पटना की सड़कों पर पिछले कई दिनों से जारी छात्र आंदोलन का अंत हो गया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए घोषणा की है कि आगामी TRE-4 शिक्षक भर्ती परीक्षा अब प्रारंभिक (PT) और मुख्य (Mains) दो अलग-अलग चरणों के बजाय केवल एक ही चरण में आयोजित की जाएगी। पटना में मुख्यमंत्री आवास के घेराव के प्रयास और व्यापक प्रदर्शनों के बाद राज्य सरकार तथा छात्र प्रतिनिधि मंडल के अधिकारियों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में सहमति बनी। इस बैठक में अभ्यर्थियों द्वारा सौंपे गए मांग पत्र पर बिंदुवार चर्चा की गई, जिसके बाद 10 महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सहमति बनने के तुरंत बाद छात्र प्रतिनिधि मंडल ने सर्वसम्मति से अपना आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया।
एकल चरण परीक्षा और 30 दिनों में शिकायत समाधान की व्यवस्था
राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार शुरू से ही अभ्यर्थियों के हितों को लेकर पूरी तरह गंभीर रही है। TRE-4 परीक्षा को एकल चरण में कराने के साथ-साथ अभ्यर्थियों के लिए एक अभ्यर्थी, एक परिणाम के सिद्धांत पर नियमानुसार अग्रेतर कार्रवाई करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा, छात्रों को अपनी शिकायतों और प्रशासनिक समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़े, इसके लिए दो प्रमुख व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। सरकार ने विद्यार्थी सहयोग पोर्टल और विद्यार्थी सहयोग शिविर की शुरुआत की है, जिसके माध्यम से अभ्यर्थियों की किसी भी समस्या का निपटारा अधिकतम 30 दिनों की समय सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से किया जा रहा है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए बिहार सरकार ने एक दूरगामी कदम उठाते हुए परीक्षा सुधार पर एक विशेषज्ञ समिति के गठन का निर्णय लिया है। इस उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता पटना उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश करेंगे। यह न्यायिक समिति राज्य में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के संबंध में अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और शिकायतों की सुनवाई करेगी तथा सुधार हेतु अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी।
दरोगा भर्ती पर रोक, BPSC जांच और BSSC कैलेंडर का निर्देश
बैठक में अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत मांग पत्र के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। 70वीं BPSC परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों की जांच इस न्यायिक समिति द्वारा कराए जाने पर सहमति बनी है। इसके अतिरिक्त, बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) द्वारा आयोजित 1799 दरोगा बहाली परीक्षा की निष्पक्ष जांच के लिए मामला विशेषज्ञ समिति के समक्ष रखा जाएगा। सरकार ने निर्णय लिया है कि जब तक यह समिति अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट नहीं दे देती, तब तक 1799 दरोगा बहाली की आगे की पूरी चयन प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा।
आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार लाते हुए बिहार कर्मचारी चयन आयोग को यह सख्त निर्देश दिया गया है कि वह राज्य की तमाम भर्ती परीक्षाओं का एक आधिकारिक कैलेंडर यथाशीघ्र जारी करे और निर्धारित समय सीमा के भीतर परीक्षाओं का सफल आयोजन सुनिश्चित करे। साथ ही, सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) भर्ती प्रक्रिया शुरू करने से पूर्व बिहार पात्रता परीक्षा (B.E.T.) का आयोजन करने की मांग पर भी अभ्यर्थियों का पक्ष न्यायिक समिति के समक्ष रखा जाएगा और समिति के निर्णयानुसार आगे की कार्रवाई होगी।
पुस्तकालयाध्यक्ष बहाली, डोमिसाइल नीति और उम्र सीमा पर फैसले
राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में लंबे समय से लंबित पुस्तकालयाध्यक्षों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। रिक्ति के विवरण के अनुरूप शीघ्र ही नई बहाली प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, बिहार की सभी सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में अधिकतम डोमिसाइल नीति लागू करने की अभ्यर्थियों की मांग पर भी कानूनी राय ली गई है। सरकार ने न्यायविदों से प्राप्त परामर्श के आधार पर नियमानुकूल आगे की प्रक्रिया करने का निर्णय लिया है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम उम्र सीमा के संबंध में प्रस्ताव को भी विशेषज्ञ समिति के विचारार्थ रखा जाएगा। संविदा कर्मियों को दी जाने वाली अंकों की वेटेज और उनके लिए अलग कोटा निर्धारित करने के मुद्दे पर सरकार ने एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाने का फैसला किया है। यह कमेटी सरकारी प्रावधानों के आलोक में समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिससे सामान्य अभ्यर्थियों और संविदा कर्मियों दोनों के हितों का संतुलन बनाया जा सके।
पेपर लीक की EOU जांच और पुराना प्रशासनिक पत्र निरस्त
भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि BPSC द्वारा आयोजित AEDO (सहायक कार्यकारी जिला अधिकारी) और सैनिटरी ऑफिसर परीक्षा के पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच आर्थिक अपराध इकाई (E.O.U.) द्वारा नियमानुसार की जा रही है। इसके साथ ही, BPSC की तर्ज पर राज्य की अन्य सभी भर्ती परीक्षाओं में प्रश्न पत्र, ओएमआर शीट और उत्तरपुस्तिका की पारदर्शिता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कराने का प्रस्ताव हाई कोर्ट के जज की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष लाया जाएगा।
बैठक के अंत में अभ्यर्थियों के साथ बनी सर्वसम्मत सहमति के बाद राज्य सरकार ने विभागीय पत्रांक-162/गो. दिनांक 24.08.2026 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया। सरकार ने दोहराया कि राज्य में सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह बनाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार सदैव प्रतिबद्ध है।



















