते हैं। इनमें अवैध प्रवासन पर की गई सख्त कार्रवाई, वैश्विक स्तर पर किए गए व्यापारिक समझौते और रक्षा उत्पादन में की गई बढ़ोतरी शामिल रही। इसके साथ ही, उन्होंने एक बार फिर सार्वजनिक रूप से यूके की आलोचना की और आरोप लगाया कि ईरान में अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान ब्रिटेन ने उन्हें अपेक्षित सहयोग और समर्थन प्रदान नहीं किया था।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और आयरिश-अमेरिकी मतदाता

इस पूरे घटनाक्रम के बाद विश्लेषकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ट्रंप के इन बयानों का वास्तविक लक्षित दर्शक कौन था? क्या वे डब्लिन में जुटे हुए व्यापारिक नेताओं को संबोधित कर रहे थे, या फिर उनका असली निशाना अमेरिका का वह घरेलू दर्शक वर्ग था जो अभी सुबह की पहली किरण फूटने से पहले ही टीवी स्क्रीन पर अपनी नजरें गड़ाए बैठा था? गौरतलब है कि अमेरिका में नवंबर के महीने में अत्यंत महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं और राष्ट्रपति की नीतियों के कारण उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी इस समय भारी राजनीतिक दबाव का सामना कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के एक या दोनों सदनों से अपना नियंत्रण खो सकती है।

अमेरिका की कुल जनसंख्या का लगभग दसवां हिस्सा खुद को आयरिश विरासत से जुड़ा हुआ मानता है, लेकिन यह आबादी कोई एक समान वोटिंग ब्लॉक नहीं है। ट्रंप के इस रुख के पीछे का मुख्य कारण अमेरिकी चुनाव प्रणाली में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आयरिश-अमेरिकी निर्दलीय और अस्थिर मतदाताओं को रिझाना हो सकता है। हाल के वर्षों में इस समुदाय के बहुत से मतदाताओं ने रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच अपने रुख को बदला है। चूंकि इस समुदाय का एक बड़ा वर्ग भावनात्मक रूप से अखंड आयरलैंड की मांग का समर्थन करता है, इसलिए चुनाव में एक-एक वोट हासिल करने की इस होड़ में ट्रंप का यह बयान एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

इतिहास की पुनरावृत्ति और ध्रुवीकरण का दौर

इतिहास गवाह है कि अमेरिकी चुनावों में आयरिश-अमेरिकी कार्ड खेलना कोई नई बात नहीं है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भी अपने राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान उत्तरी आयरलैंड की शांति प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होने का वादा करके इस समुदाय का भारी समर्थन हासिल किया था। उन्होंने चुनाव जीतने के बाद अपने इस वादे को पूरा भी किया और पूर्व आयरिश राष्ट्रपति मैरी रॉबिन्सन के कार्यकाल के दौरान उनके प्रयासों ने ही अंततः गुड फ्राइडे समझौता की मजबूत नींव रखने का काम किया था। हालांकि, आज का आयरिश-अमेरिकी समुदाय और समग्र रूप से अमेरिका का राजनीतिक परिदृश्य उस दौर की तुलना में काफी बदल चुका है।

वर्तमान समय में अमेरिकी राजनीति पहले से कहीं अधिक ध्रुवीकृत हो चुकी है और आगामी नवंबर के चुनावी अभियानों में भी इस कड़वाहट और विभाजन के कम होने के कोई संकेत दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे अशांत राजनीतिक माहौल में, आयरलैंड के स्थानीय नेता और राष्ट्रपति कैथरीन कॉनोली के साथ-साथ वहां के अन्य प्रशासनिक अधिकारी यही उम्मीद कर रहे होंगे कि डोनाल्ड ट्रंप की इस यात्रा के दूसरे दिन होने वाली चर्चाएं केवल खेल और गोल्फ कोर्स तक ही सीमित रहें, ताकि वे किसी नए राजनीतिक विवाद में फंसने से बच सकें।

सवाल-जवाब

क्या डोनाल्ड ट्रंप के बयान से अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव आया है?
नहीं, पूर्व विशेष दूत मिक मुलवेनी के अनुसार, यह बयान अमेरिकी विदेश नीति में किसी बदलाव को नहीं दर्शाता है और अमेरिका गुड फ्राइडे समझौते के प्रति प्रतिबद्ध है।
गुड फ्राइडे समझौते पर डेमोक्रेटिक पार्टी का क्या रुख है?
डेमोक्रेटिक सांसद ब्रेंडन बॉयल ने पुष्टि की है कि इस शांति समझौते के लिए अमेरिकी संसद में द्विदलीय (रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक) समर्थन हासिल है।
भाषण देने की 'द वीव' शैली क्या है?
यह डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रयुक्त भाषण शैली है जिसमें वे स्क्रिप्ट से हटकर विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हैं और फिर वापस मूल विषय पर लौट आते हैं।
आयरिश-अमेरिकी मतदाता अमेरिकी चुनावों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
आयरिश-अमेरिकी आबादी कुल अमेरिकी जनसंख्या का लगभग दसवां हिस्सा है और इसमें बड़ी संख्या में निर्दलीय मतदाता हैं जो दोनों बड़ी पार्टियों के बीच स्विच करते हैं।
बिल क्लिंटन ने 1995 में आयरिश-अमेरिकी वोट कैसे हासिल किए थे?
बिल क्लिंटन ने चुनाव प्रचार के दौरान आयरलैंड शांति प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने का वादा किया था, जिसने बाद में गुड फ्राइडे समझौते का मार्ग प्रशस्त किया।
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