करवा चौथ के व्रत में पूजा की थाली और करवा माता को समर्पित किए जाने वाले विशेष पकवानों में चावल के फरे का विशेष महत्व माना गया है। कई क्षेत्रों में सुहागिन महिलाएं इस पारंपरिक व्यंजन को श्रद्धापूर्वक बनाकर देवी को प्रसाद स्वरूप अर्पित करती हैं। यदि इस पावन त्योहार पर समय की कमी के बीच आप कुछ पारंपरिक, सात्विक और स्वादिष्ट बनाने का विचार कर रही हैं, तो उबले पानी में गुंथे चावल के आटे और भीगी दालों के मेल से फरा तैयार करना एक बेहतरीन विकल्प साबित होता है।
व्यंजन के लिए आवश्यक सभी सामग्री की सूची
इस व्यंजन को स्वादिष्ट और सटीक रूप से बनाने के लिए दोनों मुख्य घटकों यानी बाहरी परत और अंदर की भरावन की सही मात्रा होना जरूरी है। बाहरी खोल तैयार करने के लिए एक कप चावल का आटा, एक कप पानी, दो छोटे चम्मच देसी घी और चुटकी भर नमक की जरूरत होगी। बाद में आटा गूंथते समय लगभग तीन से चार छोटे चम्मच अतिरिक्त पानी की आवश्यकता पड़ सकती है।
भीतरी भरावन यानी स्टफिंग के लिए आधा कप चना दाल और आधा कप उड़द दाल लें। इसके साथ ही तीन से चार हरी मिर्च, एक छोटा चम्मच अदरक का पेस्ट, आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, एक छोटा चम्मच धनिया पाउडर, दो चम्मच बारीक कटी ताजी हरी धनिया पत्ती और स्वादानुसार नमक लें। इसके अलावा तड़के या ग्रीसिंग के लिए आधा छोटा चम्मच जीरा, आधा छोटा चम्मच राई, एक बड़ा चम्मच देसी घी और एक बड़ा चम्मच कुकिंग तेल भी साथ रखें।
चावल का नरम आटा गूंथने की खास विधि
फरा बनाने की सबसे महत्वपूर्ण शुरुआत उसके बाहरी आवरण से होती है, जिसके लिए आटा एकदम लचीला और बिना दरारों वाला होना चाहिए। सबसे पहले एक गहरे बर्तन में एक कप पानी डालकर गर्म करें। इसी पानी में दो छोटे चम्मच शुद्ध घी और थोड़ा सा नमक मिला दें। जैसे ही पानी में उबाल आने लगे, तुरंत चूल्हा बंद कर दें। अब इस गर्म पानी में एक कप चावल का आटा डालकर किसी चम्मच की मदद से अच्छी तरह मिला लें।
जब आटा और पानी एकसार हो जाएं, तो बर्तन को ढक्कन से ढककर कुछ देर भाप में रहने दें। थोड़ी देर बाद जब यह मिश्रण छूने लायक हो जाए, तो इसे एक बड़ी परात या थाली में निकाल लें। अपने दोनों हाथों की हथेलियों पर थोड़ा सा घी चुपड़ें और आटे को हल्के हाथों से लगातार मसलें। यदि आटा थोड़ा सूखा लगे, तो इसमें तीन से चार छोटे चम्मच पानी के छींटे डालकर तब तक गूथें जब तक कि वह पूरी तरह चिकना और मुलायम न बन जाए।
मसालेदार दाल की स्वादिष्ट भरावन कैसे तैयार करें
फरे का मुख्य स्वाद उसकी दाल वाली स्टफिंग में छिपा होता है। इसके लिए आधा कप चना दाल और आधा कप उड़द दाल को साफ पानी में धोकर लगभग तीन से चार घंटे पहले भिगोकर रख दें। निर्धारित समय बीत जाने के बाद पानी पूरी तरह निथार लें और दोनों दालों को मिक्सी में डालकर दरदरा पीस लें, ध्यान रहे कि दाल का पेस्ट ज्यादा बारीक न हो।
अब इस दरदरी दाल में दो बारीक कटी हुई हरी मिर्च, एक छोटा चम्मच अदरक का पेस्ट, आधा छोटा चम्मच पिसी हल्दी और आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर मिलाएं। इसके बाद एक छोटा चम्मच धनिया पाउडर, आधा छोटा चम्मच नमक और बारीक कटी हरी धनिया पत्तियां डालकर सभी मसालों को चम्मच से अच्छी तरह मिला लें। इस तरह फरे के अंदर भरने के लिए स्वादिष्ट और तीखी भरावन तैयार हो जाएगी।
फरे को आकार देने और भरने का तरीका
तैयार आटे की छोटी-छोटी लोइयां तोड़ लें। प्रत्येक लोई को दोनों हथेलियों के बीच घुमाते हुए चिकना गोल पेड़ा बना लें। इस पेड़े को सूखे चावल के आटे में हल्का सा लपेटें ताकि बेलते समय यह चिपके नहीं। अब चकले या समतल सतह पर इसे थोड़ा मोटा बेल लें।
बेली हुई पूरी को अपनी हथेली पर रखें और उसके बीच में चम्मच की सहायता से तैयार दाल की स्टफिंग रखें। अब पूरी के किनारों को आपस में मोड़कर आधा चंद्रमा जैसा आकार दें और किनारों को हल्का दबाकर बंद कर दें। इसी प्रक्रिया को दोहराते हुए सारी लोइयों से फरे तैयार कर एक प्लेट में रख लें।
भाप में पकाने की आसान तकनीक
एक बड़े बर्तन में दो से तीन कप पानी डालकर चूल्हे पर गर्म होने के लिए रख दें। जब पानी से भाप निकलने लगे, तो इसके ऊपर छेद वाली छलनी या जालीदार बर्तन रखें। जाली पर ब्रश या उंगलियों की मदद से थोड़ा सा तेल लगा दें ताकि फरे उस पर चिपके नहीं।
अब छलनी के ऊपर एक-एक करके तैयार फरे रख दें। बर्तन को किसी बड़े ढक्कन से अच्छी तरह ढक दें और मध्यम से तेज आंच पर इसे ठीक दस मिनट तक पकने दें। भाप में लगभग दस मिनट रहने के बाद फरे पूरी तरह पककर तैयार हो जाएंगे। अब गैस बंद करें और गरमा-गरम फरे करवा माता के भोग के लिए अर्पित करें।



















