हरियाणा के फरीदाबाद जिले में बल्लभगढ़ के अंतर्गत आने वाले मोहना क्षेत्र के हजारों निवासियों के लिए सुगम सार्वजनिक परिवहन का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। करीब 3 करोड़ 16 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया मोहना बस अड्डा निर्माण कार्य पूरा हो जाने के सवा साल बाद भी बंद पड़ा हुआ है। आधुनिक सुविधाओं से लैस भवन बनकर पूरी तरह तैयार है, लेकिन हरियाणा रोडवेज प्रशासन द्वारा इसे अपने अधिकार क्षेत्र में न लेने की वजह से स्थानीय यात्रियों को कोई राहत नहीं मिल पा रही है। आज भी चिलचिलाती धूप, तेज बारिश और बदलते मौसम के बीच लोगों को सड़कों के किनारे खुले आसमान के नीचे ही बसों की प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
विभागीय तालमेल की कमी से अटकी 3.16 करोड़ रुपये की परियोजना
मोहना में एक आधुनिक बस अड्डे के निर्माण की घोषणा राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने लगभग 6 साल पहले की थी। इस घोषणा को अमलीजामा पहनाने के उद्देश्य से हरियाणा रोडवेज प्रशासन की तरफ से जनवरी 2023 में निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को 3 करोड़ 16 लाख रुपये की राशि हस्तांतरित की गई थी। पीडब्ल्यूडी ने तय समयसीमा का पालन करते हुए अप्रैल 2025 में बस अड्डे की पूरी इमारत का निर्माण कार्य संपन्न करा दिया था। हालांकि, निर्माण प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद भी प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अंतर-विभागीय समन्वय की ढिलाई के कारण रोडवेज ने इस परिसर का अधिग्रहण नहीं किया, जिससे पूरी परियोजना अब भी कागजों और तालों में ही सिमटी हुई है।
30 गांवों के यात्रियों को महंगे ऑटो किराये से मिलेगी राहत
सार्वजनिक बस सेवा उपलब्ध न होने के कारण स्थानीय निवासियों की दैनिक आवाजाही बेहद खर्चीली और कठिन बनी हुई है। मोहना गांव के निवासी बच्चू सिंह का कहना है कि इमारत बने लगभग डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन उद्घाटन और परिचालन की तारीख अब तक तय नहीं की जा सकी है। यदि संबंधित विभाग जल्द से जल्द इसे शुरू करता है, तो मोहना के अलावा आसपास फैले 25 से 30 गांवों की आबादी को सीधा परिवहन लाभ मिलेगा। इस टर्मिनल से न केवल बल्लभगढ़ और पलवल बल्कि उत्तर प्रदेश और निर्माणाधीन जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की तरफ जाने वाले यात्रियों को भी सीधी कनेक्टिविटी हासिल होगी।
गांव के ही एक अन्य निवासी दीपक का कहना है कि बस सेवा के अभाव में लोगों को रोजाना अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए महंगे ऑटो-रिक्शा का सहारा लेना पड़ता है। जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ से ग्रामीण काफी परेशान हैं। नियमित बस संचालन शुरू होने से यात्रियों के पैसे और समय दोनों की बचत होगी, साथ ही दिल्ली, फरीदाबाद और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों के लिए सुरक्षित सफर का रास्ता साफ हो सकेगा।
सफाई के अभाव में बदहाल हो रहा बस अड्डा परिसर
बस अड्डा परिसर शुरू न होने का खमियाजा अब वहां की स्वच्छता और रखरखाव पर भी साफ दिखाई देने लगा है। परिसर के समीप चाट की रेहड़ी लगाने वाले सुरेंद्र बताते हैं कि दुकान के ठीक पीछे और बस अड्डे की दीवार के साथ गंदगी का बड़ा ढेर लगा हुआ है। सफाई व्यवस्था न होने के कारण बारिश के मौसम में स्थिति और अधिक चिंताजनक हो जाती है। यद्यपि ग्राम सरपंच और स्थानीय अधिकारी प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरते हैं, फिर भी गंदगी के इस अंबार पर किसी का ध्यान नहीं गया है।
क्षेत्रीय निवासियों को आशंका है कि यदि राज्य सरकार और रोडवेज प्रशासन ने समय रहते इस बस अड्डे का संचालन प्रारंभ नहीं किया, तो रखरखाव और देखरेख की अनदेखी में करोड़ों रुपये की लागत से खड़ा किया गया यह नया ढांचा धीरे-धीरे जर्जर होकर खराब हो जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि विभागीय बाधाओं को तुरंत दूर कर बस अड्डे को चालू किया जाए ताकि आम जनता को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।



















