रजनीकांत की 'धर्मन' में हुई नयनतारा की एंट्री, पांच साल बाद दोनों कलाकार आएंगे साथ नजरपाकिस्तान क्रिकेट टीम में बड़ा बदलाव, फॉर्म से जूझ रहे सैम अयूब बाहर और साहिबजादा फरहान की एंट्रीबॉलीवुड दिवाली पार्टी शेड्यूल: अक्षय से मनीष मल्होत्रा तक के घर सजेगी महफिल, सुरक्षा और पैपराजी पर सख्त नियमरणबीर कपूर की 'रामायण' रिव्यू (2026): कास्ट, बजट, रनटाइम और रिलीज से जुड़ी पूरी जानकारीकौन होणार करोड़पति में सचिन पिलगांवकर ने सुनाया किस्सा, साड़ी में देखकर सास भी खा गई थीं गच्चाअसिन और राहुल शर्मा की बेटी अरिन सात साल की उम्र में बोलती हैं 12 भाषाएं, घर में टीवी और मोबाइल का उपयोग वर्जितशिल्पा राव का असली नाम क्या था? जानिए इस मशहूर गायिका के शुरुआती संघर्ष से लेकर ग्रैमी और नेशनल अवॉर्ड तक का सफरसाई पल्लवी का जलवा, धनुष के साथ 'ओम' में खाकी वर्दी में दिखेंगी एक्ट्रेसजेलर 2 रिव्यू (2026): रजनीकांत की फिल्म ने हिलाया बॉक्स ऑफिस, हनुमान अंश और दृश्यम 3 को तगड़ा झटकाआईपीएल 2027 की मिनी नीलामी की तारीख आई सामने, जानिए कब और कहां सजेगा खिलाड़ियों का बाजार
बेसन और दही की पारंपरिक कढ़ी में जब मिले खुशबूदार छौंक, तब तैयार होता है लाजवाब स्वादखानपान
20 सित॰ 2026, 6:20 am (40 दिन पहले)· 1

बेसन और दही की पारंपरिक कढ़ी में जब मिले खुशबूदार छौंक, तब तैयार होता है लाजवाब स्वाद

दही और बेसन के मेल से बनने वाली पारंपरिक कढ़ी का असली राज मसालों के सटीक छौंक, धीमी आंच पर देर तक पकाने और नरम पकौड़ों में छिपा है।

भारतीय रसोई में दही और बेसन से बनने वाली खट्टी-नमकीन कढ़ी का स्थान बेहद खास माना जाता है। सादे चावल या गरमागरम रोटी के साथ परोसी जाने वाली कढ़ी का ज़ायका तब कई गुना बढ़ जाता है, जब इसमें कुरकुरे और रसदार पकौड़े घुलते हैं। किसी भी आम ग्रेवी की तुलना में एक बेहतरीन कढ़ी पकाना थोड़ा अलग हुनर मांगता है, क्योंकि केवल सामग्री मिला देना ही पर्याप्त नहीं होता। तेल में मसालों का संतुलित तड़का, कड़ाही में घोल को लगातार चलाना और लंबे समय तक धीमी आंच पर खदकाना ही इसे असली खुशबू और गाढ़ापन देता है। पारंपरिक अंदाज में इस खास व्यंजन को तैयार करने की पूरी तकनीक बेहद व्यवस्थित होती है।

प्याज और मसालों के साथ ऐसे बनाएं पकौड़ों का मिश्रण

कढ़ी के सफर की शुरुआत सबसे पहले उसके पकौड़ों की तैयारी से होती है। दिल्ली के वसुंधरा क्षेत्र की निवासी सुषमा तिवारी के अनुसार, कढ़ी में डाले जाने वाले पकौड़ों का घोल तैयार करना बेहद सरल है। इसके लिए एक बड़े बर्तन में बेसन लिया जाता है और उसमें बारीक कटा हुआ प्याज मिलाया जाता है। इसके बाद मिश्रण में स्वादानुसार नमक और रंगत के लिए हल्दी पाउडर शामिल किया जाता है।

ये भी पढ़ें

पकौड़ों को जायकेदार बनाने के लिए इसमें बारीक कटा लहसुन, तीखी हरी मिर्च और कद्दूकस किया हुआ अदरक भी डाला जाता है। अतिरिक्त स्वाद निखारने के लिए जरूरत के मुताबिक अन्य पिसे मसाले भी जोड़े जाते हैं। पानी की सही मात्रा के साथ इन सभी सामग्रियों को एकसार मिलाकर एक चिकना घोल तैयार कर लिया जाता है। इसी तैयार मिश्रण को गर्म तेल में तलकर सुनहरे और कुरकुरे पकौड़े बना लिए जाते हैं, जिन्हें कढ़ी पकने के बाद उसमें मिलाया जाना होता है।

दही और बेसन के घोल की सटीक तैयारी

पकौड़ों का मिश्रण तैयार होने के बाद मुख्य कढ़ी की ग्रेवी बनाने की बारी आती है। इसके लिए खट्टे दही और बेसन को एक साथ मिलाकर अच्छी तरह फेंटा जाता है। इस चरण पर सबसे महत्वपूर्ण बात यह सुनिश्चित करना है कि पूरे घोल में बेसन की एक भी गांठ या गुठली न बचे। जब दही और बेसन पूरी तरह एकसार हो जाएं, तब इसमें आवश्यकतानुसार पानी मिलाया जाता है। पानी की सही मात्रा इसलिए जरूरी है ताकि कढ़ी शुरुआत में ही बहुत अधिक गाढ़ी न हो जाए और पकने के दौरान उसका संतुलन बना रहे।

मेथी, हींग और कढ़ी पत्ते का तड़का

कढ़ी का वास्तविक आकर्षण उसके तड़के की महक में छिपा होता है। इसके लिए कड़ाही में तेल डालकर उसे अच्छी तरह गर्म किया जाता है। तेल के पर्याप्त गर्म होते ही उसमें हींग, साबुत जीरा और मेथी दाना डाला जाता है, जिससे तेल में इन मसालों का अर्क समा जाता है।

इसके तुरंत बाद कड़ाही में लाल मिर्च पाउडर और ताजा करी पत्ता डाला जाता है। जब ये मसाले तेल में भुनकर चटकने लगें और अपनी सुगंध छोड़ने लगें, तब आंच का ध्यान रखते हुए इसमें पहले से तैयार किया गया दही और बेसन का पतला घोल डाल दिया जाता है।

लगातार चलाने की तकनीक और उबाल

कड़ाही में घोल डालते ही उसे कड़छी से लगातार चलाते रहना सबसे अनिवार्य नियम है। यदि घोल को बिना चलाए छोड़ दिया जाए, तो बेसन तुरंत कड़ाही के तले में बैठ जाता है, जिससे कढ़ी नीचे से जल सकती है, जम सकती है और पूरी कढ़ी की बनावट तथा स्वाद दोनों बिगड़ जाते हैं।

कढ़ी को तब तक बिना रुके लगातार चलाया जाता है, जब तक कि उसमें पहला जोरदार उबाल न आ जाए। यदि इस दौरान मिश्रण जरूरत से ज्यादा गाढ़ा महसूस होने लगे, तो थोड़ा अतिरिक्त पानी मिलाया जा सकता है। जैसे ही कढ़ी में उबाल आ जाता है, गैस की आंच को धीमा कर दिया जाता है ताकि वह आराम से पक सके।

धीमी आंच पर आधे घंटे की पकाई और पकौड़ों का मेल

उबाल आने के बाद कढ़ी को करीब आधे घंटे तक मंद आंच पर लगातार खदकने दिया जाता है। पकाने का यह समय बेहद अहम होता है, क्योंकि इसी दौरान दही का खट्टापन, बेसन का सोंधापन और तड़के के मसालों का स्वाद आपस में पूरी तरह रच-बस जाते हैं। कढ़ी जितनी देर धीमी आंच पर पकती है, उसका स्वाद उतना ही गहरा और संतुलित होता चला जाता है।

लगभग तीस मिनट तक पकने के बाद, जब कढ़ी का सही गाढ़ापन आ जाए, तब इसमें पहले से तले हुए पकौड़े डाल दिए जाते हैं। पकौड़े डालने के बाद कड़ाही को ढक्कन से ढक दिया जाता है और करीब 10 से 15 मिनट तक और पकने दिया जाता है। इस धीमी भाप और आंच में पकौड़े कढ़ी की तरी को अंदर तक सोख लेते हैं, जिससे वे एकदम मुलायम और रसीले बन जाते हैं।

सवाल-जवाब

कढ़ी बनाने के लिए मुख्य रूप से किन सामग्रियों का उपयोग होता है?
कढ़ी बनाने के लिए दही, बेसन, पानी, तेल, प्याज, अदरक, लहसुन, हरी मिर्च, नमक, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, हींग, जीरा, मेथी दाना और करी पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है।
कढ़ी के पकौड़ों का घोल कैसे तैयार किया जाता है?
बेसन में बारीक कटा प्याज, नमक, हल्दी, लहसुन, हरी मिर्च, अदरक और अन्य मसाले मिलाकर पानी के साथ पकौड़ों का घोल तैयार किया जाता है।
कढ़ी के तड़के में कौन से साबुत मसाले डाले जाते हैं?
तड़के के लिए गर्म तेल में हींग, जीरा और मेथी दाना डाला जाता है, जिसके बाद लाल मिर्च पाउडर और करी पत्ता मिलाया जाता है।
घोल डालने के बाद कढ़ी को लगातार चलाना क्यों जरूरी होता है?
लगातार न चलाने पर बेसन कड़ाही के तले में बैठ सकता है, जिससे कढ़ी जल सकती है और उसका स्वाद तथा टेक्सचर बिगड़ सकता है।
कढ़ी को कितनी देर तक धीमी आंच पर पकाया जाता है?
उबाल आने के बाद कढ़ी को धीमी आंच पर करीब आधे घंटे तक अच्छी तरह पकने दिया जाता है।
कढ़ी में पकौड़े कब डाले जाते हैं और उसके बाद कितनी देर पकाना चाहिए?
कढ़ी के अच्छी तरह पक जाने पर पकौड़े डाले जाते हैं और फिर कड़ाही को ढककर 10 से 15 मिनट तक पकाया जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·39 दिन पहले

एक पारंपरिक रेसिपी पर केंद्रित यह आलेख जीवनशैली और खान-पान आधारित कंटेंट सेगमेंट की बदलती प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल चैनलों पर फ़ूड-बेस्ड रियलिटी शो और कुकिंग डॉक्यूसीरीज की बढ़ती लोकप्रियता यह दर्शाती है कि दर्शक अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पारंपरिक पाक कला की प्रामाणिक और विस्तृत प्रक्रिया से जुड़ना चाहते हैं। यह रुझान बताता है कि भविष्य में क्षेत्रीय व्यंजनों और पारंपरिक खान-पान की कहानियों को डिजिटल मीडिया में एक विशेष दर्शक वर्ग मिलेगा।

Neha Verma@neha-verma·39 दिन पहले

खान-पान और लाइफस्टाइल अब एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं, जहाँ पारंपरिक व्यंजन जैसे कढ़ी की विस्तृत रेसिपी केवल रसोई तक सीमित न रहकर आधुनिक जीवनशैली की प्राथमिकताओं का हिस्सा बन रही है। डिजिटल स्पेस में जिस तरह से प्रामाणिक और पारंपरिक व्यंजनों को स्टेप-बाय-स्टेप पेश किया जा रहा है, वह स्पष्ट करता है कि दर्शक अब अपने खान-पान की जड़ों से जुड़ना पसंद कर रहे हैं। यह बदलाव भोजन को केवल स्वाद या आवश्यकता नहीं, बल्कि एक संपूर्ण लाइफस्टाइल अनुभव के रूप में स्थापित कर रहा है, जो भविष्य में डिजिटल और प्रिंट दोनों प्लेटफॉर्म्स पर वेलनेस और होम-कुकिंग कंटेंट को एक नया आयाम देगा।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp