करवा चौथ का व्रत सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, निरोगी काया और सुखमय दांपत्य जीवन के लिए दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं। शाम के समय भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता का विधि-विधान से पूजन किया जाता है। इसके पश्चात आकाश में चंद्रमा का दर्शन करके अर्घ्य अर्पित करने और फिर व्रत का पारण करने की सुदृढ़ परंपरा है। अर्घ्य अर्पण के समय विशेष मंत्रों का उच्चारण करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
माता पार्वती की पूजा में जपें यह सिद्ध मंत्र
करवा चौथ के दिन माता पार्वती का पूजन करना सौभाग्य की प्राप्ति के लिए अनिवार्य माना गया है। शास्त्रों में देवी पार्वती को अखंड सौभाग्यदायिनी और सुखी गृहस्थ जीवन की अधिष्ठात्री माना गया है। 29 अक्टूबर को मनाए जाने वाले इस पावन पर्व पर पूजन के समय माता पार्वती के विशेष मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी रहता है।
मंत्र: सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥
इस मंत्र का भावार्थ यह है कि हे देवी गौरी, आप संसार के समस्त मंगल कार्यों की आधारशिला हैं और अपने भक्तों की सभी शुभ मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं। शरण में आए हुए प्राणियों की रक्षा करने वाली मां नारायणी, मैं आपको बारंबार प्रणाम करती हूं। मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ की संध्या पूजा के समय इस मंत्र का कम से कम 11 बार जाप करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है और पति को दीर्घायु का वरदान मिलता है।
चंद्रदेव को अर्घ्य देते समय इन मंत्रों का करें उच्चारण
करवा चौथ के उपवास की पूर्णता चंद्र दर्शन और उन्हें जल अर्पित करने के पश्चात ही होती है। छलनी से चंद्रमा को देखने के बाद अर्घ्य देते समय चंद्रदेव के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान महिलाएं मुख्य रूप से दो प्रभावशाली मंत्रों का जाप कर सकती हैं।
पहला मंत्र: ॐ सोम सोमाय नमः।
दूसरा मंत्र: ॐ चंद्राय नमः।
धार्मिक परंपरा के अनुसार जल की धारा प्रवाहित करते हुए इनमें से किसी भी एक या दोनों मंत्रों का 11 बार जाप करना चाहिए। अर्घ्य देने के तुरंत बाद हाथ जोड़कर चंद्रदेव का ध्यान करें और अपने पति की लंबी उम्र, उनके बेहतर स्वास्थ्य तथा समस्त परिवार में सुख और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
अर्घ्य अर्पण के समय ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें
चंद्रदेव को जल अर्पित करते समय मन की पवित्रता और श्रद्धा भाव का होना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। अर्घ्य देते वक्त ध्यान को पूरी तरह से पूजा में केंद्रित रखना चाहिए। देश के अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों के रीति-रिवाजों के अनुसार पूजन पद्धतियों में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन चंद्रदेव और मां पार्वती के प्रति अटूट आस्था ही इस व्रत का मूल आधार है। इस पावन अवसर पर निष्ठापूर्वक पूजन करने से वैवाहिक जीवन के समस्त संकट दूर होते हैं।



















