हरियाणा के झज्जर जिले में चर्चा का विषय बने डीघल गांव के दिव्यांग जितेन्द्र हत्याकांड में पुलिस के हाथ अहम सफलता लगी है। जांच टीम ने मुंबई पहुंचकर एक नाबालिग सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया है। जिला पुलिस आयुक्त डॉ. राजश्री ने पत्रकारों से बातचीत में इस कार्रवाई का ब्योरा साझा किया।
कौन-कौन आया पुलिस की पकड़ में
एसीपी श्मशेर सिंह की मौजूदगी में हुई इस प्रेस वार्ता में पुलिस कमिश्नर डॉ. राजश्री ने बताया कि पकड़े गए लोगों में डाबौदा खुर्द का रहने वाला दीपांशु, राजस्थान के कलाना गांव का विशाल उर्फ हनुमान नगढ़िया और एक नाबालिग शामिल है। नाबालिग को अदालत में पेश किए जाने के बाद सुधार गृह भेजा गया है, वहीं बाकी दोनों को चार दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
इनामी थे दो आरोपी
पुलिस आयुक्त के मुताबिक विशाल और नाबालिग आरोपी पर राजस्थान पुलिस की ओर से 25-25 हजार रुपये का इनाम रखा गया था। इन दोनों के खिलाफ राजस्थान में हत्या और लूटपाट जैसी संगीन धाराओं में पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। लंबे अरसे से ये पुलिस की पकड़ से दूर बने हुए थे और बार-बार अपना ठिकाना बदल रहे थे। तकनीकी विश्लेषण और खुफिया जानकारी के सहारे ही पुलिस टीम मुंबई में इन तक पहुंच सकी और इन्हें धर दबोचा।
खूनी रंजिश की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि डीघल गांव में बीते कुछ समय से पुरानी खूनी अदावत चल रही है, जिसके चलते दोनों पक्ष एक-दूसरे को निशाना बना रहे हैं। इसी रंजिश की कड़ी में पहले साहिल उर्फ सोनू की हत्या हुई और उसके कुछ ही दिन बाद 52 वर्षीय दिव्यांग जितेन्द्र को भी मौत के घाट उतार दिया गया। हमलावरों ने रात के समय उस वक्त ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जब जितेन्द्र अपने घर के एक कमरे में सो रहा था।
दिव्यांगता को बनाया कमजोर कड़ी
परिवार वालों का कहना है कि जितेन्द्र खुद उठ-बैठ पाने में असमर्थ था और हत्यारों ने इसी कमजोरी को भांपकर उसे अपना शिकार बनाया। देर रात घर में घुसकर अंजाम दी गई इस वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी। डॉ. राजश्री ने बताया कि गिरफ्तार लोगों से पूछताछ अब भी जारी है और वारदात में इस्तेमाल हुए हथियार अभी बरामद किए जाने बाकी हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि रिमांड के दौरान कई अहम राज खुल सकते हैं। आयुक्त ने यह भी कहा कि इस मामले से जुड़े अन्य फरार आरोपी पुलिस की नजर में हैं और उनकी धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।













