दक्षिण एशियाई फुटबॉल महासंघ चैंपियनशिप का मंच सज चुका है और टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबले में ही गुरुवार को पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरेंगे. गत विजेता होने के बावजूद इस क्षेत्रीय प्रतियोगिता में भारत अपनी मुख्य सीनियर टीम को नहीं उतार रहा है, क्योंकि मुख्य राष्ट्रीय टीम को 12 और 15 नवंबर को ऑकलैंड और क्राइस्टचर्च में न्यूजीलैंड के विरुद्ध दो अंतरराष्ट्रीय दोस्ताना मुकाबले खेलने हैं. सीनियर टीम के इस विदेशी दौरे के चलते सैफ प्रतियोगिता के लिए एक वैकल्पिक टीम तैयार की गई है, जिसे अपने शुरुआती मैच में खिलाड़ियों की सीमित संख्या के साथ ही तालमेल बिठाना होगा.
शुरुआती मैच में केवल 18 खिलाड़ियों की उपलब्धता और क्लबों का रुख
शुरुआती मैच में भारतीय खेमे के सामने सबसे बड़ी चुनौती खिलाड़ियों की संख्या को लेकर खड़ी हो गई है. पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले के लिए टीम प्रबंधन के पास चयन के लिए सिर्फ 18 खिलाड़ी ही मौजूद रहेंगे. इसकी मुख्य वजह यह है कि गुरुवार का यह मैच फीफा की आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय विंडो के बाहर आयोजित हो रहा है. अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल की यह निर्धारित विंडो 9 से 17 नवंबर तक चलेगी. घरेलू सत्र के बीच चल रहे इंडियन सुपर लीग के क्लब इस निर्धारित विंडो से पहले अपने खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम के लिए छोड़ने को तैयार नहीं थे, जिसके चलते शुरुआती मुकाबले में स्क्वाड की पूरी ताकत नहीं मिल पाई.
ढाका पहुंचने की चरणबद्ध योजना और ग्रुप का समीकरण
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ द्वारा घोषित योजना के मुताबिक कुल 28 सदस्यीय दल को दो अलग-अलग चरणों में बांग्लादेश भेजा जा रहा है. योजना के तहत 18 खिलाड़ी तीन नवंबर को कोलकाता के रास्ते ढाका पहुंच चुके हैं, जबकि शेष 10 खिलाड़ी अगले कुछ दिनों में वहां पहुंचकर बाकी दल से जुड़ेंगे. नौ नवंबर से फीफा विंडो लागू होते ही आईएसएल क्लबों द्वारा रोके गए खिलाड़ी भी रिलीज हो जाएंगे, जिससे भारतीय टीम को अपनी पूरी 28 खिलाड़ियों की ताकत मिल सकेगी.
ढाका के नेशनल स्टेडियम में खेले जा रहे छह देशों के इस टूर्नामेंट को दो समूहों में विभाजित किया गया है. ग्रुप बी में शामिल भारतीय टीम का दूसरा लीग मुकाबला 11 नवंबर को मालदीव के खिलाफ होना तय है. दूसरी ओर ग्रुप ए में मेजबान बांग्लादेश के साथ श्रीलंका और भूटान को जगह दी गई है. तय प्रारूप के तहत दोनों समूहों से शीर्ष दो पायदान पर रहने वाली टीमें 14 नवंबर को सेमीफाइनल खेलने उतरेंगी, जबकि खिताबी मुकाबला 17 नवंबर को ढाका के इसी मैदान पर खेला जाएगा.
कोचिंग स्टाफ की कमान और मुख्य कोच का दृष्टिकोण
इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम के मार्गदर्शन का दायित्व अंडर-23 राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच नौशाद मूसा संभाल रहे हैं. उनके साथ सहायक कोच की जिम्मेदारी बिबियानो फर्नांडिस को सौंपी गई है, जिन्होंने हाल ही में अजरबैजान में आयोजित फीफा अंडर-15 विश्व कप और महोत्सव में भारतीय अंडर-15 पुरुष दल को कोचिंग दी थी. ढाका पहुंचने के बाद नौशाद मूसा ने अपनी रणनीति और टूर्नामेंट को लेकर विचार साझा किए. नौशाद ने कहा कि उन्हें लगता है कि बांग्लादेश इस समय टूर्नामेंट की सबसे मजबूत टीम है और उन्हें उम्मीद है कि वे फाइनल में उसका सामना करेंगे.
टूर्नामेंट का ऐतिहासिक रिकॉर्ड और दोनों टीमों का पिछला आमना-सामना
दक्षिण एशियाई फुटबॉल महासंघ चैंपियनशिप के इतिहास पर नजर डालें तो भारतीय टीम का दबदबा साफ दिखाई देता है. वर्ष 1993 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट के अब तक 14 संस्करण आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें से भारत ने रिकॉर्ड नौ बार खिताब अपने नाम किया है. इसके अलावा भारतीय टीम चार मौकों पर उपविजेता रही है, जबकि एक बार टीम तीसरे स्थान पर रही थी.
दूसरी तरफ पाकिस्तान की टीम का इस क्षेत्रीय चैंपियनशिप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वर्ष 1997 में आया था, जब वह तीसरे स्थान पर रहने में सफल रही थी. दोनों देशों के बीच पिछला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला वर्ष 2023 में बेंगलुरु में आयोजित सैफ चैंपियनशिप के दौरान हुआ था. उस मुकाबले में भारत ने एकतरफा खेल दिखाते हुए पाकिस्तान को 4-0 से हराया था. उस मैच में सुनील छेत्री ने शानदार हैट्रिक दर्ज की थी और बाद में मुख्य कोच इगोर स्टिमक के मार्गदर्शन में भारत ने उस संस्करण की ट्रॉफी भी जीती थी.

















