डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक नया दावा साझा किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी यानी एनएसए ने एक खास लेबल के डर से चुनावी सुरक्षा से जुड़ी अहम रिपोर्टिंग को रोक कर रखा था। इस मामले से जुड़े एक आंतरिक मेमो के हवाले से यह बात सामने आई है कि चुनाव के दौरान संभावित खतरों की जानकारी को दबाया गया था।
मेमो में क्या खुलासे हुए हैं
सामने आए मेमो के अनुसार, एनएसए के भीतर अधिकारियों ने चुनावी प्रक्रिया पर मंडराते खतरों से जुड़ी रिपोर्ट्स को आगे बढ़ाने में देरी की या उन्हें रोक लिया। इसके पीछे यह आशंका बताई जा रही है कि इस तरह की रिपोर्टिंग से कथित डीप स्टेट और राजनीतिक विवादों को हवा मिल सकती थी।
चुनावी सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां
यह पूरा मामला अमेरिकी खुफिया तंत्र और चुनावी अखंडता के बीच के संवेदनशील संबंधों को उजागर करता है। जब भी चुनाव के दौरान बाहरी या आंतरिक दखल की बात सामने आती है, तो सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठते हैं। इस ताजा खुलासे ने खुफिया एजेंसियों के कामकाज के तौर-तरीकों पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।

























