JEE मेंस 2027 की परीक्षा में अब करीब 6 महीने का ही समय बचा है और लाखों उम्मीदवार इस आखिरी फेज़ में अपनी तैयारी को धार देने में जुटे हैं. रांची के एक आईआईटी कोचिंग सेंटर में पढ़ाने वाले शिक्षक दिलीप रंजन का कहना है कि इतने कम समय में सबसे जरूरी काम है सिलेबस पर पूरा ध्यान लगाना और हर चैप्टर को बार बार दोहराना.
ट्रिग्नोमेट्री और NCERT को दें सबसे ज्यादा तवज्जो
दिलीप रंजन के मुताबिक, बचे हुए 6 महीनों में कैंडिडेट्स को बाहरी दुनिया से थोड़ी दूरी बना लेनी चाहिए और पूरा ध्यान किताबों पर लगाना चाहिए. वे खासतौर पर ट्रिग्नोमेट्री जैसे चैप्टर का जिक्र करते हैं, जिसमें मेहनत करने पर अच्छे नंबर मिलने की संभावना काफी ज्यादा रहती है. उनकी सलाह है कि इस चैप्टर को एनसीईआरटी की किताब से कम से कम 25 बार हल किया जाए, ताकि कॉन्सेप्ट पूरी तरह से जेहन में बैठ जाए.
मैट्रिक्स और परसेंटेज जैसे चैप्टर में एक भी नंबर न गंवाएं
टीचर के मुताबिक मैट्रिक्स और परसेंटेज जैसे टॉपिक ऐसे हैं जिनमें कम मेहनत में ज्यादा स्कोर किया जा सकता है. इसीलिए उनका कहना है कि इन चैप्टर में एक भी मार्क्स नहीं कटना चाहिए. एनसीईआरटी को जितनी बार दोहराया जाए, उतना फायदा होगा. इसके अलावा किसी एक रेफरेंस बुक को चुनकर उसे भी करीब 25 बार हल करने की सलाह दी गई है.
फिजिक्स और केमिस्ट्री में भी NCERT ही आधार
फिजिक्स और केमिस्ट्री के लिए भी यही तरीका अपनाने की बात कही गई है. खासतौर पर ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में दिलीप रंजन का जोर सिर्फ एनसीईआरटी पर है. उनका मानना है कि ऑर्गेनिक केमिस्ट्री के लिए एनसीईआरटी अकेले काफी है और इसके लिए अलग से किसी रेफरेंस बुक की जरूरत नहीं पड़ती. इसलिए जितना संभव हो, ऑर्गेनिक केमिस्ट्री की प्रैक्टिस एनसीईआरटी से ही करनी चाहिए.
बैक क्वेश्चन और मॉडल पेपर की प्रैक्टिस जरूरी
दिलीप रंजन ने एनसीईआरटी के बैक क्वेश्चन यानी हर चैप्टर के अंत में दिए गए सवालों को बिल्कुल नजरअंदाज न करने की नसीहत दी है. उनके मुताबिक इन सवालों की अच्छी तरह प्रैक्टिस होनी चाहिए. इसके अलावा कोचिंग सेंटर की तरफ से मिलने वाले मॉडल पेपरों को भी पूरी तरह हल करना जरूरी है. उनका मानना है कि इस स्टेज पर प्रैक्टिस ही सफलता की असली कुंजी है.
हर चैप्टर के बाद मॉक टेस्ट, फिर कमजोर टॉपिक पर दोबारा मेहनत
टीचर की सलाह है कि जब किसी कैंडिडेट को लगे कि कोई चैप्टर पूरी तरह तैयार हो चुका है, तो उसी वक्त उस चैप्टर का अलग से मॉक टेस्ट देना चाहिए. इससे यह साफ पता चलेगा कि किस टॉपिक में कमजोरी बची हुई है. जिस हिस्से में गलतियां ज्यादा हों, उसे दोबारा गहराई से पढ़ना चाहिए और कॉन्सेप्ट की जड़ तक जाना चाहिए. दिलीप रंजन के मुताबिक सिर्फ सवाल हल कर लेने भर से काम नहीं चलेगा, कॉन्सेप्ट की पूरी स्पष्टता होना जरूरी है.
रोजाना 6 से 7 घंटे पढ़ाई, बाकी सब कुछ दिन के लिए टाल दें
दिलीप रंजन आगे कहते हैं कि इस फेज़ में हर उम्मीदवार को रोजाना कम से कम 6 से 7 घंटे पढ़ाई के लिए निकालने ही होंगे. जो कैंडिडेट्स अभी भी दूसरी गतिविधियों में व्यस्त हैं, उन्हें फिलहाल उन सबको छोड़कर सिर्फ परीक्षा की तैयारी पर फोकस करना चाहिए. उनका सुझाव है कि अगले कुछ महीनों के लिए बाकी सारे निजी प्लान टाल दिए जाएं. हालांकि, पढ़ाई के बीच खुद को तरोताजा रखने के लिए छोटे छोटे ब्रेक लेना गलत नहीं है, बस ध्यान इतना रखना है कि ये ब्रेक तैयारी से ध्यान भटकाने का जरिया न बन जाएं.











