राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी) 2026 के प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत के समक्ष अपनी पहली व्यापक चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए सभी 13 आरोपियों के खिलाफ दायर इस आरोप पत्र में जांच एजेंसी ने पुख्ता कानूनी आधार तैयार किया है। सीबीआई की इस चार्जशीट में कुल 360 गवाहों के बयान, 422 आधिकारिक दस्तावेज और 43 भौतिक सबूतों को शामिल किया गया है। वर्तमान में मामले में नामजद सभी 13 आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि पूरे प्रश्नपत्र लीक नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों की मदद ली गई है।
देशव्यापी छापेमारी और फॉरेंसिक जांच का दायरा
नीट यूजी 2026 परीक्षा में हुई धांधली की निष्पक्ष और तेज जांच सुनिश्चित करने के लिए सीबीआई ने अपनी विशेष टीमों का गठन किया था। इस जांच अभियान में कुल 72 अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ 8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों को शामिल किया गया। जांच टीमों ने देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक अभियान चलाते हुए महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सहित कई राज्यों में कुल 92 स्थानों पर योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की। इन छापों के दौरान सीबीआई को कई डिजिटल उपकरण, संचार साधन और गोपनीय दस्तावेज मिले। जांच एजेंसी ने बरामद सभी उपकरणों की फॉरेंसिक इमेजिंग कराई और उनका गहन तकनीकी विश्लेषण किया। इस वैज्ञानिक विश्लेषण की मदद से सीबीआई एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही हफ्तों के भीतर प्रश्नपत्र लीक के मुख्य स्रोत तक पहुंचने में सफल रही।
परीक्षा आयोजन से लेकर सीबीआई कार्रवाई तक की समयसीमा
इस पूरे मामले की शुरुआत 3 मई 2026 को हुई थी, जब देशभर में नीट यूजी 2026 की परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के आयोजन के तुरंत बाद प्रश्नपत्र लीक और बड़े पैमाने पर धांधली के गंभीर आरोप सामने आए। इसके बाद भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 12 मई 2026 को लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही सीबीआई ने उसी दिन यानी 12 मई 2026 को औपचारिक रूप से एफआईआर दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी। जांच एजेंसी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 13 मई 2026 को मामले में पहली गिरफ्तारी की। सीबीआई ने अपनी तफ्तीश में लीक के मूल स्रोत से लेकर इसका अवैध लाभ उठाने वाले अभ्यर्थियों तक की पूरी कड़ी का पर्दाफाश कर दिया।
आरोपियों का नेटवर्क: एनटीए विशेषज्ञों से लेकर कोचिंग संचालकों तक
सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े विशेषज्ञों, बिचौलियों और कोचिंग संस्थानों के पदाधिकारियों की भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया गया है। गिरफ्तार 13 आरोपियों में तीन मुख्य विषय विशेषज्ञ शामिल हैं, जिन्होंने लीक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नामजद आरोपियों का पूरा ब्योरा निम्नलिखित है
- मनीषा मंधारे: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में जीवविज्ञान विषय की विशेषज्ञ।
- प्रल्हाद विट्ठलराव कुलकर्णी: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में रसायन विज्ञान विषय के विशेषज्ञ।
- मनीषा संजय हवलदार: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में भौतिकी विषय की विशेषज्ञ।
- मनीषा संजय वाघमारे: प्रश्नपत्र आगे पहुंचाने वाली मिडिलपर्सन।
- धनंजय निवृत्ति लोखंडे: धांधली नेटवर्क का बिचौलिया।
- शुभम् मधुकर खैरनार: नेटवर्क से जुड़ा बिचौलिया।
- यश यादव: अवैध वितरण में शामिल बिचौलिया।
- मांगीलाल बिवाल: लीक प्रश्नपत्रों का कारोबार करने वाला बिचौलिया।
- विकाश बिवाल: गिरोह का बिचौलिया।
- दिनेश बिवाल: धांधली में शामिल बिचौलिया।
- डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे: नेटवर्क का बिचौलिया।
- शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर: लातूर स्थित आरसीसी कोचिंग इंस्टीट्यूट के मालिक।
- तेजस हर्षदकुमार शाह: पुणे स्थित एपीएमए कोचिंग इंस्टीट्यूट के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) और भौतिकी शिक्षक।
सीबीआई की जांच में यह साफ हुआ कि बिचौलियों ने विषय विशेषज्ञों से लीक प्रश्नपत्र हासिल किए और फिर उन्हें कोचिंग संस्थानों के संचालकों व अन्य लोगों के जरिए अभ्यर्थियों तक वितरित किया।
वित्तीय लेन-देन, फ्रीज संपत्तियां और कठोर कानूनी धाराएं
मामले में वित्तीय अनियमितताओं की जांच करते हुए सीबीआई की वित्तीय शाखा ने पैसों के लेन-देन की भी पूरी पड़ताल की। इस दौरान जांच एजेंसी ने आरोपियों के कई बैंक खातों, बैंक लॉकरों और 1 डीमैट खाते को फ्रीज कर दिया है। इसके अलावा, तकनीकी सबूतों को मजबूत करने के लिए डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, हस्तलेखन विशेषज्ञों की वैज्ञानिक राय और अकादमिक विशेषज्ञों की विस्तृत रिपोर्ट हासिल की गई। इन सभी रिपोर्टों से यह प्रमाणित हुआ है कि आरोपियों ने परीक्षा की निर्धारित तिथि 3 मई 2026 से पहले ही प्रश्नपत्रों को अवैध रूप से लीक और प्रसारित कर दिया था।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और सबूत नष्ट करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक कदाचार और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की प्रासंगिक धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं। सीबीआई का कहना है कि फॉरेंसिक विश्लेषण और आगे की जांच प्रक्रिया जारी है, ताकि इस अपराध में शामिल प्रत्येक दोषी को कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।



















