अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को व्यापक उतार चढ़ाव देखने को मिला, जहां अमेरिकी डॉलर में आई तेज कमजोरी ने कई प्रतिस्पर्धी करेंसियों को उबरने का मौका दिया। न्यूजीलैंड डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर (NZD/USD) 0.19 फीसदी की मजबूती के साथ 0.5620 के आसपास कारोबार करती दिखी। न्यूजीलैंड के घरेलू मोर्चे से निराशाजनक श्रम बाजार के आंकड़े सामने आने और अमेरिका में सख्त मौद्रिक नीति की संभावनाओं के बावजूद अमेरिकी मुद्रा में आई चौतरफा बिकवाली ने कीवी करेंसी को सहारा दिया है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और डॉलर इंडेक्स का दबाव
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के शुरुआती रुझानों और नतीजों के बाद उपजी राजनीतिक अनिश्चितता ने अमेरिकी डॉलर पर गहरा दबाव बना दिया है। वाशिंगटन में संभावित राजनीतिक गतिरोध को देखते हुए सुरक्षित निवेश प्रवाह में बदलाव आया, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट ने डॉलर की बिकवाली को और तेज कर दिया।
छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) बुधवार को लगभग 0.35 फीसदी लुढ़ककर 101.50 के करीब आ गया। इससे पहले कारोबार के दौरान यह इंडेक्स गिरकर 101.21 तक पहुंच गया था, जो 30 सितंबर के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी बॉन्ड बाजार में यील्ड घटने से निवेशकों ने डॉलर में अपनी पोजीशन घटाई है।
न्यूजीलैंड में बेरोजगारी 11 साल के उच्चतम स्तर पर
अमेरिकी मुद्रा में आई गिरावट भले ही न्यूजीलैंड डॉलर के लिए राहत लेकर आई हो, लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था के स्तर पर स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। स्टेटिस्टिक्स न्यूजीलैंड द्वारा जारी नवीनतम श्रम बाजार आंकड़ों के अनुसार, तीसरी तिमाही में देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.7 फीसदी पर पहुंच गई।
यह आंकड़ा पिछली तिमाही के 5.6 फीसदी और बाजार के 5.5 फीसदी के अनुमान दोनों से अधिक है। 5.7 फीसदी की यह दर पिछले 11 वर्षों में न्यूजीलैंड में बेरोजगारी का सर्वोच्च स्तर दर्शाती है। इसके अतिरिक्त, तीसरी तिमाही के दौरान रोजगार बदलाव (एम्प्लॉयमेंट चेंज) में तिमाही आधार पर 0.1 फीसदी का संकुचन दर्ज किया गया। यह स्थिति विश्लेषकों की उम्मीदों के विपरीत रही, जो 0.4 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे थे, जबकि दूसरी तिमाही में 0.5 फीसदी की वृद्धि देखी गई थी।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें
न्यूजीलैंड की सुस्त अर्थव्यवस्था के विपरीत अमेरिकी आर्थिक आंकड़े काफी हद तक मजबूती के संकेत दे रहे हैं, जिससे फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा आने वाले समय में नीतिगत दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावनाएं बनी हुई हैं। एडीपी एम्प्लॉयमेंट चेंज रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर महीने में निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं ने 86 हजार नौकरियां जोड़ीं, जो बाजार के 69 हजार के अनुमान से काफी अधिक है। हालांकि, सितंबर महीने के आंकड़े को मामूली रूप से संशोधित कर 90 हजार से घटाकर 86 हजार किया गया।
दूसरी ओर, इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट (ISM) सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अक्टूबर में घटकर 54.5 पर आ गया, जो सितंबर में 54.9 दर्ज किया गया था और अनुमानित 54.8 से थोड़ा कम रहा। फिर भी यह आंकड़ा विस्तार और संकुचन को अलग करने वाली 50 की सीमा रेखा से काफी ऊपर बना हुआ है, जो अमेरिकी सेवा क्षेत्र में निरंतर मजबूती को रेखांकित करता है।
महंगाई का जोखिम और दिसंबर बैठक पर नजरें
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते ऊर्जा की ऊंची कीमतों से जुड़ी लगातार महंगाई के जोखिम फेडरल रिजर्व को नीतिगत सख्ती जारी रखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय बाजार वर्तमान में दिसंबर महीने में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की 81 फीसदी संभावना जता रहे हैं।
बाजार के तमाम हितधारकों की नजरें अब गुरुवार को जारी होने वाले अमेरिकी इनिशियल जॉबलेस क्लेम्स और शुक्रवार को आने वाली बहुप्रतीक्षित नॉन फार्म पेरोल्स (NFP) रिपोर्ट पर टिकी हैं। ये आंकड़े अमेरिकी श्रम बाजार की वास्तविक ताकत की स्पष्ट दिशा तय करेंगे और फेड के अगले मौद्रिक नीतिगत फैसले को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं।
वैश्विक फॉरेक्स और कमोडिटी बाजार का रुख
बुधवार के कारोबारी सत्र में न्यूजीलैंड डॉलर सूचीबद्ध प्रमुख मुद्राओं में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे अधिक मजबूत साबित हुआ। व्यापक मुद्रा बाजार में अन्य जोड़ियों में भी इसी प्रकार की हलचल देखने को मिली। एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) 0.6965 के पास स्थिर रहा और दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर बना रहा, हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के कम आक्रामक रुख ने इसकी बढ़त को सीमित रखा।
वहीं यूएस डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) भारी बिकवाली दबाव में आकर एशियाई कारोबार में 158.00 के नीचे फिसल गया, क्योंकि वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध के अंदेशे ने बॉन्ड यील्ड को गिरा दिया। सोने की कीमतों में भी सुधार दिखा, जहां पीली धातु ने लगातार दो सत्रों की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस का अहम स्तर फिर से हासिल कर लिया। कच्चे तेल की घटी कीमतों, घटती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और कमजोर डॉलर ने सोने को सहारा दिया।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बढ़त
जोखिम उठाने की बेहतर भावना के बीच बुधवार को डिजिटल परिसंपत्तियों में भी मजबूती देखी गई। बिटकॉइन (BTC) 78,000 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार करता नजर आया। इथेरियम (ETH) ने भी रिकवरी के रुख को साझा किया और 2,300 डॉलर के पार बना रहा। इसके साथ ही रिपल (XRP) ने भी लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज करते हुए 1.28 डॉलर के ऊपर हाथ बदले।



















