घर के किसी कोने में पड़ी पुरानी और घिसी हुई प्लास्टिक की बाल्टी अक्सर कबाड़ मानकर फेंक दी जाती है, लेकिन थोड़ी सी रचनात्मकता और सही तरीके से इसे एक बेहद आकर्षक प्लांटर में बदला जा सकता है। बागवानी के शौकीन लोगों के लिए अपने हाथों से बनाए गए गमले न केवल पौधों की खूबसूरती बढ़ाते हैं, बल्कि घर की सजावट को भी एक अनूठा और व्यक्तिगत स्पर्श देते हैं। सीमेंट, बारीक रेत और मोटी रस्सी के मेल से एक साधारण बाल्टी को ऐसा रूप दिया जा सकता है, जो किसी महंगे और डिजाइनर हैंडीक्राफ्ट गमले से कम नजर नहीं आता। इस खास शिल्प की सबसे बड़ी पहचान इसके उभारदार रिंग्स हैं, जो गमले के बाहरी हिस्से पर एक सममित और आधुनिक टेक्सचर तैयार करते हैं।
प्लांटर निर्माण के लिए जरूरी सामग्री और तैयारी
इस रचनात्मक प्रोजेक्ट की शुरुआत करने से पहले सभी आवश्यक चीजों को एक जगह एकत्रित कर लेना समझदारी होती है। सबसे पहले आधार तैयार करने के लिए एक पुरानी प्लास्टिक की बाल्टी की जरूरत होगी, जो गमले के बाहरी आकार को तय करेगी। इसके साथ ही एक मोटी जूट या कॉटन की रस्सी की व्यवस्था करें, जिससे बाहरी हिस्से पर छल्लेदार बनावट उकेरी जा सकेगी। प्लांटर के अंदरूनी हिस्से में मिट्टी और पौधे के लिए खाली जगह बनाने के वास्ते एक अपेक्षाकृत छोटी प्लास्टिक बाल्टी या कोई मजबूत गोल कंटेनर चाहिए।
मजबूत ढांचे के लिए निर्माण सामग्री के रूप में साधारण सीमेंट, छनी हुई बारीक रेत और पानी का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा सांचे से गमले को आसानी से छुड़ाने के लिए साधारण तेल या वैसलीन की आवश्यकता होगी। रस्सी को अपनी जगह पर स्थिर रखने के लिए मजबूत टेप, किनारों को फिनिशिंग देने के लिए सैंडपेपर और अतिरिक्त पानी की निकासी का छेद बनाने के लिए एक प्लास्टिक स्ट्रॉ अथवा पीवीसी पाइप का छोटा टुकड़ा अपने पास रखें। काम करते वक्त हाथों की त्वचा को सीमेंट के प्रभाव से सुरक्षित रखने के लिए रबर के दस्ताने पहनना बेहद जरूरी है। यदि आप अंत में गमले को सजाना चाहते हैं, तो अपनी पसंद के वाटरप्रूफ या ऐक्रेलिक पेंट का चुनाव भी पहले ही कर सकते हैं।
बाल्टी की सतह और रस्सी का ढांचा तैयार करना
शुरुआती कदम के तौर पर पुरानी बाल्टी को पानी की धार से अच्छी तरह धोएं ताकि उस पर जमी किसी भी प्रकार की धूल, मिट्टी या चिकनाई पूरी तरह हट जाए। धोने के बाद बाल्टी को हवा या धूप में रखकर पूर्ण रूप से सुखा लें। सूखी हुई बाल्टी के भीतर चारों तरफ तेल या वैसलीन की एक हल्की और चिकनी परत लगा दें। यह चिकनाई डी-मोल्डिंग के समय बेहद मददगार साबित होती है, क्योंकि इससे सूखने के बाद सीमेंट की पकड़ प्लास्टिक पर नहीं बैठती और ढांचा बिना टूटे अलग हो जाता है।
इसके बाद मोटी जूट या कॉटन की रस्सी लें और उसे बाल्टी की बाहरी दीवार पर नीचे के सिरे से शुरू करते हुए ऊपर की ओर लपेटना शुरू करें। लपेटते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि प्रत्येक घेरे के बीच का फासला लगभग एक समान रहे, ताकि तैयार गमले पर रिंग्स का पैटर्न संतुलित दिखाई दे। रस्सी के सिरे या बीच के घुमाव अपनी जगह से खिसक न जाएं, इसके लिए आवश्यकतानुसार मजबूत चिपकने वाले टेप की मदद ली जा सकती है। यह रस्सी ही गमले की बाहरी सतह पर सुंदर और उभरे हुए रिंग्स का आधार बनेगी।
मिश्रण का सही अनुपात और सीमेंट लगाने की विधि
एक मजबूत और टिकाऊ गमले के लिए मसाले का सही अनुपात होना सबसे अहम बिंदु है। एक साफ बर्तन या तगाड़ी में एक भाग सीमेंट लें और उसमें दो से तीन भाग बारीक रेत मिलाएं। सूखे में ही दोनों सामग्रियों को आपस में अच्छी तरह मिला लें ताकि मिश्रण एकसार हो जाए। अब इसमें थोड़ा-थोड़ा करके पानी डालें और गाढ़ा गारा तैयार करें। ध्यान रखें कि गारे का गाढ़ापन इतना होना चाहिए कि वह बाल्टी की खड़ी दीवार पर आसानी से चिपक सके और नीचे की ओर न फिसले। यदि पानी की मात्रा अधिक हो गई और घोल पतला हो गया, तो वह रस्सी और बाल्टी पर टिक नहीं पाएगा और सतह खराब हो जाएगी।
हाथों में रबर के दस्ताने पहनकर अथवा स्पैटुला के सहारे रस्सी लिपटी बाल्टी की बाहरी सतह पर सीमेंट का मिश्रण चिपकाना शुरू करें। इसे चारों तरफ समान रूप से थपथपाते हुए लगभग 1.5 से 2 सेंटीमीटर की मोटाई में फैलाएं। जैसे ही सीमेंट की परत रस्सी के ऊपर चढ़ेगी, उसके नीचे मौजूद गोल घेरे बाहर की ओर उभरने लगेंगे। यह उभरी हुई बनावट ही प्लांटर को साधारण गमलों से अलग एक डिजाइनर और सुरुचिपूर्ण लुक प्रदान करती है।
ड्रेनेज होल और अंदरूनी कंटेनर की सही स्थिति
गमले के भीतर पौधे की जड़ों के लिए जगह बनाना आवश्यक होता है। इसके लिए तेल लगी छोटी प्लास्टिक बाल्टी या कंटेनर को बड़ी बाल्टी के ठीक बीचों-बीच सावधानीपूर्वक उतारें। इसे केंद्र में सीधा रखें ताकि गमले की चारों तरफ की सीमेंट की दीवारें एक समान मोटाई की बनें और कोई हिस्सा कमजोर न रह जाए। ध्यान रखें कि अंदर रखे कंटेनर को जरूरत से ज्यादा नीचे तक न दबाएं, नीचे की पेंदी भी पर्याप्त मजबूत होनी चाहिए।
पौधों के स्वास्थ्य और जड़ों को सड़न से बचाने के लिए गमले में अतिरिक्त पानी का निकलना बेहद जरूरी है। इसके लिए जब सीमेंट का मसाला हल्का गीला हो, तभी पेंदी के निचले भाग में एक प्लास्टिक स्ट्रॉ या पाइप का छोटा टुकड़ा आर-पार धंसा दें। यह टुकड़ा गमले के सूखने पर आसानी से बाहर खींच लिया जाता है, जिससे नीचे एक साफ ड्रेनेज होल तैयार हो जाता है और गमले में जलभराव की समस्या नहीं होती।
सुखाने की प्रक्रिया, डी-मोल्डिंग और फिनिशिंग
सीमेंट लगाने का काम पूरा होने के बाद किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न दिखाएं और ढांचे को बिना हिलाए-डुलाए किसी छायादार और स्थिर स्थान पर रख दें। सीमेंट को अपनी पूरी मजबूती हासिल करने के लिए कम से कम 24 से 48 घंटे का समय चाहिए होता है। जब यह पूरी तरह कड़ा और ठोस हो जाए, तब सबसे पहले बाहरी बाल्टी और फिर अंदर मौजूद छोटे कंटेनर को हल्के हाथों से घुमाते हुए धीरे-धीरे अलग करें। यदि किनारे कहीं से खुरदुरे या तीखे महसूस हों, तो सैंडपेपर की मदद से उन्हें हल्का रगड़कर चिकना और एकसार कर लें।
तैयार प्लांटर को आप उसकी कच्ची सीमेंट और प्राकृतिक जूट की बनावट के साथ सादा भी रख सकते हैं, जिससे उसे एक रस्टिक और विंटेज आभा मिलती है। इसके विपरीत, यदि आप इसे आधुनिक सजावट का रूप देना चाहते हैं, तो पसंदीदा रंगों से पेंट कर सकते हैं। उभरे हुए रिंग वाले हिस्सों को आधार से अलग रंग में उभारने पर उसका थ्री-डायमेंशनल पैटर्न और अधिक निखर कर सामने आता है, जो किसी भी बैठक, बालकनी या बगीचे की शोभा में चार चांद लगा देता है।



















