विदेश में बसे भारतीय मूल के परिवारों में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या उनके बच्चे कभी लाल बत्ती की गाड़ी वाली नौकरशाही का हिस्सा बन सकते हैं. जवाब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति एनआरआई है या ओसीआई कार्ड धारक, क्योंकि आम बोलचाल में दोनों शब्द एक जैसे लगते हैं, लेकिन कानून की नजर में इनमें जमीन-आसमान का फर्क है. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के नियमों में यही फर्क बहुत साफ नजर आता है.
नागरिकता का पेच, एनआरआई और ओसीआई में असली फर्क कहां है
भारतीय संविधान सरकारी नौकरियों यानी लोक नियोजन में समान अवसर का अधिकार केवल भारत के नागरिकों को देता है. यही सिद्धांत तय करता है कि संघ लोक सेवा आयोग ने एनआरआई और ओसीआई कार्ड धारकों के लिए अलग-अलग नियम क्यों बनाए हैं. एनआरआई यानी नॉन-रेजिडेंट इंडियन का मतलब है ऐसा भारतीय नागरिक, जो नौकरी, पढ़ाई या कारोबार के सिलसिले में विदेश में बसा है, लेकिन उसके पास भारत का पासपोर्ट होता है और कानूनी तौर पर वह भारत का नागरिक ही बना रहता है. वहीं ओसीआई यानी ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड धारक तकनीकी रूप से किसी और देश, जैसे अमेरिका, ब्रिटेन या कनाडा के नागरिक होते हैं. उनकी जड़ें या पारिवारिक रिश्ता भले भारत से जुड़ा हो, लेकिन पासपोर्ट विदेशी होता है. उन्हें भारत में जीवनभर रहने और काम करने का वीजा जरूर मिलता है, मगर इससे उनकी नागरिकता नहीं बदलती.
एनआरआई के लिए यूपीएससी का दरवाजा पूरी तरह खुला
चूंकि एनआरआई सिर्फ विदेश में बसे भारतीय नागरिक होते हैं और उनके पास भारतीय पासपोर्ट होता है, इसलिए उन्हें यूपीएससी की 20 से ज्यादा सेवाओं, यानी आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, आईआरएस समेत हर सेवा के लिए पूरी तरह पात्र माना जाता है. लेकिन इस पात्रता का मतलब यह नहीं कि उन्हें परीक्षा में कोई ढील मिलती है. उनके लिए न तो अलग से कोई एनआरआई कोटा तय है और न सीटों में कोई आरक्षण, यानी उन्हें आम भारतीय अभ्यर्थियों जैसी ही परीक्षा प्रक्रिया, सिलेबस और कट-ऑफ से गुजरना पड़ता है. एक और जरूरी बात यह है कि यूपीएससी प्रीलिम्स, मेन्स या इंटरव्यू के लिए विदेश में कोई परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाता, इसलिए परीक्षा में बैठने के लिए एनआरआई उम्मीदवारों को हर हाल में भारत आना पड़ता है, चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न रहते हों. जिन एनआरआई उम्मीदवारों ने अपनी ग्रेजुएशन विदेश की किसी यूनिवर्सिटी से पूरी की है, उनके लिए फॉर्म भरने से पहले एक और औपचारिकता जरूरी है, उन्हें एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज यानी एआईयू से अपनी डिग्री का समकक्षता प्रमाणपत्र लेना ही होगा, तभी उनका आवेदन वैध माना जाएगा. यह प्रमाणपत्र समय लेने वाली प्रक्रिया है, इसलिए इसे आखिरी वक्त पर छोड़ना नुकसानदेह हो सकता है.
ओसीआई कार्ड धारकों के लिए आईएएस, आईपीएस और आईएफएस पर ताला
ओसीआई कार्ड धारकों की स्थिति एनआरआई से बिल्कुल अलग है. नियमों के मुताबिक भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय विदेश सेवा के लिए उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना अनिवार्य शर्त है. चूंकि ओसीआई कार्ड धारक कानूनी तौर पर किसी और देश के नागरिक होते हैं और विदेशी पासपोर्ट रखते हैं, इसलिए वे इन तीनों प्रमुख और सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए आवेदन ही नहीं कर सकते, चाहे वे भारत में जितने साल रह चुके हों. उन्हें भारत में रहने और काम करने की पूरी छूट जरूर मिलती है और उनका वीजा भी जीवनभर के लिए वैध रहता है, लेकिन इसके बदले उन्हें वोट देने या किसी भी सरकारी पद पर बैठने का संवैधानिक अधिकार नहीं मिलता. हां, वार्षिक यूपीएससी नोटिफिकेशन के कुछ खास प्रावधानों के तहत चुनिंदा टेक्निकल या ग्रुप ए पदों पर ओसीआई कार्ड धारकों को सीमित छूट या मौका दिया जा सकता है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र की मुख्यधारा वाली सेवाएं उनके लिए पूरी तरह बंद ही रहती हैं.
अगर ओसीआई कार्ड धारक आईएएस बनना चाहे तो रास्ता क्या है
ओसीआई कार्ड धारकों के लिए यह रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है, बस उन्हें एक बड़ी और अहम शर्त पूरी करनी होती है, उन्हें अपनी विदेशी नागरिकता छोड़कर दोबारा भारतीय नागरिकता हासिल करनी होगी. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत इसका एक तय फॉर्मूला है, जिसे आसान भाषा में 5+1 साल का नियम कहा जा सकता है. इसके मुताबिक कोई व्यक्ति अगर लगातार 5 साल तक ओसीआई कार्ड धारक रहा हो और आवेदन करने से ठीक पहले लगातार 1 साल भारत में रहा हो, तभी वह भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है. एक बार नागरिकता मिल जाने पर उस व्यक्ति की कानूनी स्थिति पूरी तरह बदल जाती है, विदेशी पासपोर्ट का झंझट खत्म हो जाता है और वह भी बाकी सभी भारतीय नागरिकों की तरह यूपीएससी की सभी सेवाओं के लिए 100% पात्र हो जाता है. यानी आईएएस बनने का सपना ओसीआई कार्ड धारकों के लिए भी पूरी तरह असंभव नहीं है, बस उसके लिए नागरिकता की यह लंबी प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी है.



















