जयपुर स्थित श्री सत्य साईं कॉलेज परीक्षा केंद्र पर उस समय भारी हंगामा मच गया, जब ऑल इंडिया आयुष पोस्ट ग्रेजुएट टेस्ट के दौरान अचानक बिजली गुल हो गई। ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की जा रही इस राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के शुरू होने के मात्र 15 मिनट बाद ही पूरे केंद्र में बत्ती गुल हो गई, जिससे अभ्यर्थियों की कंप्यूटर स्क्रीन अचानक बंद हो गईं और परीक्षा कक्षों में असमंजस फैल गया।
पावर बैकअप न होने से ठप पड़ा डिजिटल परीक्षा तंत्र
आयुर्वेद सहित विभिन्न आयुष चिकित्सा पद्धतियों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए की ओर से इस परीक्षा का संचालन किया जा रहा था। अभ्यर्थियों के अनुसार, परीक्षा शुरू होने के थोड़ी ही देर बाद बिजली आपूर्ति कट गई। केंद्र पर आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पावर बैकअप या जनरेटर की उचित व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण कंप्यूटर सिस्टम तुरंत दोबारा चालू नहीं हो सके और परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह से रुक गई।
बिजली जाने की इस घटना के बाद केंद्र के बाहर मौजूद अभ्यर्थियों के परिजनों में भी भारी रोष फैल गया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि परीक्षा केंद्र में बिजली व्यवस्था से जुड़ी किसी खामी या पावर सप्लायर की सर्विसिंग का काम परीक्षा के समय ही किया जा रहा था। इस तरह की गंभीर लापरवाही पर सवाल उठाते हुए परिजनों ने परीक्षा केंद्र की पूर्व-तैयारियों और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए।
अभ्यर्थियों और परिजनों ने जताया विरोध, एनटीए से की हस्तक्षेप की मांग
काफी देर तक कंप्यूटर स्क्रीन बंद रहने और बिजली आपूर्ति बहाल न होने से अभ्यर्थियों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई। अभ्यर्थियों का कहना था कि अचानक आए इस व्यवधान से उनका कीमती समय बर्बाद हुआ और परीक्षा में ध्यान केंद्रित रखना मुश्किल हो गया। परीक्षा हॉल के भीतर व्यवस्था बिगड़ने पर अभ्यर्थियों ने नाराजगी जताई, जो बाद में केंद्र परिसर में विरोध-प्रदर्शन के रूप में सामने आई।
परीक्षार्थियों और उनके परिजनों ने एनटीए तथा जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि इस घटना का त्वरित संज्ञान लिया जाए। उन्होंने प्रभावित छात्रों के हित में फैसला लेते हुए उचित समाधान निकालने की अपील की, ताकि इस अव्यवस्था का खामियाजा छात्रों के भविष्य को न भुगतना पड़े।
उल्लेखनीय है कि ऑल इंडिया आयुष पोस्ट ग्रेजुएट टेस्ट देशभर में आयुर्वेदिक और अन्य आयुष डॉक्टरों के लिए उच्च शिक्षा में प्रवेश का मुख्य माध्यम है। ऐसे में किसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में इस तरह की बुनियादी खामी का सामने आना छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रबंधन प्रणाली दोनों पर सवाल खड़े करता है।



















