जन्माष्टमी के पावन पर्व पर देश भर में घरों में विशेष पकवान और मिठाइयां तैयार करने की परंपरा चली आ रही है। इस विशेष दिन पर भगवान कृष्ण को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। हालांकि व्यस्तता के चलते कई बार घंटों तक दूध को धीमी आंच पर उबालकर पारंपरिक रबड़ी तैयार करना संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में समय की बचत करने के लिए झटपट बनने वाली विधि का सहारा लिया जा सकता है, जो स्वाद में उतनी ही बेहतरीन होती है और बहुत कम समय में बनकर तैयार हो जाती है।
आवश्यक सामग्री
इस आसान विधि से रबड़ी तैयार करने के लिए रसोई में मौजूद कुछ बुनियादी चीजों की जरूरत पड़ती है। मुख्य सामग्री के रूप में एक लीटर फुल-क्रीम दूध, चार से पांच बड़े चम्मच मिल्क पाउडर, तीन से चार बड़े चम्मच चीनी और चार से पांच केसर के धागे आवश्यक हैं। इसके अलावा मेवों में दो बड़े चम्मच कटे हुए बादाम और पिस्ता तथा फ्लेवर के लिए आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर की जरूरत होती है। यदि आप इसे और अधिक आकर्षक बनाना चाहते हैं तो स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए कुछ गुलाब की पंखुड़ियों का उपयोग भी किया जा सकता है।
बनाने की आसान प्रक्रिया
इस लाजवाब मिठाई को बनाने की शुरुआत करते हुए सबसे पहले एक भारी तले वाले पैन को मध्यम आंच पर रखें और उसमें दूध गर्म करने के लिए चढ़ा दें। जब दूध में उबाल आने लगे तो गैस की आंच को धीमा कर देना चाहिए। इसके बाद धीरे-धीरे करके उसमें मिल्क पाउडर मिलाते जाएं और चम्मच को लगातार चलाते रहें ताकि मिश्रण में किसी प्रकार की गांठ न बनने पाए। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान लगातार ध्यान रखना बेहद आवश्यक है ताकि दूध बर्तन के तले में न चिपके।
गाढ़ापन और फ्लेवर देना
दूध को लगातार चलाते हुए लगभग पांच से सात मिनट तक अच्छी तरह पकाएं। जैसे ही मिश्रण अपने आप गाढ़ा होने की स्थिति में आने लगे तो उसमें तय मात्रा के अनुसार चीनी मिला दें। इसके साथ ही, केसर के कुछ धागों को एक चम्मच गर्म दूध में भिगोकर अलग रख लें और फिर उसे इस मिश्रण में मिला दें। केसर का यह घोल रबड़ी को एक सुंदर रंग और सोंधी खुशबू प्रदान करता है, जिससे इसका आकर्षण और भी अधिक बढ़ जाता है।
अंतिम चरण और सजावट
अब इस मिश्रण में इलायची पाउडर के साथ-साथ कटे हुए बादाम और पिस्ता भी डाल दिए जाते हैं। इसके बाद सामग्री को दो से तीन मिनट तक और पकने दें और फिर गैस को बंद कर दें। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि चूल्हे पर ही मिश्रण को बहुत ज्यादा गाढ़ा न करें, क्योंकि ठंडा होने के बाद यह और भी अधिक गाढ़ी हो जाती है। इसके पश्चात तैयार मलाईदार रबड़ी को एक साफ बर्तन में निकाल लिया जाता है।
भोग लगाने की विधि और सावधानियां
तैयार की गई इस मलाईदार मिठाई को चांदी के छोटे बर्तन या किसी साफ कटोरे में परोसा जा सकता है। इसके ऊपर से बचे हुए कटे हुए मेवे और कुछ केसर के धागे डालकर इसकी सजावट की जाती है। जन्माष्टमी की पूजा के दौरान इस विशेष प्रसाद को भगवान कृष्ण को भोग स्वरूप अर्पित किया जाता है। यदि परिवार के सदस्यों को ठंडी रबड़ी खाना पसंद है तो इसे कुछ देर के लिए रेफ्रिजरेटर में भी रखा जा सकता है। हालांकि भोग के रूप में तैयार करने के बाद इसे सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए और लंबे समय तक खुले में नहीं छोड़ना चाहिए।





















