महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) की ड्रग इंस्पेक्टर पद के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा में हुए बड़े पेपर लीक मामले की जांच करते हुए मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम ने बड़ी सफलता हासिल की है। इस पूरे षड्यंत्र में शामिल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें 2 सितंबर तक पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश जारी हुआ है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस नेटवर्क का पर्दाफाश किसी केंद्रीय जांच एजेंसी की खुफिया जानकारी से नहीं, बल्कि दो प्रेमियों के बीच हुए ब्रेकअप के बाद उपजे आपसी विवाद की वजह से हुआ है।
आपसी विवाद और ब्रेकअप ने खोली गुप्त साजिश की पोल
जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की नींव उम्मीदवार रितुजा पाटील और गौरव पाटील के बीच के व्यक्तिगत संबंधों पर टिकी हुई थी। रितुजा और गौरव पाटील के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे। परीक्षा से ठीक पहले रितुजा ने अपने पिता अमृत पाटील से ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर किसी भी तरह हासिल करने की बात कही थी। पिता ने बेटी की मांग पूरी करने के लिए प्रशासनिक गलियारों में अपनी पैठ का इस्तेमाल शुरू किया। लेकिन बाद में रितुजा और गौरव के बीच रिश्तों में खटास आ गई और उनका ब्रेकअप हो गया। संबंध टूटने से नाराज गौरव पाटील उर्फ लोकेश ने इस गैरकानूनी गतिविधि को सार्वजनिक करने का मन बना लिया।
गौरव पाटील ने सोशल मीडिया पर एफडीए (FDA) से संबंधित विषय सामग्री और कंटेंट बनाने वाले ऋषिकेश गांगुर्दे से संपर्क साधा। गौरव ने ऋषिकेश को बताया कि उसके पास आगामी ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के लीक हो चुके पेपर की हूबहू कॉपी मौजूद है। ब्रेकअप के प्रतिशोध में गौरव ने इस पूरे पेपर लीक कांड का सच उजागर करने के लिए MPSC को सूचित करने का निर्णय लिया और ऋषिकेश गांगुर्दे को साक्ष्य के तौर पर लीक पेपर उपलब्ध करा दिया, जिसके बाद यह शिकायत पुलिस और प्रशासनिक स्तर तक पहुंची।
नंदुरबार का नेटवर्क और 12 लाख रुपये की वित्तीय डील
मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही वित्तीय लेन-देन की पड़ताल में पता चला है कि यह पेपर लीक एक सुनियोजित वित्तीय सौदे का हिस्सा था। रितुजा के पिता अमृत पाटील ने परीक्षा पत्र हासिल करने के लिए नंदुरबार में कोचिंग क्लास चलाने वाले कथित बिचौलिए प्रवीण पाटील से संपर्क साधा था। प्रवीण पाटील ने आयोग के अधिकारियों और अभ्यर्थियों के बीच कड़ी का काम किया। पुलिस की शुरुआती छानबीन में यह बात सामने आई है कि प्रवीण पाटील और MPSC के गिरफ्तार अधिकारियों के बीच लगभग 5 लाख रुपये का लेन-देन पूरा हो चुका था।
हालांकि, जांच अधिकारियों का मानना है कि यह पूरा सौदा करीब 12 लाख रुपये में तय किया गया था। वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच की जा रही है और पुलिस को आशंका है कि जैसे-जैसे बैंक खातों और नकदी के प्रवाह की जांच आगे बढ़ेगी, इसमें शामिल रकम का आंकड़ा और बढ़ सकता है। इस मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी यह भी सामने आई है कि बिचौलिया प्रवीण पाटील, अभ्यर्थी का पिता अमृत पाटील और आयोग के संदिग्ध अधिकारी, ये सभी मुख्य रूप से नंदुरबार जिले से जुड़े हुए हैं।
MPSC के अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका और आगे की जांच
इस गिरोह के तार सीधे महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के दफ्तर से जुड़े होने के प्रमाण मिले हैं। मामले की जांच के दौरान MPSC के तीन अधिकारियों की भूमिका गंभीर संदेहास्पद पाई गई है। इनमें सहायक कक्ष अधिकारी विश्वेश्वर नकटे, और अवर सचिव गोपाल मराठे तथा अभिजीत लेंडवे शामिल हैं। इन अधिकारियों की मिलीभगत और कार्यशैली की क्राइम ब्रांच द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है। परीक्षा आयोजित होने से ठीक दो दिन पहले गोपनीय पेपर आयोग के सिस्टम से बाहर किस तरह निकाला गया, यह जांच का मुख्य केंद्र बिंदु बना हुआ है।
पुलिस इस पहलू की भी गंभीरता से पड़ताल कर रही है कि आरोपी प्रवीण पाटील द्वारा संचालित कोचिंग संस्थान का सीधे तौर पर एफडीए (FDA) इंस्पेक्टर परीक्षा की पढ़ाई या पाठ्यक्रम से कोई संबंध नहीं था। इसके बावजूद उसकी आयोग के उच्च पदस्थ अधिकारियों तक सीधी पहुंच थी। इसी कारण क्राइम ब्रांच को मजबूत संदेह है कि यह नेटवर्क केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। पुलिस अब इस बिंदु पर जांच केंद्रित कर रही है कि क्या इस गिरोह ने पूर्व में भी MPSC की अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक किए थे या यह केवल ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा तक ही सीमित था।
आरोपियों की कानूनी स्थिति और क्राइम ब्रांच की पूछताछ
कानूनी कार्रवाई के तहत मुंबई पुलिस ने इस मामले में कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। दिलचस्प बात यह है कि पेपर लीक की जानकारी सार्वजनिक करने वाले गौरव पाटील को भी इस षड्यंत्र का हिस्सा मानते हुए आरोपी बनाया गया है और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं दूसरी ओर, मुख्य लाभार्थी अभ्यर्थी रितुजा पाटील को फिलहाल पुलिस द्वारा गिरफ्तार नहीं किया गया है, हालांकि उसकी भूमिका की जांच जारी है।
अदालत से 2 सितंबर तक मिली पुलिस कस्टडी के दौरान क्राइम ब्रांच के अधिकारी सभी गिरफ्तार आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस का प्राथमिक उद्देश्य यह पता लगाना है कि परीक्षा से दो दिन पहले पेपर बाहर आने के बाद वह कुल कितने अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया था, 12 लाख रुपये की कुल डील में कौन-कौन से लोग हिस्सेदार थे, और 5 लाख रुपये के प्रारंभिक ट्रांजैक्शन की राशि किन-किन खातों में स्थानांतरित की गई। क्राइम ब्रांच को उम्मीद है कि रिमांड अवधि के दौरान पूछताछ से इस भर्ती घोटाले में शामिल अन्य संभावित आरोपियों के नामों का भी खुलासा होगा।



















