केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हरियाणा के पानीपत में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) कार्यालय में तैनात असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल हेमलता हेडाऊ को 30 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी इस कार्रवाई के तहत सीबीआई ने अधिकारी को उस वक्त पकड़ा जब वह एक कारोबारी की लंबित फाइल को आगे बढ़ाने के एवज में रिश्वत की रकम ले रही थीं। इसके साथ ही केंद्रीय जांच एजेंसी ने हाल के दिनों में भारतीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा है, जहां भिलाई में पदस्थ सीनियर इंजीनियर के परिसरों से 77 लाख रुपये नकद और 14 लाख रुपये के सोने के आभूषण बरामद किए गए थे।
पानीपत में असिस्टेंट DGFT के खिलाफ सीबीआई का ट्रैप ऑपरेशन
सीबीआई द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के मुताबिक पानीपत स्थित संयुक्त विदेश व्यापार महानिदेशालय के दफ्तर में पदस्थ असिस्टेंट DGFT हेमलता हेडाऊ के खिलाफ 19 अगस्त 2026 को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत किया गया था। आरोप है कि शिकायतकर्ता के क्लाइंट ने एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल Goods (EPCG) योजना के तहत ऑथराइजेशन के लिए आवेदन किया था। इस फाइल में दर्ज कुछ तकनीकी कमियों को दूर करने और ऑथराइजेशन जारी करने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए महिला अधिकारी ने 30 हजार रुपये की अवैध मांग रखी थी।
शिकायत मिलने के बाद जांच एजेंसी ने मामले का सत्यापन किया और 19 अगस्त को ही पानीपत में एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी अधिकारी को 30 हजार रुपये की रिश्वत सौंपी, सीबीआई की टीम ने हेमलता हेडाऊ को मौके पर ही धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई अधिकारियों ने पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में आरोपी को पेश करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके साथ ही एजेंसी की टीमों ने पानीपत और पंचकूला स्थित अधिकारी के आवास एवं दफ्तरी ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया ताकि भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य दस्तावेजों और संपत्तियों का सुराग हासिल किया जा सके।
क्या है EPCG योजना और किस काम के बदले मांगी गई थी रिश्वत
एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल Goods यानी EPCG केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण व्यापारिक प्रोत्साहन व्यवस्था है। इस योजना के जरिए भारत से माल और सेवाओं का निर्यात करने वाले उत्पादक या कंपनियां बिना सीमा शुल्क दिए अथवा रियायती शुल्क पर गुणवत्तापूर्ण पूंजीगत सामान और आधुनिक मशीनरी का आयात कर सकती हैं। बदले में संबंधित कंपनियों को तय समय सीमा के भीतर आयातित मशीनरी के मूल्य का छह गुना निर्यात लक्ष्य पूरा करना होता है।
व्यापारियों और निर्यातकों के लिए EPCG ऑथराइजेशन हासिल करना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इसके बिना सीमा शुल्क छूट का लाभ नहीं मिलता। आरोप है कि इसी महत्वपूर्ण मंजूरी से जुड़ी फाइल में त्रुटि सुधारने और उसे स्वीकृत करने के नाम पर असिस्टेंट DGFT हेमलता हेडाऊ ने 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। सीबीआई के अधिकारियों का कहना है कि फाइल रोकने और जानबूझकर बाधाएं खड़ी करने वाले लोक सेवकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
छत्तीसगढ़ के भिलाई में रेलवे के सीनियर DME पर भी सीबीआई का शिकंजा
सरकारी विभागों में जारी घूसखोरी पर प्रहार करते हुए सीबीआई ने इससे ठीक पहले छत्तीसगढ़ में भी एक बड़े रेल अधिकारी को रिश्वतखोरी के मामले में सलाखों के पीछे भेजा। साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे (SECR) भिलाई में पदस्थ इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ मैकेनिकल इंजीनियर्स (IRSME) कैडर के सीनियर डिविजनल मैकेनिकल इंजीनियर (DME) पर ठेकेदार के लंबित बिलों का भुगतान करने के बदले भारी रकम मांगने का आरोप लगा था।
सीबीआई में 13 अगस्त 2026 को दर्ज शिकायत के अनुसार सीनियर DME ने ठेकेदार से 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में बातचीत के दौरान अधिकारी 1 लाख रुपये लेने पर राजी हो गया था। सीबीआई ने 13 अगस्त को ही भिलाई में जाल बिछाया और अधिकारी को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। जांच में सामने आया कि यह रकम अधिकारी के निर्देश पर एक बिचौलिए के माध्यम से हासिल की गई थी।
छापेमारी में मिला 77 लाख कैश और 14 लाख के जेवरात
रेल अधिकारी की गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई की कई टीमों ने उसके रायपुर और भिलाई स्थित रिहाइशी मकानों तथा प्रशासनिक कार्यालयों पर एक साथ छापेमारी की। इस गहन तलाशी के दौरान सीबीआई को अलमारियों और ठिकानों से लगभग 77 लाख रुपये की अघोषित नकदी बरामद हुई। इसके अतिरिक्त लगभग 14 लाख रुपये मूल्य के सोने और चांदी के कीमती आभूषण भी जब्त किए गए। साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई ने 14 अगस्त 2026 को आरोपी सीनियर DME को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया।
इसके अलावा सीबीआई ने राजस्थान में उत्तर पश्चिम रेलवे से जुड़े एक अन्य घूसखोरी मामले में भी 5 रेलवे अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि चाहे विदेश व्यापार विभाग हो या भारतीय रेलवे, सार्वजनिक सेवाओं के बदले रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।





















