नवरात्रि के पावन दिनों में उपवास रखने वाले लोगों की पहली पसंद अक्सर साबूदाना खिचड़ी होती है। यह फलाहारी व्यंजन हल्का, सुपाच्य और बेहद स्वादिष्ट माना जाता है, जिसमें तली हुई मूंगफली, तीखी हरी मिर्च और हल्के मसालों का संतुलन इसे हर घर की रसोई में बेहद लोकप्रिय बना देता है। इसके बावजूद, बहुत से लोगों को इसे तैयार करते समय एक आम शिकायत का सामना करना पड़ता है कि पकाते वक्त इसके दाने आपस में चिपककर एक लोंदा बन जाते हैं।
चिपचिपेपन की असली वजह और भिगोने की सही तकनीक
जब साबूदाना खिचड़ी कड़ाही में चिपक जाती है, तो न केवल उसका टेक्सचर खराब दिखता है बल्कि स्वाद का मजा भी किरकिरा हो जाता है। इस परेशानी की मुख्य जड़ साबूदाने को भिगोने के दौरान की जाने वाली गलतियां हैं। अधिकांश लोग इसे चावल की तरह बहुत अधिक पानी में डुबो देते हैं, जिससे दाने अत्यधिक पानी सोखकर जरूरत से ज्यादा नरम हो जाते हैं और आंच पर चढ़ते ही एक-दूसरे से चिपकने लगते हैं।
एकदम अलग-अलग दानों वाली नॉन-स्टिकी खिचड़ी तैयार करने की शुरुआत हमेशा सही धुलाई से होती है। साबूदाने को पकाने से पहले दो से तीन बार हल्के हाथों से साफ पानी में धोना चाहिए। ऐसा करने से दानों की बाहरी सतह पर जमा अतिरिक्त स्टार्च काफी हद तक निकल जाता है, जिससे बाद में कड़ाही में चिपचिपाहट पैदा होने का खतरा बहुत कम हो जाता है।
पानी का सटीक माप और अतिरिक्त नमी निकालना
धोने के बाद साबूदाने में पानी डालते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बर्तन में पानी का स्तर इतना ही होना चाहिए जिसे साबूदाना धीरे-धीरे अपने भीतर पूरी तरह सोख ले। पानी की अधिकता दानों की बनावट को नुकसान पहुंचाती है और खिचड़ी को चिपचिपा बना देती है।
भिगोने के तय समय के बाद यदि बर्तन की तली में थोड़ा भी अतिरिक्त पानी बचा दिखाई दे, तो उसे तुरंत पूरी तरह छानकर बाहर निकाल देना आवश्यक है। पानी निथारने के बाद साबूदाने को कुछ समय के लिए बिना हिलाए-डुलाए ऐसे ही छोड़ दें। इस प्रक्रिया से दानों के भीतर मौजूद नमी समान रूप से फैल जाती है और उनका मूल टेक्सचर सुरक्षित बना रहता है।
साबूदाने के तैयार होने की पहचान और पकाने के नियम
साबूदाना पकाने लायक हुआ है या नहीं, इसका फैसला सिर्फ घड़ी देखकर नहीं किया जाना चाहिए। इसकी सही जांच के लिए भीगे हुए साबूदाने का एक दाना अपनी दो उंगलियों के बीच रखकर हल्का सा दबाएं। यदि दाना बिना किसी सख्त गांठ के आसानी से मसल जाता है, तो इसका स्पष्ट संकेत है कि साबूदाना पकाने के लिए बिल्कुल तैयार है।
कड़ाही में खिचड़ी तैयार करते वक्त उसे बार-बार कलछी से चलाने की भूल न करें। कड़ाही में बार-बार जोर से चलाने पर दानों की सतह टूटने लगती है और उनसे स्टार्च बाहर आने लगता है, जो खिचड़ी को चिपचिपा कर देता है। इसलिए जरूरत पड़ने पर ही इसे बहुत हल्के हाथों से धीरे-धीरे चलाएं। अंत में इसमें भुनी और दरदरी कुटी हुई मूंगफली मिलाना सबसे बढ़िया उपाय है। मूंगफली अतिरिक्त नमी को सोखने का काम करती है और खिचड़ी को एक लाजवाब कुरकुरापन व स्वाद देती है।



















