भागलपुर का नाम सुनते ही सबसे पहले सिल्क का ख्याल आता है। सिल्क का यह शहर एक बार फिर सुर्खियों में है क्योंकि यहां अब साउथ भारत की मशहूर कांजीवरम साड़ी भी बन रही है, वो भी बहुत ही किफायती दाम पर। इसकी वजह से भागलपुर की साड़ियों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है।
तसर से मलबरी तक, हर तरह का सिल्क
भागलपुर की पहचान सिर्फ भारत में नहीं बल्कि विदेशों तक फैली है। यहां के कारीगर तसर सिल्क, मलबरी सिल्क समेत कई तरह के रेशमी कपड़े बनाते हैं। इन कपड़ों पर खूबसूरत और अलग-अलग तरह की डिजाइन उकेरी जाती हैं, जो ग्राहकों को खूब पसंद आती हैं। अब इसी फेहरिस्त में साउथ की कांजीवरम डिजाइन भी जुड़ गई है।
लाखों वाली साड़ी अब हजारों में
बुनकर और व्यापारी संजीव कुमार के मुताबिक कांजीवरम डिजाइन साउथ भारत में बेहद मशहूर है और वहां इसकी कीमत 40,000 रुपये से लेकर लाखों रुपये तक जाती है। भागलपुर में यही डिजाइन अधिकतम 17,000 रुपये में मिल जाती है। इतनी बड़ी कीमत के फर्क की वजह साउथ और भागलपुर के धागे में अंतर है। भागलपुर का धागा अलग किस्म का होता है, जिससे लागत घट जाती है और साड़ी की कीमत भी काफी कम हो जाती है। कांजीवरम डिजाइन सिल्क पर ही तैयार होती है और देखने में बेहद आकर्षक लगती है।
कांजीवरम डिजाइन किस सिल्क पर बनती है
कांजीवरम डिजाइन मुख्य रूप से मलबरी सिल्क पर तैयार की जाती है। मलबरी सिल्क खुद अपने आप में एक मशहूर और पसंदीदा फैब्रिक है, जो देखने में बेहद खूबसूरत लगता है। भागलपुर में कांजीवरम डिजाइन की साड़ियां 7,000 रुपये से लेकर 17,000 रुपये तक की रेंज में मिल जाती हैं।
हाथ से बनती है, इसलिए खास है
इस डिजाइन को हाथ से तैयार किया जाता है, जो इसे बाकी साड़ियों से अलग और खास बनाता है। हाथ से बुनाई की वजह से पहनने पर एक बेहद मुलायम एहसास मिलता है। यही वजह है कि यह साड़ी सिर्फ पार्टी या फंक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा के आने-जाने में भी पहनी जा सकती है। एक साड़ी को पूरी तरह तैयार करने में लगभग एक हफ्ते का समय लगता है और इसमें सबसे ज्यादा खर्च लेबर यानी बुनाई की मेहनत पर ही आता है, यही वजह है कि इसकी कीमत आम साड़ियों से थोड़ी ज्यादा होती है।











