वैदिक पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन पर्व समाप्त होने के 6 से 7 दिनों के भीतर भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का पावन पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में मथुरा की नगरी में कंस के कारागार में माता देवकी की आठवीं संतान के रूप में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया था। श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि यानी रात 12 बजे हुआ था, इसी कारण इस त्योहार में रात के समय बाल गोपाल का पूजन विशेष फलदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में भाद्रपद कृष्ण जन्माष्टमी की सही तिथि, रोहिणी नक्षत्र, निशिता काल पूजा मुहूर्त और दिन भर के चौघड़िया मुहूर्त की संपूर्ण जानकारी प्रस्तुत है।
जन्माष्टमी 2026 तिथि और रोहिणी नक्षत्र का समय
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन व्रत और पूजन 4 सितंबर 2026, शुक्रवार के दिन रखा जाएगा। पंचांग की गणना के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 को तड़के 02:25 AM से शुरू हो जाएगी। अष्टमी तिथि का समापन 5 सितंबर 2026 को मध्यरात्रि 12:13 AM पर होगा।
जन्माष्टमी के पर्व में रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2026 में रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर को तड़के 12:29 AM से प्रारंभ होगा और 4 सितंबर की रात 11:04 PM तक रहेगा। श्रद्धालु इस अवधि में उपवास रखकर कान्हा के जन्म की प्रतीक्षा करते हैं।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का सबसे शुभ पूजा मुहूर्त
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रात्रि के 12 बजे हुआ था, इस कारण निशिता काल में पूजा का समय सर्वाधिक उत्तम और फलदायी माना जाता है। 4 सितंबर 2026 की रात को बाल गोपाल के पूजन का सबसे शुभ निशिता काल मुहूर्त रात 11:57 PM से आरंभ होकर देर रात 12:43 AM (5 सितंबर) तक रहेगा। श्रद्धालुओं को रात की मुख्य पूजा संपन्न करने के लिए कुल 46 मिनट की अवधि मिलेगी।
जन्माष्टमी के व्रत का पारण 5 सितंबर 2026 को सूर्योदय के पश्चात सुबह 06:01 AM के बाद किया जाना शास्त्रसम्मत और शुभ रहेगा।
4 सितंबर 2026 को दिन और रात का चौघड़िया मुहूर्त
जन्माष्टमी के दिन पूजा की तैयारी, खरीदारी और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए चौघड़िया मुहूर्त का विचार भी किया जाता है। 4 सितंबर को दिन और रात के शुभ चौघड़िया समय इस प्रकार रहेंगे
- चर (सामान्य): सुबह 06:00 AM से सुबह 07:35 AM तक
- लाभ (उन्नति): सुबह 07:35 AM से सुबह 09:10 AM तक
- अमृत (सर्वोत्तम): सुबह 09:10 AM से सुबह 10:45 AM तक
- शुभ (उत्तम): दोपहर 12:20 PM से दोपहर 01:55 PM तक
- चर (सामान्य): शाम 05:05 PM से शाम 06:39 PM तक
- लाभ (उन्नति): रात 09:30 PM से रात 10:55 PM तक
- शुभ (उत्तम): रात 12:20 AM से देर रात 01:45 AM (5 सितंबर) तक
जन्माष्टमी की संपूर्ण पूजन विधि और भोग
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर श्रद्धालु पूरे दिन निर्जला या फलाहारी व्रत रखते हैं। मुख्य पूजा मध्यरात्रि में होने के कारण रात 12 बजे से पहले ही पूजा स्थल की सजावट और भोग सामग्री तैयार कर ली जाती है। रात 12 बजे ठीक जन्म के समय बाल गोपाल की मूर्ति का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर) से अभिषेक किया जाता है।
अभिषेक के बाद भगवान को सुंदर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और उनका भव्य शृंगार किया जाता है। पूजन सामग्री में मोरपंख, बांसुरी और तुलसी दल अवश्य अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद कान्हा की प्रतिमा को झूले में विराजमान कराकर प्रेमपूर्वक झूला झुलाया जाता है। भगवान को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और खीर का भोग अर्पित करने के बाद धूप-दीप से आरती उतारी जाती है। पूजा संपन्न होने पर कई भक्त रात में ही प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलते हैं, जबकि कई श्रद्धालु अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करते हैं।



















