प्रतिभा अक्सर उम्र की मोहताज नहीं होती, बशर्ते उसे सही समय पर पहचाना और पोषित किया जाए। अंबाला जिले के साहा क्षेत्र के महमूदपुर गांव से एक ऐसी ही प्रेरक कहानी सामने आई है, जहाँ एक किसान परिवार के साढ़े चार वर्षीय बच्चे ने अपनी अद्भुत स्मरण शक्ति और लगन से पूरे जिले का नाम रोशन करते हुए एक विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। नन्हे Miyan Saini ने हैरतअंगेज रूप से 1 मिनट 44 सेकंड में दुनिया के 195 देशों के राष्ट्रीय ध्वजों को पहचानकर उनके नाम बताए और अपना नाम Worldwide Book of Records में दर्ज करा लिया।
प्रतिभा की शुरुआती पहचान
महमूदपुर गांव का यह छोटा बालक आज हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। जिस उम्र में बच्चे अक्सर खिलौनों और खेलों में व्यस्त रहते हैं, Miyan ने अपनी असाधारण क्षमता से यह साबित कर दिया है कि यदि बच्चों की स्वाभाविक रुचियों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो वे असंभव लगने वाले लक्ष्यों को भी हासिल कर सकते हैं। TrendKia से बात करते हुए, Miyan के पिता Rohit Saini ने बताया कि उनका बेटा अंबाला के SD School में LKG का छात्र है और उसमें बचपन से ही नई चीजें सीखने की अद्भुत जिज्ञासा रही है।
Rohit Saini ने बताया कि उनकी पत्नी Madhu Saini, जो स्वयं एक पोस्ट ग्रेजुएट हैं, ने सबसे पहले बेटे की तेज स्मरण शक्ति को पहचाना था। जब Miyan सिर्फ तीन साल का था, तभी वह अलग-अलग देशों के नाम आसानी से याद कर लेता था। इस शुरुआती पहचान के बाद, Madhu Saini ने उसे नियमित रूप से दुनिया के 195 देशों के नाम और उनके राष्ट्रीय ध्वजों के बारे में सिखाना शुरू किया।
विश्व रिकॉर्ड तक का सफर
Rohit Saini के अनुसार, परिवार ने इंटरनेट पर विभिन्न विश्व रिकॉर्ड्स की जानकारी जुटाई ताकि यह पता चल सके कि Miyan कितने समय में सभी देशों के झंडों की पहचान कर सकता है। लगातार अभ्यास के बाद, उन्होंने 28 अप्रैल को Miyan के प्रदर्शन का एक वीडियो Worldwide Book of Records के पोर्टल पर अपलोड कर आवेदन किया। कुछ ही दिनों पहले, संस्था ने वीडियो की गहन जांच और सत्यापन के बाद Miyan की उपलब्धि को एक रिकॉर्ड के रूप में स्वीकार कर लिया।
जब Miyan का विश्व रिकॉर्ड प्रमाणपत्र, मेडल, टी-शर्ट, कैप और पेन घर पहुंचा, तो परिवार की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। इस अद्भुत उपलब्धि की चर्चा अब पूरे गांव में फैल गई है, और लोग नन्हे Miyan को बधाई देने के लिए उसके घर पहुंच रहे हैं।
प्रेरणा का प्रतीक
Miyan के पिता ने बताया कि वे एक साधारण किसान परिवार से आते हैं, लेकिन उन्होंने कभी अपने बेटे के सपनों को सीमित नहीं होने दिया। उनका मानना है कि यह उपलब्धि सिर्फ एक शुरुआत है, और वे चाहते हैं कि Miyan भविष्य में भी अपनी प्रतिभा के बल पर नए-नए कीर्तिमान स्थापित करे और देश का नाम रोशन करे। Miyan के दादा Ramchandra Saini ने भी गर्व के साथ कहा कि उनके पोते को शुरू से ही पढ़ने-लिखने में विशेष रुचि थी। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी छोटी उम्र में वह विश्व रिकॉर्ड बना देगा।
Ramchandra Saini ने आगे कहा कि Miyan की यह सफलता गांव के अन्य बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है: यदि बच्चों की प्रतिभा को सही समय पर पहचाना जाए और उन्हें उचित मार्गदर्शन मिले, तो वे किसी भी ऊंचाई को छू सकते हैं। महमूदपुर का यह नन्हा सितारा आज अंबाला की नई पहचान बन चुका है, और उसकी सफलता यह संदेश दे रही है कि बड़े सपने देखने के लिए बड़ी उम्र नहीं, बल्कि बड़ा हौसला चाहिए।













