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न्यूरेबल ने पेश किया ब्रेन स्कैनिंग हेडफोन न्यूरेबल वन, ध्यान भटका तो बजेगा अलर्टगैजेट्स
1 अक्तू॰ 2026, 4:52 pm (22 मिनट पहले)· 0

न्यूरेबल ने पेश किया ब्रेन स्कैनिंग हेडफोन न्यूरेबल वन, ध्यान भटका तो बजेगा अलर्ट

न्यूरेबल ने अपना पहला इन-हाउस ब्रेन-रीडिंग हेडफोन न्यूरेबल वन लॉन्च किया है, जो 12 ईईजी सेंसर्स की मदद से दिमाग की सक्रियता और फोकस को ट्रैक करता है।

ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक पर काम करने वाली बोस्टन की न्यूरोटेक फर्म न्यूरेबल ने सीधे कंज्यूमर हार्डवेयर बाजार में कदम रखते हुए अपना पहला खुद का ब्रेन-स्कैनिंग हेडफोन न्यूरेबल वन पेश किया है। अब तक दूसरे ऑडियो ब्रांड्स के साथ मिलकर अपनी तकनीक उपलब्ध कराने वाली इस कंपनी ने अब अपनी डिवाइस खुद विकसित करने का फैसला लिया है। इसके पीछे मुख्य मकसद तकनीक में तेजी से सुधार करना और उपयोगकर्ताओं को यह दिखाना है कि न्यूरो-ट्रैकिंग रोजमर्रा की जिंदगी में क्या बदलाव ला सकती है। इस नए ऑडियो वियरेबल की कीमत 499 डॉलर रखी गई है और यह अक्टूबर महीने से न्यूरेबल की आधिकारिक वेबसाइट पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा।

साझेदारियों से आगे बढ़कर खुद का हार्डवेयर तैयार करने का सफर

न्यूरेबल ने अपने शुरुआती दौर में दूसरी तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी का रास्ता चुना था। कंपनी ने कुछ साल पहले मास्टर एंड डायनेमिक के हेडफोन्स में अपनी दिमागी तरंगों को मापने वाली तकनीक जोड़ी थी, जिसे एमएंडडी एमडब्ल्यू75 न्यूरो नाम दिया गया था। इसके बाद इस साल की शुरुआत में एचपी के गेमिंग ब्रांड हाइपरएक्स के साथ मिलकर दो इलेक्ट्रोएन्सेफैलोग्राफी यानी ईईजी सेंसर्स वाला एक खास गेमिंग हेडसेट भी दिखाया गया था। कंपनी की शुरुआती योजना अपनी तकनीक का लाइसेंस अन्य डिवाइस निर्माताओं को देने की थी, ताकि बाजार में कई तरह के ब्रेन-स्कैनिंग गैजेट्स आ सकें। हालांकि, कंपनी ने बाद में अपनी रणनीति बदली और हार्डवेयर को पूरी तरह अपने नियंत्रण में इन-हाउस बनाने का निर्णय लिया, ताकि विकास की रफ्तार को तेज किया जा सके।

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नायलॉन ईयरपैड्स में लगे 12 ईईजी सेंसर्स और ऑटोमैटिक ट्रैकिंग

न्यूरेबल वन की सबसे बड़ी खासियत इसके नायलॉन ईयरपैड्स में छिपे 12 ईईजी सेंसर्स हैं, जो मस्तिष्क की विद्युत तरंगों की निरंतर निगरानी करते हैं। पिछली पीढ़ियों की तुलना में इस डिवाइस का सबसे बड़ा अपग्रेड यह है कि अब यूजर को ट्रैकिंग शुरू करने के लिए स्मार्टफोन ऐप में जाकर किसी सेशन को मैन्युअली चालू नहीं करना पड़ता। जैसे ही यूजर इन हेडफोन्स को अपने कानों पर पहनता है, यह बैकग्राउंड में अपने आप दिमागी सक्रियता को ट्रैक करना शुरू कर देता है। यह बिल्कुल उसी तरह काम करता है जैसे कोई यूजर अपनी कलाई पर फिटबिट स्मार्टबैंड पहन लेता है और वह लगातार फिटनेस डेटा जुटाता रहता है। अगर यूजर कभी ब्रेन ट्रैकिंग नहीं चाहता, तो वह इन ईईजी सेंसर्स को पूरी तरह बंद करके इसे एक सामान्य प्रीमियम ऑडियो हेडफोन की तरह भी इस्तेमाल कर सकता है।

नया ऐप और मस्तिष्क स्वास्थ्य के आठ अहम पैमाने

इस हार्डवेयर के साथ कंपनी ने एक नया मोबाइल ऐप भी पेश किया है, जो एंड्रॉइड और आईओएस दोनों प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम्स पर काम करेगा। पुराने हार्डवेयर के लिए पुराना ऐप भी अभी जारी रहेगा। न्यूरेबल वन का नया ऐप उपयोगकर्ता के मस्तिष्क से जुड़े आठ अलग-अलग पैमानों को बारीकी से मापता है

  • ब्रेन एज: यह यूजर की वास्तविक उम्र की तुलना में उसके मस्तिष्क की अनुमानित कार्यप्रणाली उम्र की गणना करता है।
  • ब्रेन बैटरी: यह बताता है कि मानसिक रूप से काम करने के लिए यूजर के पास अब कितनी ऊर्जा या रिजर्व बचा हुआ है।
  • स्पीड: इससे पता चलता है कि यूजर का दिमाग किसी सूचना को कितनी तेजी से प्रोसेस कर रहा है।
  • फोकस: यह नापता है कि यूजर का ध्यान किसी काम पर कितनी मजबूती से टिका हुआ है।
  • लोड: किसी काम को पूरा करने के लिए मस्तिष्क को कितना मानसिक प्रयास या जोर लगाना पड़ रहा है।
  • स्ट्रेस: काम के दौरान यूजर के दिमाग में कितना मानसिक तनाव या खिंचाव पैदा हो रहा है।
  • स्लीपीनेस: यह ट्रैक करता है कि यूजर को कितनी नींद या उनींदापन महसूस हो रहा है।
  • अल्फा पीक फ्रीक्वेंसी: यह मस्तिष्क की सबसे मजबूत विश्राम लय को दर्ज करता है, जिसे न्यूरेबल दिमाग के हार्ट रेट वेरिएबिलिटी की तरह मानता है।

फोकस अलर्ट, बर्नआउट से बचाव और गाइडेड मेडिटेशन

जब यूजर काम कर रहा होता है और हेडफोन यह पहचान लेता है कि उसका ध्यान भटकने लगा है, तो यह यूजर को सतर्क करने के लिए तुरंत एक हल्की ऑडियो पिंग बजाता है ताकि उसका ध्यान वापस काम पर लौट आए। वहीं, अगर सिस्टम को यह आभास होता है कि यूजर का दिमाग बुरी तरह थक चुका है और बर्नआउट की स्थिति बन रही है, तो ऐप तुरंत काम रोककर ब्रेक लेने की सलाह देता है, जिससे यूजर दोबारा तरोताजा होकर काम शुरू कर सके।

यह हेडफोन केवल काम के लिए ही नहीं, बल्कि ध्यान लगाने और झपकी लेने में भी मददगार साबित होता है। मेडिटेशन के दौरान यदि यूजर गाइडेड सेशन सुन रहा है और हेडफोन यह भांप लेता है कि यूजर पूरी तरह ध्यान की गहराई या फ्लो में चला गया है, तो गाइड की आवाज अपने आप बंद हो जाती है ताकि उसकी शांति में खलल न पड़े। जैसे ही यूजर का ध्यान भटकता है, आवाज दोबारा शुरू होकर उसे वापस सही दिशा में ले आती है। इसी तरह पावर नैप या छोटी झपकी के दौरान, जैसे-जैसे यूजर को नींद आने लगती है, बैकग्राउंड में चल रही साउंडस्केप या आवाज का वॉल्यूम धीरे-धीरे धीमा होता जाता है।

कॉग्निटिव स्नैपशॉट और दिनचर्या में रणनीतिक सुधार

ऐप के भीतर कॉग्निटिव स्नैपशॉट नाम का एक खास फीचर भी दिया गया है। जब भी यूजर इसे एक्टिवेट करता है, ऐप उस समय के वास्तविक दिमागी स्तर को सामने रख देता है और मानसिक स्थिति को बेहतर बनाने के उपाय सुझाता है। इसमें गाइडेड ध्यान सत्र या मस्तिष्क के विशिष्ट हिस्सों को सक्रिय करने वाले छोटे गेम्स शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा लंबी अवधि के मानसिक रुझानों को समझने के लिए ऐप साप्ताहिक और मासिक प्रगति रिपोर्ट भी तैयार करता है। इन आंकड़ों के आधार पर यूजर अपने दिन की योजना बदल सकते हैं, जैसे कि जब दिमाग की रफ्तार अपने चरम पर हो तब सबसे कठिन काम निपटाना और ब्रेन बैटरी कम होने पर सोना बाथ लेना या जल्दी सोने चले जाना।

मेयो क्लिनिक का अध्ययन, डेटा प्राइवेसी और ऑडियो स्पेसिफिकेशन्स

हालांकि न्यूरेबल के पास फिलहाल इस नए मॉडल के असर पर कोई बिल्कुल नया शोध या आंकड़े नहीं हैं क्योंकि वह अध्ययन अभी प्रक्रिया में है, लेकिन कंपनी मेयो क्लिनिक के साथ किए गए अपने पिछले क्लिनिकल अध्ययन का हवाला देती है। उस अध्ययन के अनुसार, न्यूरेबल का हेडसेट इस्तेमाल करने वाले लोगों में पोमोडोरो या अन्य पारंपरिक तकनीकों की तुलना में फोकस में 30 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। साथ ही दिन के अंत में होने वाले मानसिक बर्नआउट में 10 प्रतिशत की कमी देखी गई थी और यूजर्स की खुशी के स्तर में इजाफा दर्ज हुआ था।

कंपनी ने यह स्पष्ट किया है कि न्यूरेबल वन कोई मेडिकल डिवाइस नहीं है और इसे किसी भी बीमारी के निदान, इलाज या निगरानी के लिए तैयार नहीं किया गया है। प्राइवेसी को लेकर न्यूरेबल ने वादा किया है कि वह जुटाए गए ब्रेन डेटा को किसी तीसरे पक्ष को नहीं बेचेगी और न ही इसका इस्तेमाल विज्ञापनों के लिए किया जाएगा। कॉर्पोरेट ग्राहक भी कर्मचारियों की जासूसी के लिए नहीं, बल्कि उनकी कार्यक्षमता और संतुष्टि बढ़ाने के लिए इन्हें खरीद रहे हैं। तकनीकी तौर पर न्यूरेबल ने इसके ऑडियो सिस्टम के लिए एक स्थापित ऑडियो ब्रांड के साथ साझेदारी की है। इसमें 40-मिमी बेरिलियम ड्राइवर्स, छह माइक्रोफोन, एक्टिव नॉइज़ कैंसलेशन, ट्रांसपेरेंसी मोड, ब्लूटूथ 5.2, और एएसी तथा एपीटीएक्स कोडेक्स का सपोर्ट दिया गया है। इसकी बैटरी ईईजी सेंसर्स चालू रहने पर 12 घंटे और सेंसर्स बंद होने पर 22 घंटे तक का बैकअप देती है।

सवाल-जवाब

न्यूरेबल वन हेडफोन की कीमत कितनी है और यह कब से मिलेगा?
इसकी कीमत 499 डॉलर है और यह अक्टूबर महीने से न्यूरेबल की आधिकारिक वेबसाइट पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा।
यह हेडफोन दिमाग की गतिविधियों को कैसे ट्रैक करता है?
इसके नायलॉन ईयरपैड्स में 12 ईईजी सेंसर्स लगे हैं जो सिर की त्वचा से दिमागी तरंगों को अपने आप और लगातार मॉनिटर करते हैं।
क्या न्यूरेबल वन एक मेडिकल डिवाइस है?
नहीं, यह कोई मेडिकल डिवाइस नहीं है और इसे किसी भी बीमारी के इलाज, जांच या मेडिकल निगरानी के लिए नहीं बनाया गया है।
हेडफोन की बैटरी कितने घंटे चलती है?
सामान्य ऑडियो सुनने पर इसकी बैटरी 22 घंटे और ईईजी ब्रेन सेंसर्स ऑन रहने पर 12 घंटे तक चलती है।
क्या कंपनी यूजर का ब्रेन डेटा बेचती है?
कंपनी ने वादा किया है कि वह उपयोगकर्ताओं का दिमागी डेटा किसी तीसरे पक्ष को नहीं बेचेगी और न ही इसका इस्तेमाल विज्ञापनों में करेगी।
मेयो क्लिनिक के अध्ययन में क्या परिणाम मिले थे?
अध्ययन में पाया गया था कि इस तकनीक से फोकस में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और दिन के अंत में होने वाले बर्नआउट में 10 प्रतिशत की कमी आई।
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