केन्या ने अपने पुराने ई-वीजा सिस्टम को हटाकर एक नया इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल अथॉराइजेशन यानी ETA सिस्टम लागू कर दिया है, जिससे मासाई मारा में शेर और वाइल्डबीस्ट देखने जाने वाले भारतीय सैलानियों की तैयारी का तरीका पूरी तरह बदल गया है। यह बदलाव अकेले घूमने वालों से लेकर सफारी पर जाने वाले पूरे परिवारों तक, हर विदेशी यात्री पर लागू होता है, और अब सही कागजी कार्रवाई पहले से पूरी करना ही नैरोबी में आसान लैंडिंग और इमिग्रेशन पर लंबे इंतजार के बीच का फर्क तय करता है।
ETA में आखिर बदला क्या है
ETA यानी इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल अथॉराइजेशन पूरी तरह डिजिटल स्क्रीनिंग सिस्टम है, जिसने भारतीय नागरिकों समेत केन्या आने वाले हर विदेशी यात्री के लिए पुराने वीजा प्रोसेस की जगह ले ली है। हर यात्री को अपनी फ्लाइट से कम से कम तीन दिन पहले आधिकारिक पोर्टल के जरिए आवेदन जमा करना होता है। केन्या का कहना है कि यह डिजिटल व्यवस्था सीमा सुरक्षा को बेहतर तरीके से संभालने में मदद करती है और साथ ही भारत से आने वाले पर्यटकों को भी बढ़ावा देती है, यही वजह है कि ट्रैवल एजेंट यात्रियों को आखिरी वक्त का इंतजार किए बिना पहले से आवेदन करने की सलाह दे रहे हैं।
भारतीय सैलानियों को कौन से दस्तावेज तैयार रखने होंगे
आवेदन प्रक्रिया खुद में आसान है, लेकिन सही दस्तावेज स्कैन करके तैयार रखना जरूरी है। यात्रियों के पासपोर्ट की वैधता केन्या पहुंचने की तारीख से कम से कम छह महीने तक बची होनी चाहिए। इसके अलावा पोर्टल पर कन्फर्म रिटर्न फ्लाइट टिकट और होटल बुकिंग की डिजिटल कॉपी भी अपलोड करनी पड़ती है। यह सब पहले से तैयार रखना इसलिए जरूरी है क्योंकि कोई भी दस्तावेज छूट जाने पर एयरपोर्ट पर आखिरी बोर्डिंग चेक के वक्त दिक्कत खड़ी हो सकती है, और एयरलाइन स्टाफ अधूरे कागजात वाले यात्रियों को रोक भी सकता है।
फोटो और अप्रूवल डॉक्यूमेंट
प्रक्रिया के तहत हाल की एक पासपोर्ट साइज फोटो भी अपलोड करनी होती है, और आवेदकों के पास एक चालू ईमेल पता होना चाहिए, क्योंकि मंजूरी मिलने के बाद अथॉराइजेशन उसी ईमेल पर भेजा जाता है। मंजूरी मिलने के बाद यात्री को या तो इसका प्रिंटआउट लेना होता है या फोन में इसे सेव करके रखना होता है, क्योंकि यह दस्तावेज सिर्फ एयरपोर्ट पर ही नहीं बल्कि केन्या के मशहूर नेशनल पार्कों में एंट्री के वक्त भी दिखाना पड़ता है।
कितना खर्च आएगा और कितने दिन रुक सकते हैं
ETA के लिए तय प्रोसेसिंग फीस करीब बत्तीस डॉलर प्रति पर्यटक है, जो मौजूदा एक्सचेंज रेट पर भारतीय यात्रियों के लिए लगभग दो हजार सात सौ रुपये के बराबर बैठती है। यह फीस नॉन रिफंडेबल है, यानी बाद में ट्रिप कैंसिल हो जाए या प्लान बदल जाए तो भी पैसा वापस नहीं मिलता, इसलिए भुगतान से पहले तारीखों को लेकर पूरी तरह निश्चिंत हो लेना बेहतर है। ज्यादातर सैलानियों को नब्बे दिन तक रुकने की इजाजत मिलती है, जो केन्या के सफारी सर्किट पर बने लंबे टूर के लिए काफी है।
सिर्फ ट्रांजिट से गुजरने वालों के लिए नियम
जो यात्री केन्या को सिर्फ किसी और देश जाने के लिए ट्रांजिट पॉइंट की तरह इस्तेमाल करते हैं, उन्हें बारीक नियमों पर खास ध्यान देना चाहिए। लेओवर के दौरान अगर यात्री एयरपोर्ट टर्मिनल के अंदर ही रुके रहते हैं, तो उन्हें ETA की जरूरत नहीं पड़ सकती। लेकिन स्टॉपओवर के दौरान थोड़ी देर के लिए भी टर्मिनल से बाहर निकलने पर पूरा अथॉराइजेशन जरूरी हो जाता है, इसलिए एयरपोर्ट गेट के बाहर किसी छोटी ट्रिप की योजना बनाने से पहले लेओवर का सही समय जरूर जांच लें।
सफारी की तैयारी के लिए यह क्यों मायने रखता है
वाइल्डलाइफ और खुले मैदानों के दीवाने कई भारतीय यात्रियों की बकेट लिस्ट में केन्या का सफारी हमेशा से ऊपर रहा है, और अब यह नया डिजिटल सिस्टम इस सपने को महज एक ऑनलाइन आवेदन जितना करीब ले आया है। पासपोर्ट, टिकट, होटल बुकिंग और फोटो जैसी चीजें पहले से तैयार रखने से यात्री बेफिक्र होकर असली अनुभव पर ध्यान दे पाते हैं, चाहे वह शिकारी जानवरों को ट्रैक करना हो या मैदानों में होने वाला ग्रेट माइग्रेशन देखना हो।













