दुबई से इजरायल के तेल अवीव की ओर उड़ान भर रहे फ्लाईदुबई के एक यात्री विमान में हवा के बीच कॉकपिट के भीतर बेहद खौफनाक घटना सामने आई है। बुधवार को उड़ान संख्या FZ1073 के कॉकपिट में सह-पायलट ने मुख्य पायलट पर अचानक चाकू से जानलेवा हमला कर दिया। इस खतरनाक घटनाक्रम के दौरान विमान को क्रैश कराने की कोशिश की गई, जिसके बाद बेहद विकट परिस्थितियों में विमान को सऊदी अरब के एक हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी। इस सनसनीखेज वारदात की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई के अभियोजक जनरल ने पूरे मामले की औपचारिक न्यायिक जांच शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है।
जांच के दायरे में आतंकी साजिश और बाहरी निर्देश
अबू धाबी में अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यूएई की जांच एजेंसियां इस बात की गहराई से छानबीन कर रही हैं कि इस जानलेवा हमले के पीछे क्या कोई संगठित आतंकी साजिश छिपी थी। जांचकर्ता इस बिंदु पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि क्या यह हमला पहले से सोची-समझी योजना का परिणाम था या आरोपी सह-पायलट को किसी तीसरे व्यक्ति अथवा किसी बाहरी संगठन से इस खौफनाक कदम को उठाने के सीधे निर्देश मिले थे। पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए हमले के मूल मकसद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके संपर्कों के हर पहलू को खंगाला जा रहा है।
विदेशी हवाई क्षेत्र में भी लागू होता है यूएई का कानून
मामले के कानूनी अधिकार क्षेत्र को लेकर यूएई के न्यायिक अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारियों का कहना है कि यह संबंधित विमान यूएई में पंजीकृत है और उसी के राष्ट्रीय ध्वज के तहत अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर परिचालन करता है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियमों और राष्ट्रीय कानूनों के प्रावधानों के तहत, अपने देश में पंजीकृत किसी भी विमान में घटित होने वाले किसी भी अपराध की जांच करने और मुकदमा चलाने का पूर्ण अधिकार यूएई के न्यायिक प्राधिकरणों के पास सुरक्षित है। अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि भले ही वारदात किसी अन्य देश की सीमा के ऊपर या विदेशी हवाई क्षेत्र में हुई हो, कानून के मुताबिक यूएई का ही क्षेत्राधिकार प्रभावी रहेगा।
ईरान कनेक्शन पर इजरायल के प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया
इस अप्रत्याशित कॉकपिट हमले को लेकर कूटनीतिक और सुरक्षा गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक टेलीविजन साक्षात्कार के दौरान इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखी। जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या इस घटना के पीछे ईरान की कोई भूमिका या हाथ हो सकता है, तो उन्होंने बेहद नपे-तुले शब्दों में जवाब दिया। नेतन्याहू ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस समय इस निष्कर्ष पर पहुंचना बहुत जल्दबाजी होगी कि घटना में ईरान शामिल था या नहीं। उन्होंने बताया कि विमान को बंधक बनाने अथवा नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाले आरोपी पायलट से फिलहाल सऊदी अरब में पूछताछ और जांच की जा रही है।
आरोपी की हिरासत और संभावित प्रत्यर्पण
सऊदी अरब में कराई गई इमरजेंसी लैंडिंग के तुरंत बाद वहां के सुरक्षा बलों ने आरोपी सह-पायलट को अपनी हिरासत में ले लिया था। पूछताछ पूरी होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उसे यूएई के हवाले किए जाने की संभावना है ताकि वहां की अदालत में उस पर आपराधिक धाराओं में मुकदमा चलाया जा सके। इजरायल के प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि इजरायली सुरक्षा एजेंसियां इस पूरी जांच प्रक्रिया पर बेहद पैनी नजर बनाए हुए हैं और यदि आवश्यक हुआ तो वे औपचारिक जांच प्रक्रिया का हिस्सा भी बन सकती हैं।
भारतीय पायलट की सूझबूझ से टली बड़ी त्रासदी
विमान में सवार यात्रियों को सुरक्षित बचाने को लेकर मुख्य पायलट और जागरूक यात्रियों के साहस की चौतरफा सराहना की जा रही है। बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बात का विशेष उल्लेख किया कि एक बहादुर भारतीय पायलट और कुछ सतर्क यात्रियों की त्वरित कार्रवाई के कारण विमान को हवा में तबाह होने से बचा लिया गया। उन्होंने कहा कि अगर कॉकपिट में विमान को नीचे गिराने की साजिश कामयाब हो जाती, तो यह इतिहास में एक और 9/11 जैसी भयानक मानवीय त्रासदी बन सकती थी। भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार के अदम्य साहस और सूझबूझ की प्रशंसा नेतन्याहू के साथ-साथ डोनाल्ड ट्रंप ने भी की है, जिनकी सूझबूझ की बदौलत विमान में सवार 174 यात्रियों को सकुशल सऊदी अरब की धरती पर उतारा जा सका।
जांच के मुख्य बिंदु और अनुत्तरित सवाल
फ्लाईदुबई की इस उड़ान में घटी इस चौंकाने वाली वारदात के बाद कई गंभीर सवाल अंतरराष्ट्रीय उड्डयन सुरक्षा के सामने खड़े हो गए हैं, जिनके जवाब तलाशने में सऊदी अरब और यूएई दोनों देशों के शीर्ष जांच अधिकारी जुटे हुए हैं
- सह-पायलट ने चलती उड़ान में अपने ही सहयोगी मुख्य पायलट पर जानलेवा हमला करने जैसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया?
- क्या इस पूरी वारदात को अंजाम देने के लिए हफ्तों या महीनों पहले से कोई गुप्त योजना बनाई गई थी?
- क्या आरोपी को कॉकपिट में इस तरह की अराजकता फैलाने के लिए किसी चरमपंथी संगठन या व्यक्ति विशेष से कोई निर्देश प्राप्त हुए थे?
- क्या इस पूरी घटना के तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी नेटवर्क या क्षेत्रीय भू-राजनीतिक साजिश से जुड़े हैं?
फिलहाल दोनों देशों की एजेंसियां कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और आरोपी के व्यक्तिगत व डिजिटल संपर्कों की गहन पड़ताल कर रही हैं ताकि हवा में रची गई इस जानलेवा साजिश के हर राज से पर्दा उठाया जा सके।



















