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असावटी रेलवे अंडरपास: 36 गांवों की लाइफलाइन पर 12 महीने जलभराव का संकटहरियाणा
11 जुल॰ 2026, 10:34 am (118 दिन पहले)· 1

असावटी रेलवे अंडरपास: 36 गांवों की लाइफलाइन पर 12 महीने जलभराव का संकट

फरीदाबाद के असावटी रेलवे अंडरपास में सालभर पानी भरा रहने से 36 गांवों के लोग जूझ रहे हैं, जहां मानसून की बारिश स्थिति को और बदतर बना देती है।

फरीदाबाद में मानसून के आगमन के साथ ही बुनियादी सुविधाओं की पोल खुल गई है। हालांकि बारिश का दौर थम चुका है, लेकिन पृथला विधानसभा क्षेत्र के असावटी रेलवे अंडरपास की समस्या जस की तस बनी हुई है। इस अंडरपास में जलभराव की स्थिति ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, जिससे आवाजाही में भारी कठिनाई हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई तात्कालिक समस्या नहीं है, बल्कि इस अंडरपास के निर्माण के बाद से ही जलभराव की स्थिति बनी हुई है। बरसात के दिनों में हालात इतने गंभीर हो जाते हैं कि कार और मोटरसाइकिलें बीच पानी में ही फंस जाती हैं।

सालभर पानी से जूझते ग्रामीण

स्थानीय निवासी विनोद ने इस समस्या की गंभीरता को साझा करते हुए बताया कि असावटी गांव का निवासी होने के नाते वे रोज इस मार्ग का उपयोग करते हैं। बारिश के दौरान अंडरपास में पानी का स्तर इतना बढ़ जाता है कि वाहन डूबने लगते हैं। यह मार्ग केवल एक गांव के लिए नहीं, बल्कि आसपास के 36 गांवों को शहर से जोड़ने वाली एक प्रमुख कड़ी है। इसके बंद हो जाने से पूरे इलाके का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होता है।

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वैकल्पिक रास्तों का अभाव

असावटी गांव के ही एक अन्य निवासी देवी राम ने बताया कि जटौला अंडरपास की स्थिति भी कुछ इसी तरह है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ग्रामीण जाएं तो कहां से जाएं? उनका कहना है कि इस अंडरपास में 12 महीने पानी का कब्जा रहता है। प्याले रेलवे फ्लाईओवर का निर्माण कार्य जारी होने के कारण कोई दूसरा सुरक्षित रास्ता भी उपलब्ध नहीं है। यदि लोग बल्लभगढ़ के रास्ते जाने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त 40 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। यह परेशानी स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों, कामकाजी पेशेवरों और किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।

स्थायी समाधान की उम्मीद

संजय और कुंवरपाल जैसे स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी की निकासी के बावजूद समस्या की जड़ वहीं बनी रहती है। बारिश के मौसम में पानी का स्तर ढाई से तीन फीट तक पहुंच जाता है, जिससे वाहन चालकों के मन में हमेशा डर बना रहता है कि कहीं उनका वाहन बीच रास्ते में बंद न हो जाए। सनी ने बताया कि कल पानी निकालने की कोशिश भी की गई थी, लेकिन वह विफल रही और जलभराव यथावत है। विकास रावत का मानना है कि पिछले कई वर्षों से इस समस्या को लगातार झेला जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस या स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। बारिश होने पर स्कूल प्रबंधन को भी छुट्टी घोषित करनी पड़ती है क्योंकि घुटनों से ऊपर तक पानी भर जाता है। ग्रामीणों की मांग है कि मानसून के दौरान सिर्फ पानी पंप करने की खानापूर्ति न हो, बल्कि इस समस्या का पक्का हल निकाला जाए ताकि हर साल उन्हें इसी प्रकार के संकट का सामना न करना पड़े।

सवाल-जवाब

असावटी रेलवे अंडरपास की मुख्य समस्या क्या है?
इस अंडरपास में 12 महीने पानी भरा रहता है, जो बारिश के दौरान और भी बढ़ जाता है।
यह समस्या कितने गांवों को प्रभावित करती है?
यह अंडरपास लगभग 36 गांवों को जोड़ने वाली एक प्रमुख कड़ी है, जो सभी इससे प्रभावित हैं।
क्या पानी निकालने की कोशिश की गई है?
हां, स्थानीय लोगों के अनुसार पानी निकालने की कोशिश की जाती है, लेकिन कोई स्थायी समाधान न होने के कारण स्थिति फिर वैसी ही हो जाती है।
क्या ग्रामीणों के पास कोई वैकल्पिक रास्ता है?
फिलहाल प्याले रेलवे फ्लाईओवर के निर्माण के कारण कोई सुरक्षित विकल्प नहीं है, और बल्लभगढ़ के रास्ते में 40 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ता है।
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