यूपीटीईटी यानी उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा का पहला दिन राज्यभर में पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया, हालांकि प्रश्नपत्र ने कई अभ्यर्थियों को चौंका दिया. इस बार पेपर में मोहम्मद गजनवी से लेकर वैदिक काल और मौर्य शासन से लेकर बौद्ध धर्म तक से जुड़े गहरे ऐतिहासिक सवाल पूछे गए. परीक्षा देकर केंद्रों से बाहर निकले छात्रों का कहना था कि पेपर का कुल स्तर औसत यानी सामान्य रहा. गणित और अंग्रेजी के सवालों ने जहां राहत दी, वहीं इतिहास के हिस्से ने समय प्रबंधन को लेकर अनुमान से कहीं ज्यादा चुनौती खड़ी कर दी.
इतिहास के पुराने घटनाक्रमों ने खींचा ज्यादा समय
केंद्रों से बाहर निकलते ही छात्रों ने बताया कि इस बार सवाल कुल मिलाकर बेहद औसत स्तर के पूछे गए थे. गणित और अंग्रेजी में उन्हें किसी तरह की दिक्कत महसूस नहीं हुई. असली चुनौती इतिहास में आई, जहां पुराने कालखंडों से जुड़े घटनाक्रम पूछे गए और इन्हें हल करने में बाकी पेपर के मुकाबले कहीं ज्यादा समय खर्च करना पड़ा. कई अभ्यर्थियों ने माना कि सदियों पुरानी घटनाओं के बीच उलझने की वजह से उनका समय कम पड़ गया, और कुछ ने तो यह भी कहा कि समय की कमी की वजह से वे इतिहास के कुछ सवाल हल ही नहीं कर पाए.
सोनभद्र की सौम्या बोलीं, इस बार कटऑफ ऊंची जा सकती है
सोनभद्र से परीक्षा देने पहुंचीं सौम्या ने बताया कि इस बार प्रश्नपत्र कुल मिलाकर बेहद आसान था और उन्होंने खुद सारे सवाल हल कर लिए. उनके मुताबिक गणित के कुछ सवाल जरूर कठिन थे, लेकिन बाकी सारे सवाल बेहद सामान्य थे और उन्होंने हिंदी व अंग्रेजी के सभी प्रश्न बिना किसी परेशानी के हल कर दिए. सौम्या ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने अच्छी तैयारी की होगी, उनका इस बार काफी बेहतर कटऑफ बनने की पूरी उम्मीद है. वह खुद पहले से ही शिक्षिका हैं और उन्होंने अच्छी तैयारी की हुई थी. सौम्या के मुताबिक इस बार जिस तरह का प्रश्नपत्र आया है, उससे लग रहा है कि कटऑफ बेहद ऊपर जाएगा और ज्यादातर बच्चे इस बार आराम से पास होते नजर आएंगे.
पेपर अनुमान के मुताबिक ही आया, बनारस के गौरव को इतिहास में हुई परेशानी
खुशी चौधरी ने बताया कि पेपर करीब-करीब वैसा ही आया, जैसा उन्होंने अनुमान लगाया था. उन्होंने अच्छी तैयारी की हुई थी, हालांकि आखिर में तैयारी के मुकाबले सवाल थोड़े कम ही पूछे गए. कुछ सवाल ऐसे भी थे, जिन्हें हल करने में उन्हें खासी परेशानी हुई, फिर भी उन्होंने इस बार अच्छे नंबर आने की उम्मीद जताई और कहा कि परीक्षा में बहुत ज्यादा कठिन सवाल नहीं पूछे गए थे. वहीं बनारस से आए गौरव केसरी ने बताया कि इतिहास से जुड़े सवालों ने ही उन्हें असल में उलझाया, जबकि बाकी सवाल बेहद सामान्य थे और उन्हें हल करने में कोई दिक्कत नहीं आई. गौरव के मुताबिक पेपर कुल मिलाकर सामान्य स्तर का था और उसे जरूरत से ज्यादा कठिन नहीं बनाया गया था.
सिलेबस से कम पूछे गए सवाल, सोशल साइंस ने उलझाया
रोशनी ने बताया कि पहले जो सिलेबस बताया गया था, उसके मुकाबले परीक्षा में काफी कम सवाल पूछे गए. उन्होंने बताया कि उनकी तैयारी पूरी तरह पुख्ता और सही तरीके से हुई थी. सोशल साइंस के सवालों में उन्हें थोड़ी दिक्कत जरूर हुई, लेकिन बाकी सारे सवाल उन्होंने बेहद सहजता से और बिना ज्यादा मेहनत के हल कर लिए. रोशनी के मुताबिक कुल मिलाकर पेपर सामान्य स्तर का रहा और जिन अभ्यर्थियों ने ठीक से तैयारी की होगी, उन्हें इससे ज्यादा परेशानी नहीं हुई होगी.













